नकली परमिट कांड में आबकारी विभाग का एक्शन, सोम डिस्टलरीज ग्रुप रायसेन का लाइसेंस सस्पेंड

Ramanand Tiwari | Feb 04, 2026, 23:52 IST
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मध्यप्रदेश में नकली परमिट और अवैध शराब परिवहन के गंभीर मामले में आबाकारी विभाग ने सोम डिस्टलरीज ग्रुप रायसेन का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। 'द सूत्र' द्वारा उठाए गए मामले के बाद आबकारी विभाग हरकत में आया है।

मध्यप्रदेश में नकली परमिट और अवैध शराब परिवहन के गंभीर मामले में आखिरकार बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है।


''द सूत्र'' द्वारा उठाए गए मामले के बाद आबकारी विभाग हरकत में आया और सोम डिस्टलरीज समूह के सभी प्रमुख लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए। यह कार्रवाई अपर सत्र न्यायालय देपालपुर द्वारा दोष सिद्धि के बाद की गई है। आदेश 4 फरवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा।



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आबकारी आयुक्त का सख्त आदेश

मध्यप्रदेश के आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने स्पष्ट आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि नकली परमिट और अवैध शराब परिवहन में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। निलंबित लाइसेंस सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड, सेहतगंज, रायसेन और सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज, रोजराचक, रायसेन के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिए गए हैं।



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कोर्ट का फैसला

देपालपुर (इंदौर) के माननीय अपर सत्र न्यायाधीश ने इस प्रकरण में स्पष्ट रूप से माना कि अवैध शराब परिवहन किया गया। नकली परिवहन परमिट और दस्तावेज तैयार किए गए। यह कृत्य कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।


कोर्ट ने इसे संगीन आर्थिक अपराध मानते हुए दोष सिद्ध किया।



नकली शराब परिवहन परमिट बनाए गए थे और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शराब की ढुलाई की गई। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ। कर्मचारियों की भूमिका साबित हुई। अदालत ने इस अपराध को सिद्ध किया। हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई।



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'द सूत्र' की भूमिका यहीं से बदली कहानी

इस पूरे मामले को 'द सूत्र' ने प्रमुखता से उठाया था। तथ्यों और कानूनी स्थिति को सामने लाने के बाद आबकारी विभाग पर दबाव बढ़ा। फाइलें आगे बढ़ीं और अंततः आबकारी आयुक्त ने सीधी कार्रवाई की। यह साफ तौर पर खबर के असर की जीत मानी जा रही है।



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अब नहीं चलेगा मैनेजमेंट

यह कार्रवाई सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है। यह संदेश है कि नकली परमिट, फर्जी दस्तावेज और अवैध शराब कारोबार अब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काफी समय बाद सही, लेकिन यह फैसला दिखाता है कि जब मामला मजबूती से उठाया जाए और तथ्य साफ हों, तो सिस्टम को झुकना पड़ता है।





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