गैरकानूनी संगठन SIMI पर पांच साल का प्रतिबंध बढ़ाया, गृह मंत्रालय ने जारी किया आदेश, जानें मप्र से सिमी का संबंध, कौन था नागौरी
Jitendra Shrivastava | Jan 29, 2024, 18:26 IST
गैरकानूनी संगठन SIMI पर पांच साल का प्रतिबंध बढ़ाया, गृह मंत्रालय ने जारी किया आदेश, जानें मप्र से सिमी का संबंध, कौन था नागौरी
जीरो टॉलरेंस के तहत 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया' (सिमी) को यूएपीए में अगले पांच सालों के लिए गैरकानूनी संगठन घोषित किया है।
NEWDELHI. 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी)' पर प्रतिबंध को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पांच साल के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय ने सोमवार, 29 जनवरी को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट डालकर इस बैन को बढ़ाए जाने के आदेश की जानकारी दी। गृह मंत्रालय ने पोस्ट में लिखा कि आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीरो टॉलरेंस के दृष्टिकोण के तहत 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया' (सिमी) को यूएपीए के तहत अगले पांच सालों के लिए गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है।
देश में सिमी को सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाला बताया
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि सिमी को भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता को खतरे में डालने के लिए, आतंकवाद को बढ़ावा देने, शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने में शामिल पाया गया है। बीते साल केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) पर लगे प्रतिबंध को सही ठहराया था। केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा था कि सिमी भारतीय राष्ट्रवाद के खिलाफ है।
केंद्र ने हलफनामें में सिमी को कानूनों के विपरीत बताया
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कोई भी संगठन जिसका उद्देश्य भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करना है, उसे अस्तित्व में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में आरोप लगाया कि सिमी के उद्देश्य देश के कानूनों के विपरीत हैं, क्योंकि संगठन का उद्देश्य इस्लाम के प्रचार में छात्रों और युवाओं को जुटाना और जिहाद के लिए समर्थन प्राप्त करना है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया कि कई सालों तक प्रतिबंधित रहने के बावजूद सिमी ने विभिन्न संगठनों के माध्यम से अवैध गतिविधियों में लिप्त रहना जारी रखा है, इसलिए उसके खिलाफ नया प्रतिबंध लगाया गया। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह सिमी पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करे।
मध्यप्रदेश से क्या हैं सिमी के रिलेशन
2001 में बैन हुए सिमी के अध्य्क्ष रहे सफदर के साथ आतंकी आमिर परवेज व सफदर के भाई कमरुद्दीन नागौरी को भी कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। अहमदाबाद में हुए ब्लास्ट मामले में हाईकोर्ट ने 38 आतंकियों को फांसी और 11 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। ब्लास्ट का मास्टरमाइंड सफदर नागौरी महाकाल की नगरी उज्जैन का रहने वाला है। यहीं से उसने सिमी की शुरुआत की थी। पढ़ाई के दौरान ही उसने शोध पत्र के जरिए अपने बगावती मंसूबे जाहिर कर दिए थे। जिसे पढ़कर प्रोफेसरों के होश उड़ गए थे और बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।
कौन हैं सफदर, आमिल और कमरुद्दीन, इन्होंने उज्जैन को बनाया था सिमी का गढ़
1. सिमी का अध्यक्ष कहे जाने वाला सफदर नागौरी
उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील का रहने वाला है। सफदर ने 1999 में विक्रम विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की और वर्ष 2000 में ''बर्फ की आग कब बुझेगी'' नाम से कश्मीर मुद्दे पर एक विवादित शोध-पत्र लिखी थी। सफदर के पिता पुलिस विभाग की क्राइम ब्रांच में एएसआई के पद पर पदस्थ थे, लेकिन सफदर की हरकतों के चलते उन्होंने उससे रिश्ता तोड़ लिया था। सफदर ने उज्जैन में सिमी की नींव रख पूरे मालवांचल समेत देशभर में आतंक की जड़ें फैला दी थी। विशेष समुदाय के कम पढ़े-लिखे वह लोग जो प्लंबर, मजदूर, मैकेनिक, टेलर जैसा काम करते हैं, उनका ब्रेनवाश कर उनके दिमाग में भी सफदर ने जिहाद भर दिया था। बताया जाता है सफदर नागौरी के निर्देशन में इंदौर जिले के एक फॉर्म हाउस पर केरल, झारखंड कर्नाटक के सिमी के सदस्य आए थे। जहां फिजिकल एक्साइज हथियारों की ट्रेनिंग दी जाती थी। सफदर के ही निर्देशन में सिमी की महिला शाखा ''शाइन फोर्स'' भी बनाई गई थी। जिसमें महिलाओं को बुलाया गया था।
2. दूसरा आतंकी सफदर का भाई कमरुद्दीन था
कमरुद्दीन नागौरी जिसका पूरा नाम कमरुद्दीन चांद मोहम्मद नागौरी है। उसे सफदर ने आंध्र प्रदेश की सीमा का चीफ बना दिया था। कमरुद्दीन एक प्रदेश में चीफ रहते हर प्रदेशों में सिमी सदस्य को बनाने का काम करता रहा। कमरुद्दीन को 26 मार्च 2008 को इंदौर में गिरफ्तार किया गया। जिससे कई साजिशों का पता चला था। 2017 में इंदौर सीबीआई कोर्ट ने कमरुद्दीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सफदर जब साबरमती जेल में बंद था और साथियों की मदद से जेल में 213 फीट लंबी सुरंग भी सफदर ने बनाई इसके बारे में पता चलने पर कई आला अधिकारी सकते में आ गए थे। बताया जाता है कि साबरमती जेल से सुरंग के जरिए फरार होकर लक्षद्वीप जाता और वहां से पाकिस्तानी सेना की मदद से दुबई भागने की फिराक में था।
3. तीसरा आतंकी आमिल परवेज
आमिल परवेज उज्जैन जिले के उन्हेल तहसील का निवासी है। आमिल का उन्हेल के छोटा बाजार स्थित एक मकान है। फिलहाल आमिल के मकान में कोई नहीं रहता सिर्फ ताला लटका है। आमिल का परिवार लंबे समय तक यहां रहा और आमिल आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा। जिसके बाद अब आमिल को भी फांसी की सजा सुनाई गई।
देश में सिमी को सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाला बताया
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि सिमी को भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता को खतरे में डालने के लिए, आतंकवाद को बढ़ावा देने, शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने में शामिल पाया गया है। बीते साल केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) पर लगे प्रतिबंध को सही ठहराया था। केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा था कि सिमी भारतीय राष्ट्रवाद के खिलाफ है।
केंद्र ने हलफनामें में सिमी को कानूनों के विपरीत बताया
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कोई भी संगठन जिसका उद्देश्य भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करना है, उसे अस्तित्व में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में आरोप लगाया कि सिमी के उद्देश्य देश के कानूनों के विपरीत हैं, क्योंकि संगठन का उद्देश्य इस्लाम के प्रचार में छात्रों और युवाओं को जुटाना और जिहाद के लिए समर्थन प्राप्त करना है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया कि कई सालों तक प्रतिबंधित रहने के बावजूद सिमी ने विभिन्न संगठनों के माध्यम से अवैध गतिविधियों में लिप्त रहना जारी रखा है, इसलिए उसके खिलाफ नया प्रतिबंध लगाया गया। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह सिमी पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करे।
मध्यप्रदेश से क्या हैं सिमी के रिलेशन
2001 में बैन हुए सिमी के अध्य्क्ष रहे सफदर के साथ आतंकी आमिर परवेज व सफदर के भाई कमरुद्दीन नागौरी को भी कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। अहमदाबाद में हुए ब्लास्ट मामले में हाईकोर्ट ने 38 आतंकियों को फांसी और 11 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। ब्लास्ट का मास्टरमाइंड सफदर नागौरी महाकाल की नगरी उज्जैन का रहने वाला है। यहीं से उसने सिमी की शुरुआत की थी। पढ़ाई के दौरान ही उसने शोध पत्र के जरिए अपने बगावती मंसूबे जाहिर कर दिए थे। जिसे पढ़कर प्रोफेसरों के होश उड़ गए थे और बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।
कौन हैं सफदर, आमिल और कमरुद्दीन, इन्होंने उज्जैन को बनाया था सिमी का गढ़
1. सिमी का अध्यक्ष कहे जाने वाला सफदर नागौरी
उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील का रहने वाला है। सफदर ने 1999 में विक्रम विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की और वर्ष 2000 में ''बर्फ की आग कब बुझेगी'' नाम से कश्मीर मुद्दे पर एक विवादित शोध-पत्र लिखी थी। सफदर के पिता पुलिस विभाग की क्राइम ब्रांच में एएसआई के पद पर पदस्थ थे, लेकिन सफदर की हरकतों के चलते उन्होंने उससे रिश्ता तोड़ लिया था। सफदर ने उज्जैन में सिमी की नींव रख पूरे मालवांचल समेत देशभर में आतंक की जड़ें फैला दी थी। विशेष समुदाय के कम पढ़े-लिखे वह लोग जो प्लंबर, मजदूर, मैकेनिक, टेलर जैसा काम करते हैं, उनका ब्रेनवाश कर उनके दिमाग में भी सफदर ने जिहाद भर दिया था। बताया जाता है सफदर नागौरी के निर्देशन में इंदौर जिले के एक फॉर्म हाउस पर केरल, झारखंड कर्नाटक के सिमी के सदस्य आए थे। जहां फिजिकल एक्साइज हथियारों की ट्रेनिंग दी जाती थी। सफदर के ही निर्देशन में सिमी की महिला शाखा ''शाइन फोर्स'' भी बनाई गई थी। जिसमें महिलाओं को बुलाया गया था।
2. दूसरा आतंकी सफदर का भाई कमरुद्दीन था
कमरुद्दीन नागौरी जिसका पूरा नाम कमरुद्दीन चांद मोहम्मद नागौरी है। उसे सफदर ने आंध्र प्रदेश की सीमा का चीफ बना दिया था। कमरुद्दीन एक प्रदेश में चीफ रहते हर प्रदेशों में सिमी सदस्य को बनाने का काम करता रहा। कमरुद्दीन को 26 मार्च 2008 को इंदौर में गिरफ्तार किया गया। जिससे कई साजिशों का पता चला था। 2017 में इंदौर सीबीआई कोर्ट ने कमरुद्दीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सफदर जब साबरमती जेल में बंद था और साथियों की मदद से जेल में 213 फीट लंबी सुरंग भी सफदर ने बनाई इसके बारे में पता चलने पर कई आला अधिकारी सकते में आ गए थे। बताया जाता है कि साबरमती जेल से सुरंग के जरिए फरार होकर लक्षद्वीप जाता और वहां से पाकिस्तानी सेना की मदद से दुबई भागने की फिराक में था।
3. तीसरा आतंकी आमिल परवेज
आमिल परवेज उज्जैन जिले के उन्हेल तहसील का निवासी है। आमिल का उन्हेल के छोटा बाजार स्थित एक मकान है। फिलहाल आमिल के मकान में कोई नहीं रहता सिर्फ ताला लटका है। आमिल का परिवार लंबे समय तक यहां रहा और आमिल आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा। जिसके बाद अब आमिल को भी फांसी की सजा सुनाई गई।
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