EOW की कार्रवाई : छिंदवाड़ा में वन विभाग के चार अधिकारियों के साथ मंडला में सरपंच-सचिव पर एफआईआर
Sanjay Dhiman | Nov 26, 2025, 19:12 IST
Photograph: (the sootr)
छिंदवाड़ा वन मंडल में 30 लाख रुपए के फर्जी भुगतान के मामले में EOW ने 4 लोगों पर FIR दर्ज की है। कैम्पा योजना के तहत वनपाल के बेटे को फर्जी मजदूर बताकर पैसे निकाले गए। इसमें उप वन मंडलाधिकारी और परिक्षेत्र अधिकारी शामिल हैं।
Chhindwara. छिंदवाड़ा वन विभाग में सरकारी पैसों की बंदरबांट का एक बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने एक सनसनीखेज शिकायत पर जांच पूरी की है। जांच के बाद अब छिंदवाड़ा वन मंडल के चार आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। इन आरोपियों ने मिलकर लगभग 30 लाख रुपए का फर्जी भुगतान कर सरकारी खजाने को चूना लगाया है।
इधर एक अन्य मामले में मंडला जिले की बेलखेडी पंचायत सरपंच-सचिव पर एफआईआर दर्ज की गई है। यहां इन दोनों ने मिलकर 22 लाख से अधिक राशि की बंदरबाट कर ली। EOW ने दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
पूरे मामले की जड़ें कैम्पा योजना के तहत होने वाले कामों में पाई गई हैं, जो वन विकास के लिए होता है। वनपाल चेतराम चौबे के बेटे सुशील चौबे को फर्जी तरीके से मजदूर दिखाया गया था। सिर्फ मजदूरी के नाम पर ही उसके खाते में 2 लाख 71 हजार 379 रुपए का फर्जी भुगतान कर दिया गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि इसी सुशील चौबे की एक फर्म है, जिसका नाम अवनी कंस्ट्रक्शन है। इस फर्म को भी कैम्पा और दूसरे मदों से 23 लाख 21 हजार 199 रुपए का भुगतान कर दिया गया। यानी, पिता के पद का सीधा फायदा उठाते हुए बेटा एक ही वक्त में मजदूर भी बन गया और ठेकेदार भी।
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EOW की जांच (EOW Action) में यह साफ हुआ कि यह सब कुछ आपसी साठगांठ और मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर पद का दुरुपयोग किया है। उप वन मंडलाधिकारी अनादि बुधोलिया पर सबसे बड़ा आरोप है। वह अपने 19 साल की नौकरी में से 17 साल तक एक ही वन मंडल में जमे रहे। जो कई सवाल खड़े करता है।
परिक्षेत्र अधिकारी कीर्ति बाला गुप्ता और हीरालाल सनोड़िया की भी इस फर्जीवाड़े में भागीदारी EOW को मिली है। इन्होंने भंडार क्रय नियमों और सरकारी निर्देशों को ताक पर रखकर यह भुगतान किए हैं। जांच में पता चला कि एक ही काम के लिए एक मजदूर को एक ही तारीख में दो बार भुगतान किया गया।
सांवरी परिक्षेत्र में बाउंड्रीवॉल के लिए 15 लाख रुपए में से 6 लाख 97 हजार 643 के ही काम हुए। बाकी रकम का गबन कर लिया गया। बिना आधिकारिक स्वीकृति के ही 2 लाख 22 हजार 176 का भुगतान भी तुरंत कर दिया गया था।
वन विभाग के अधिकारियों ने सिर्फ निर्माण कार्यों में ही नहीं, बल्कि खरीददारी में भी घोटाला किया है। वन मंडल परासिया में 4 DVR और CCTV कैमरे की खरीद का मामला है। स्थानीय सप्लायर को कोटेशन से 52 हजार 534 अधिक का भुगतान कर दिया गया।
यह भुगतान भी काम की स्वीकृति मिलने से पहले ही कर दिया गया, जो नियमों का उल्लंघन है। यह दिखाता है कि अधिकारियों ने कितनी जल्दी और बेखौफ होकर सरकारी पैसे को खर्च किया।
EOW जबलपुर ने सभी आरोपियों के ख़िलाफ अपराध क्रमांक 154/2025 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उन पर धारा 409, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की विवेचना अब तेजी से आगे बढ़ रही है।
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ईओडब्ल्यू (EOW) ने एक अन्य मामले में मंडला जिले की बेलखेडी पंचायत सरपंच-सचिव पर एफआईआर दर्ज की है। बेलखेडी पंचायत के सरपंच बीनर सिंह काकोडिया और सचिव मिथलेश उददे इस मामले में आरोपी बनाए गए है।
बेलखेड़ी पंचायत के सरपंच और सचिव ने बिना काम करवाए 22 लाख 87 हजार 370 रुपए निकाल लिए। इस मामले में 2014 से 2022 तक के निर्माण कार्यों में गबन किया गया।
ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद दोनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है। ईओडब्ल्यू की मानें तो दोनों ने मिलकर छह सालों में सड़क, पुलिया, नाली आदि का निर्माण कागजों पर ही कर दिया। इनकी निर्माण राशि निकालकर आपस में बांट ली। इनके विरुद्ध भी कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
इधर एक अन्य मामले में मंडला जिले की बेलखेडी पंचायत सरपंच-सचिव पर एफआईआर दर्ज की गई है। यहां इन दोनों ने मिलकर 22 लाख से अधिक राशि की बंदरबाट कर ली। EOW ने दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
कैसे हुआ यह पूरा 'खेला'?
चौंकाने वाली बात यह है कि इसी सुशील चौबे की एक फर्म है, जिसका नाम अवनी कंस्ट्रक्शन है। इस फर्म को भी कैम्पा और दूसरे मदों से 23 लाख 21 हजार 199 रुपए का भुगतान कर दिया गया। यानी, पिता के पद का सीधा फायदा उठाते हुए बेटा एक ही वक्त में मजदूर भी बन गया और ठेकेदार भी।
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मध्यप्रदेश में ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को ऐसे समझेंछिंदवाड़ा वन विभाग में 30 लाख रुपये का फर्जी भुगतान: EOW ने 4 वन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की, जिन्होंने कैम्पा योजना के तहत 30 लाख रुपये का गबन किया।सुशील चौबे की मिलीभगत से फर्जी भुगतान: वनपाल के बेटे को फर्जी मजदूर और ठेकेदार बनाकर 2.7 लाख मजदूरी रुपए और 23 लाख रुपए का भुगतान किया गया। सांवरी परिक्षेत्र में गबन का खुलासा: बाउंड्रीवॉल निर्माण के 15 लाख रुपए में से 6.97 रुपए लाख खर्च हुए, बाकी रकम का गबन किया गया। CCTV खरीद में भी घोटाला: वन विभाग ने कोटेशन से 52 हजार 534 अधिक भुगतान किया, बिना काम की स्वीकृति के। मंडला की बेलखेडी पंचायत में 22 लाख का गबन: सरपंच और सचिव ने बिना काम किए 22 लाख 87 हजार रुपए निकाल लिए, 2014 से 2022 तक फर्जी निर्माण कार्य हुए। |
मिलीभगत से गबन का आरोप
परिक्षेत्र अधिकारी कीर्ति बाला गुप्ता और हीरालाल सनोड़िया की भी इस फर्जीवाड़े में भागीदारी EOW को मिली है। इन्होंने भंडार क्रय नियमों और सरकारी निर्देशों को ताक पर रखकर यह भुगतान किए हैं। जांच में पता चला कि एक ही काम के लिए एक मजदूर को एक ही तारीख में दो बार भुगतान किया गया।
सांवरी परिक्षेत्र में बाउंड्रीवॉल के लिए 15 लाख रुपए में से 6 लाख 97 हजार 643 के ही काम हुए। बाकी रकम का गबन कर लिया गया। बिना आधिकारिक स्वीकृति के ही 2 लाख 22 हजार 176 का भुगतान भी तुरंत कर दिया गया था।
CCTV खरीद में भी हेरफेर
यह भुगतान भी काम की स्वीकृति मिलने से पहले ही कर दिया गया, जो नियमों का उल्लंघन है। यह दिखाता है कि अधिकारियों ने कितनी जल्दी और बेखौफ होकर सरकारी पैसे को खर्च किया।
क्या है कानूनी कार्रवाई?
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इधर सरपंच-सचिव ने हड़प लिए 22 लाख रुपए, FIR दर्ज
बेलखेड़ी पंचायत के सरपंच और सचिव ने बिना काम करवाए 22 लाख 87 हजार 370 रुपए निकाल लिए। इस मामले में 2014 से 2022 तक के निर्माण कार्यों में गबन किया गया।
ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद दोनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है। ईओडब्ल्यू की मानें तो दोनों ने मिलकर छह सालों में सड़क, पुलिया, नाली आदि का निर्माण कागजों पर ही कर दिया। इनकी निर्माण राशि निकालकर आपस में बांट ली। इनके विरुद्ध भी कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
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