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News in short
- 237 डीम्ड पर्यावरणीय अनुमतियों को लेकर विवाद सामने आया है।
- तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का आरोप।
- NGT ने इन अनुमतियों की वैधता पर सवाल उठाए।
- सिया चेयरमैन ने अनुमतियों पर आपत्ति जताई और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखा।
- अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को NGT सेंट्रल जोन में होगी।
News in detail
मध्यप्रदेश में पर्यावरणीय नियमों को दरकिनार कर 237 डीम्ड पर्यावरणीय अनुमतियां दिए जाने का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। इस पूरे मामले में तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के नाम सीधे तौर पर जुड़े हैं। आईएएस नवनीत मोहन कोठारी (तत्कालीन प्रमुख सचिव, पर्यावरण), आईएएस श्रीमन शुक्ला (तत्कालीन प्रभारी सदस्य सचिव) और आईएएस उमा महेश्वरी (सदस्य सचिव, सिया)।
आरोप है कि श्रीमन शुक्ला ने 237 डीम्ड अनुमतियां जारी कीं, जिन्हें प्रमुख सचिव स्तर से आगे बढ़ाया गया। यह पूरा विवाद SEIAA (सिया) को बायपास कर लिए गए फैसलों से जुड़ा है, जिस पर अब न्यायिक स्तर पर सख्ती दिख रही है।
आरोप है कि जिन परियोजनाओं को पर्यावरणीय अनुमति सिया की बैठक और जांच के बाद मिलनी चाहिए थी, उन्हें अफसरों ने अपने स्तर पर हरी झंडी दे दी। अब इन फैसलों की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं और मामला NGT सेंट्रल जोन में सुनवाई के लिए तय है।
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सिया चेयरमैन ने क्यों जताई आपत्ति?
सिया के चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान ने इन अनुमतियों पर कड़ी आपत्ति लगाई थी। उनका कहना था कि यह अधिकार सिया के अलावा किसी को नहीं है।
डीम्ड अनुमति देने की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल हुआ
कई मामलों में आपत्ति लगाई जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, राज्य सरकार और मुख्य सचिव को भी पत्र लिखे।
मुख्य सचिव की भूमिका पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक, आमतौर पर छोटे मामलों में भी जांच के निर्देश देने वाले मुख्य सचिव ने इस बड़े प्रकरण में कोई ठोस जांच शुरू नहीं कराई। अब यदि निर्णय अधिकारियों के खिलाफ जाता है, तो मुख्य सचिव से लेकर सभी जिम्मेदार अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ सकते हैं।
‘डीम्ड अनुमति’ की हकीकत क्या है?
यदि किसी प्रोजेक्ट पर 45 दिन तक सिया में निर्णय नहीं होता, और सिया आपत्ति नहीं लगाती। तभी नियमों के तहत सीमित स्थिति में डीम्ड अनुमति मानी जाती है। लेकिन NGT सेंट्रल जोन ने साफ कहा है कि सिया के अलावा किसी को भी पर्यावरणीय अनुमति देने का अधिकार नहीं है।
NGT का सख्त रुख
NGT ने अपने आदेश में माना है कि जारी की गई 237 अनुमतियां अधिकार क्षेत्र से बाहर थीं। यह पद के दुरुपयोग और पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आता है।
कई अनुमतियां निरस्त कर दी गई हैं
अफसरों के बीच चली रस्साकसी भी आई सामने मामले के दौरान सिया के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान भी उजागर हुई। सदस्य सचिव ने एजेंडा और फैसलों को लेकर दबाव के आरोप लगाए। बैठक में लिए गए निर्णय बाद में बदलने की शिकायत की। समान प्रकरणों में अलग-अलग फैसले होने की बात कही गई।
6 महीने में कितनी मंजूरियां दी गईं?
आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं....
- 6 महीने में 21 बैठकें
- 57 प्रोजेक्ट्स को नियमित पर्यावरणीय अनुमति
- 237 प्रकरण डीम्ड शर्तों के तहत
- कुल मिलाकर 294 प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी
अब आगे क्या?
अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को NGT सेंट्रल जोन में होगी। इस पर सिया के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने कहा कि सिया NGT के आदेश का पूरी तरह पालन करेगा। अगर उल्लंघन साबित हुआ, तो अनुमतियां रद्द हो सकती हैं और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी।
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