जांबाज अफसर विवेक सिंह चौहान की कहानी जिसे सुप्रीम कोर्ट खुद देना चाहती है पुरस्कार
Sourabh Bhatnagar | Jul 21, 2026, 11:53 IST
mp police officer vivek singh
मध्य प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान 23 साल से राष्ट्रपति वीरता पदक का इंतजार कर रहे हैं। 2003 में उन्होंने मुठभेड़ में दो डकैत मार गिराए थे। सुप्रीम कोर्ट ने देरी पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और एक हफ्ते की मोहलत दी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- पूर्व एसआई विवेक सिंह चौहान 23 साल से वीरता पदक का इंतजार कर रहे हैं।
- 2003 में उन्होंने मुठभेड़ में दो डकैत मार गिराए थे।
- केंद्र सरकार ने अब तक पदक देने में देरी की है।
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कड़ी फटकार लगाई है।
- कोर्ट ने कहा, 15 अगस्त को खुद सम्मान दे देंगे।
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जंगल में वो खतरनाक मुठभेड़
Indian police encounter with dacoits..
ग्वालियर-चंबल अंचल की चुनौती
Indian police encounter with dacoits
फिर शुरू हुआ लंबा इंतजार
केंद्र ने दिया छोटा सम्मान
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की केंद्र की अपील
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अब सुनवाई में क्या हुआ
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। उनका कहना था कि यह आपत्ति किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। उनका तर्क था कि सम्मान अदालत के आदेश से नहीं दिए जाते।
जस्टिस विक्रम नाथ ने इस पर तीखा सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका दाखिल होने से आदेश पालन में क्या रुकावट है। उनका कहना था, पहले आदेश मानिए, फिर रिव्यू पर बहस कीजिए। जब केंद्र ने कहा कि रिव्यू मंजूर हुआ तो सम्मान वापस लिया जा सकता है, कोर्ट ने कहा ऐसा बाद में देखा जाएगा।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी
23 साल का इंतजार, अब सिर्फ एक हफ्ता बाकी
दरअसल यह सम्मान सिर्फ स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ही दिया जाता है। Supreme Court ने केंद्र को एक हफ्ते का आखिरी मौका दिया है। मामला अब 29 जुलाई को फिर सुना जाएगा। कोर्ट ने साफ कहा कि इसके बाद कोई मोहलत नहीं मिलेगी।
एक बहादुर अफसर की यह कहानी सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं है। यह धैर्य और इंतजार की भी मिसाल है। अब सबकी नजर 29 जुलाई की सुनवाई पर टिकी है।
कौन हैं विवेक सिंह चौहान? (Who is Vivek Singh )
24 जून 2003 को डांडाखिड़क के घने जंगल में उनकी डकैतों से आमने-सामने मुठभेड़ हुई। उन्होंने बिना डरे डकैतों को घेरकर मार गिराया। इस मुठभेड़ में वह खुद गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
मजिस्ट्रियल जांच में उन्हें क्लीन चिट मिली। उनकी बहादुरी को देखते हुए राज्य सरकार ने राष्ट्रपति वीरता पदक के लिए उनका नाम केंद्र सरकार को भेजा था।
इसके बाद से वह 23 साल से इस सम्मान का इंतजार कर रहे हैं। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब उनका मामला सुप्रीम कोर्ट में है।
राष्ट्रपति वीरता पदक क्यों मिलता है?
जैसे आतंकियों से मुठभेड़, नक्सल विरोधी अभियान, खतरनाक अपराधियों को पकड़ने या लोगों की जान बचाने के दौरान कोई जवान अपनी जान की परवाह किए बिना साहस दिखाए, तो उसे राष्ट्रपति वीरता पदक दिया जा सकता है।
मुख्य बातें:
- ये शांतिकाल या counter-terrorism, law & order ऑपरेशन्स में दिखाई गई वीरता के लिए होता है।
- राष्ट्रपति जी खुद राष्ट्रपति भवन में समारोह करके ये पदक देते हैं।
- कई बार इसे President's Medal for Gallantry भी कहते हैं।
- ये वीर चक्र जैसा है, लेकिन ज्यादातर पुलिस और सिविल फोर्स के लिए होता है।
gallantry medal
राष्ट्रपति वीरता पदक पाने वाले जवानों को सिर्फ सम्मान ही नहीं, कई व्यावहारिक फायदे भी मिल सकते हैं। हालांकि ये लाभ बल, राज्य और सेवा नियमों के हिसाब से अलग-अलग होते हैं।
आमतौर पर उन्हें:
- विशेष पदक और प्रमाणपत्र मिलता है
- सरकार की ओर से नकद पुरस्कार या भत्ता मिल सकता है
- पदोन्नति और सेवा रिकॉर्ड में फायदा मिल सकता है
- विभाग में विशेष सम्मान और प्राथमिकता मिलती है
- कुछ राज्यों में जमीन, आवास, यात्रा या दूसरी सुविधाएं भी दी जाती हैं
- सेवानिवृत्ति के बाद भी समारोहों और सरकारी कार्यक्रमों में सम्मान मिलता है
FAQ
- राष्ट्रपति वीरता पदक क्यों मिलता है?
राष्ट्रपति वीरता पदक पुलिस, CRPF, BSF और दूसरे सुरक्षा बलों के जवानों को दिया जाता है। यह सम्मान उन जवानों को मिलता है, जो ड्यूटी के दौरान असाधारण बहादुरी दिखाते हैं। - सवाल: विवेक सिंह चौहान को वीरता पदक क्यों मिलना है?
जवाब: 2003 में विवेक सिंह ने ग्वालियर के जंगलों में मुठभेड़ के दौरान दो डकैत मार गिराए थे। इस दौरान वह खुद गंभीर घायल हो गए थे। उनकी बहादुरी को देखते हुए राज्य सरकार ने राष्ट्रपति वीरता पदक के लिए उनका नाम भेजा था। - सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने विवेक सिंह चौहान के मामले में केंद्र सरकार से क्या कहा?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार इस मामले में देरी कर रही है और कोर्ट सरकार के रवैये से खुश नहीं है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर देरी जारी रही तो 15 अगस्त को यह सम्मान अदालत खुद देगी।
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