चेक बाउंस मामले में हाईकोर्ट ने पलटा बरी करने का फैसला, दगाबाज दोस्त जाएगा जेल

भोपाल में दोस्ती के नाम पर दिए गए 2 लाख रुपए का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। चेक बाउंस होने पर निचली अदालत ने सजा दी थी, जिसे सत्र न्यायालय ने पलट दिया है। अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए हैं।

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Neel Tiwari
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News In Short

  • दोस्ती के भरोसे 2 लाख रुपए उधार दिए गए थे।
  • पैसे लौटाने के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए।
  • ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना था।
  • सत्र न्यायालय ने आरोपी को बरी कर दिया था।
  • हाईकोर्ट ने बरी का फैसला पलटते हुए जेल भेजा है।

दोस्ती का भरोसा और दो लाख का कर्ज क्या था मामला

भोपाल के रमेश कुमार मेहरा और आनंद मालवीय के बीच पुरानी दोस्ती थी। दोस्ती के भरोसे आनंद ने रमेश से पैसों की मदद मांगी थी। रमेश ने बिना ज्यादा सोचे 24 अप्रैल 2015 को दो लाख रुपए दे दिए थे। उम्मीद थी कि दोस्त समय पर पैसे वापस लौटा देगा। पैसे देते समय दोनों के बीच लिखित समझौता हुआ था। समझौते में छह महीने में पैसा लौटाने की बात लिखी गई थी। यह भी तय हुआ कि जरूरत पड़ने पर चेक लगाया जा सकता है। 

समय बीता भरोसा टूटा और नहीं मिला पैसा

जब छह महीने पूरे होने के बाद भी पैसा वापस नहीं आया तो रमेश ने कई बार दोस्त से संपर्क किया। काफी कहने पर आरोपी ने दो चेक दिए। दोनों चेक एक एक लाख रुपए के थे।

बैंक में चेक लगाने पर सामने आई सच्चाई

25 नवंबर 2015 को रमेश ने चेक बैंक में लगाए। दोनों चेक खाते में पैसे न होने से बाउंस हो गए थे। यह सिर्फ पैसों का नहीं भरोसे का झटका था। इसके बाद दोनों के रिश्ते पूरी तरह टूट गए।

चेक बाउंस के बाद जाना पड़ा कोर्ट

चेक बाउंस के बाद रमेश ने कानूनी नोटिस भेजा। जब कोई जवाब नहीं मिला तो केस दर्ज कराया गया। मामला चेक बाउंस कानून के तहत चला। यहीं से दस साल लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हुई।

भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने सबूतों की जांच की। कोर्ट ने माना कि कर्ज असली था। चेक जानबूझकर दिए गए थे। मई 2018 में आरोपी को दोषी ठहराया गया था।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को छह महीने की कैद सुनाई थी। इसके साथ 2.40 लाख रुपए का मुआवजा तय किया था। वहीं कोर्ट ने माना कि यह चेक बाउंस का मामला है। यह फैसला शिकायतकर्ता के पक्ष में था।

सत्र न्यायालय ने क्यों पलट दिया फैसला

आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील की। वहां कहा गया कि चेक केवल सुरक्षा के लिए थे। सितंबर 2018 में आरोपी को बरी कर दिया गया था। यही फैसला विवाद का कारण बना।

हाईकोर्ट ने सिक्योरिटी चेक पर क्या कहा

मामला हाईकोर्ट पहुंचा। जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा चेक भी जिम्मेदारी दिखाता है। कर्ज साबित हो तो चेक बाउंस होना अपराध है।

हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय का फैसला रद्द किया। ट्रायल कोर्ट का आदेश बहाल कर दिया गया। आरोपी को छह महीने जेल भेजने के निर्देश दिए गए। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि मुआवजा और कानूनी खर्च भी भरने होंगे।

फैसला क्यों बन गया मिसाल

यह फैसला उधार लेने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। दोस्ती के नाम पर धोखा अब नहीं चलेगा। कानून के सामने हर कर्ज की कीमत चुकानी होगी। चाहे मामला दोस्ती का ही क्यों न हो।

रिफरेंस सोर्स

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का आदेश

ट्रायल कोर्ट और सत्र न्यायालय के रिकॉर्ड

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चेक बाउंस निर्णय

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