असिस्टेंट प्रोफेसरों की दिव्यांगता सर्टिफिकेट की जांच करेगा संभागीय मेडिकल बोर्ड

Sanjay Sharma | Apr 02, 2026, 23:28 IST
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fake disability certificate
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग ने असिस्टेंट प्रोफेसर, लायब्रेरियन और खेल अधिकारियों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड को आदेश दिए।

News in Short

  • मध्य प्रदेश में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के मामलों की जांच शुरू की गई है।
  • उच्च शिक्षा विभाग ने मेडिकल बोर्ड से दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जांच करवाई।
  • ग्वालियर संभाग से सबसे अधिक फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट की शिकायतें आईं।
  • 19 सहायक प्राध्यापकों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र को संदेह के घेरे में रखा गया।
  • सभी सरकारी कॉलेजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जांच के लिए निर्देश दिए गए।

News in Detail

BHOPAL. असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा 2022 और 2024 के माध्यम से भर्ती दिव्यांग सहायक प्राध्यापकों की अशक्तता की जांच संभागीय मेडिकल बोर्ड करेगा। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सरकारी कॉलेज प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं।

सहायक प्राध्यापकों के साथ ही दिव्यांग लायब्रेरियन और खेल अधिकारियों की दिव्यांगता का परीक्षण भी कराया जाएगा। दिव्यांगता सर्टिफिकेट के दुरुपयोग के पुराने मामलों को देखते हुए सभी कॉलेजों को पत्र जारी किए गए हैं।

fake disability certificate
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fake disability certificate (2)
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ग्वालियर संभाग में सबसे ज्यादा शिकायतें

मध्य प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा 2022 और 2024 से चुने गए सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई थी। इसके साथ ही लायब्रेरियन और खेल अधिकारी भी भर्ती किए गए थे।

उच्च शिक्षा विभाग को इन भर्तियों में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे नियुक्ति पाने की शिकायतें मिली थीं। ग्वालियर संभाग में सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आई थीं।

इसको देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने ग्वालियर संभाग के सरकारी कॉलेजों में नियुक्ति पाने वाले सहायक प्राध्यापकों की अशक्तता की जांच के आदेश भी दिए थे। अब प्रदेश के सभी जिलों के कॉलेज प्राचार्यों को दिव्यांग सर्टिफिकेट के आधार पर अशक्तता की जांच कराई जाएगी।

पूर्व में नियुक्ति पाने वालों की थी जांच

उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव वीरन सिंह भलावी द्वारा कॉलेज प्राचार्यों को पत्र जारी किया गया है। इसमें फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे नियुक्तियों का उल्लेख किया गया है। पत्र में प्राचार्यों को सहायक प्राध्यापक, लायब्रेरियन और खेल अधिकारियों के दिव्यांग सर्टिफिकेट की संभागीय बोर्ड से जांच के निर्देश दिए गए हैं।

संभागीय बोर्ड करेगा दिव्यांगता की पुष्टि

संभागीय मेडिकल बोर्ड की जांच में अशक्तता की पुष्टि के आधार पर ही चयनित सहायक प्राध्यापक और अन्य को कार्यभार सौंपा जाएगा। इसके लिए भी उच्च शिक्षा विभाग ने प्राचार्यों को निर्देशित किया है।

दिव्यांग सर्टिफिकेट के आधार पर पूर्व में नियुक्ति पाने वालों को भी मेडिकल बोर्ड से जांच करानी होगी। ऐसा न कराने वालों की जानकारी भी उच्च शिक्षा विभाग ने तलब की है।

ग्वालियर संभाग में सबसे ज्यादा शिकायत

फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे उच्च शिक्षा विभाग में 2023 में हुई नियुक्तियों पर जमकर सवाल उठे थे। ग्वालियर संभाग से सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आई थीं। तब उच्च शिक्षा आयुक्त के निर्देश पर जांच के निर्देश दिए गए थे।

दिव्यांगता के प्रतिशत की जांच के लिए क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक ने 19 सहायक प्राध्यापकों की सूची जारी की थी। इन्हें दोबारा जांच के लिए उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे।

संदेह के घेरे में आए थे 19 दिव्यांग सर्टिफिकेट

ग्वालियर के माधवराव सिंधिया मॉडल साइंस कॉलेज के 03, महारानी लक्ष्मीबाई आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज के 01, डॉ.भगवत सहाय कॉलेज के 01, कमलाराजा कन्या पीजी ऑटोनॉमस कॉलेज के 01, शिवपुरी के श्रीमंत माधवराव सिंधिया पीजी कॉलेज की 01, शासकीय पीजी कॉलेज करैरा के 01, शासकीय छत्रसाल कॉलेज पिछोर के 02, मुरैना के शासकीय कॉलेज बानमौर के 01, शासकीय पीजी एक्सीलेंस कॉलेज मुरैना 01, शासकीय अग्रणी कॉलेज श्योपुर के 4, गणेश शंकर विद्यार्थी कॉलेज मुंगावली अशोकनगर के 01, शासकीय कॉलेज आरोन गुना के 01 और शासकीय कॉलेज गोरमी भिंड के 01 सहायक प्राध्यापक सहित 19 को जांच के लिए बुलाया गया था।

निष्कर्ष :

मध्यप्रदेश में दिव्यांग सहायक प्राध्यापकों, लायब्रेरियन और खेल अधिकारियों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जांच कराना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फर्जी सर्टिफिकेट के दुरुपयोग को रोकने और सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आवश्यक है। मेडिकल बोर्ड की जांच से योग्य उम्मीदवारों को सही अवसर मिलेंगे।

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