जबलपुर पश्चिम में पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत का सांसद राकेश सिंह से मुकाबला, सिहोरा से एकता को मौका, विनय, लखन, संजय-नीलेश रिपीट
Rahul Garhwal | Oct 15, 2023, 24:00 IST
जबलपुर पश्चिम में पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत का सांसद राकेश सिंह से मुकाबला, सिहोरा से एकता को मौका, विनय, लखन, संजय-नीलेश रिपीट
जबलपुर पश्चिम में पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत का सांसद राकेश सिंह से मुकाबला है। सिहोरा से एकता को मौका मिला है। विनय, लखन, संजय और नीलेश रिपीट हुए हैं।
वेंकटेश कोरी, JABALPUR. शक्ति आराधना के पर्व नवरात्रि के शुभ अवसर पर कांग्रेस ने अपने 144 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। इसमें जबलपुर जिले की अगर बात करें तो कमलनाथ सरकार में वित्त मंत्री की अहम जिम्मेदारी संभालने वाले पश्चिम क्षेत्र के मौजूदा विधायक तरुण भनोत को एक बार फिर मौका दिया गया है। तरुण भनोत की टिकट पक्की होने के साथ ही पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की सीट हॉट सीट में तब्दील हो गई है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने यहां से जबलपुर से 4 बार के सांसद और लोकसभा के मुख्य सचेतक राकेश सिंह को पहले से ही मैदान में उतारा है।
तरुण भनोत Vs राकेश सिंह
अब तस्वीर साफ हो गई है कि इस बार के विधानसभा के चुनाव में सांसद राकेश सिंह का मुकाबला पूर्व वित्त मंत्री और पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक तरुण भनोत से ही होगा। इसके अलावा जबलपुर जिले के 8 में से 6 सीटों पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इसमें कैंट और पनागर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशियों का चयन अभी तक नहीं हो पाया है। पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो मौजूदा विधायक और पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत यहां से लगातार 2 बार से जीतते आ रहे हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने जबलपुर के सांसद राकेश सिंह को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है, लिहाजा इस बार का मुकाबला काफी दिलचस्प होने की संभावना है।
लखन, विनय, संजय और नीलेश रिपीट
कांग्रेस आलाकमान ने नए चेहरों को मौका देने की बजाय पुरानों पर ज्यादा भरोसा किया है। यही वजह है कि 8 विधानसभा क्षेत्रों में से अभी तक 6 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा की गई है, जिनमें से 5 प्रत्याशी पुराने चेहरे हैं। पूर्व विधानसभा क्षेत्र से लखन घनघोरिया को एक बार फिर मौका दिया गया है। लखन घनघोरिया मौजूदा विधायक के साथ-साथ कमलनाथ सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा बरगी विधानसभा क्षेत्र से संजय यादव, उत्तर मध्य से विनय सक्सेना को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है। दोनों ही नेताओं ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी जबकि नीलेश अवस्थी को बीजेपी के कद्दावर नेता माने जाने वाले अजय बिश्नोई के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा था।
सिहोरा में युवा चेहरे पर भरोसा
इस बार के चुनाव में युवा और महिला फैक्टर पर खास जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि पार्टियां ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारने की वकालत कर रही है। कांग्रेस आलाकमान ने भी जबलपुर जिले की 8 विधानसभा सीटों में से एक सिहोरा के आदिवासी बाहुल्य सीट से एकता ठाकुर को मौका दिया है। एकता ठाकुर युवा होने के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति वर्ग से ताल्लुक रखती हैं। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी की नंदनी मरावी मौजूदा विधायक हैं। बीजेपी ने अभी तक इस सीट से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। इस लिहाज से भारतीय जनता पार्टी के पहले कांग्रेस ने सिहोरा सीट से अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है।
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पनागर और कैंट को रखा होल्ड
कांग्रेस ने पनागर और कैंट विधानसभा क्षेत्र से अपने प्रत्याशी की घोषणा अभी तक नहीं की है। इन दोनों ही विधानसभा सीटों को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। कैंट विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय ईश्वरदास रोहाणी के बेटे अशोक रोहाणी लगातार 2 बार से जीत दर्ज करते आ रहे हैं। वहीं पनागर क्षेत्र के मतदाता बीजेपी के सुशील तिवारी 'इंदू' पर पिछले एक दशक से भरोसा जताते आ रहे हैं। कांग्रेस के लिए इन दोनों ही सीटों पर प्रत्याशी का चयन करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस में कई दावेदार ताल ठोक रहे हैं जिसे देखते हुए कांग्रेस जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहती।
तरुण भनोत Vs राकेश सिंह
अब तस्वीर साफ हो गई है कि इस बार के विधानसभा के चुनाव में सांसद राकेश सिंह का मुकाबला पूर्व वित्त मंत्री और पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक तरुण भनोत से ही होगा। इसके अलावा जबलपुर जिले के 8 में से 6 सीटों पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इसमें कैंट और पनागर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशियों का चयन अभी तक नहीं हो पाया है। पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो मौजूदा विधायक और पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत यहां से लगातार 2 बार से जीतते आ रहे हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने जबलपुर के सांसद राकेश सिंह को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है, लिहाजा इस बार का मुकाबला काफी दिलचस्प होने की संभावना है।
लखन, विनय, संजय और नीलेश रिपीट
कांग्रेस आलाकमान ने नए चेहरों को मौका देने की बजाय पुरानों पर ज्यादा भरोसा किया है। यही वजह है कि 8 विधानसभा क्षेत्रों में से अभी तक 6 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा की गई है, जिनमें से 5 प्रत्याशी पुराने चेहरे हैं। पूर्व विधानसभा क्षेत्र से लखन घनघोरिया को एक बार फिर मौका दिया गया है। लखन घनघोरिया मौजूदा विधायक के साथ-साथ कमलनाथ सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा बरगी विधानसभा क्षेत्र से संजय यादव, उत्तर मध्य से विनय सक्सेना को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है। दोनों ही नेताओं ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी जबकि नीलेश अवस्थी को बीजेपी के कद्दावर नेता माने जाने वाले अजय बिश्नोई के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा था।
सिहोरा में युवा चेहरे पर भरोसा
इस बार के चुनाव में युवा और महिला फैक्टर पर खास जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि पार्टियां ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारने की वकालत कर रही है। कांग्रेस आलाकमान ने भी जबलपुर जिले की 8 विधानसभा सीटों में से एक सिहोरा के आदिवासी बाहुल्य सीट से एकता ठाकुर को मौका दिया है। एकता ठाकुर युवा होने के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति वर्ग से ताल्लुक रखती हैं। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी की नंदनी मरावी मौजूदा विधायक हैं। बीजेपी ने अभी तक इस सीट से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। इस लिहाज से भारतीय जनता पार्टी के पहले कांग्रेस ने सिहोरा सीट से अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है।
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पनागर और कैंट को रखा होल्ड
कांग्रेस ने पनागर और कैंट विधानसभा क्षेत्र से अपने प्रत्याशी की घोषणा अभी तक नहीं की है। इन दोनों ही विधानसभा सीटों को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। कैंट विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय ईश्वरदास रोहाणी के बेटे अशोक रोहाणी लगातार 2 बार से जीत दर्ज करते आ रहे हैं। वहीं पनागर क्षेत्र के मतदाता बीजेपी के सुशील तिवारी 'इंदू' पर पिछले एक दशक से भरोसा जताते आ रहे हैं। कांग्रेस के लिए इन दोनों ही सीटों पर प्रत्याशी का चयन करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस में कई दावेदार ताल ठोक रहे हैं जिसे देखते हुए कांग्रेस जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहती।
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