डॉक्टरों की लापरवाही, सब पर भारी, शरीर पर बेअसर हो रहीं एंटीबायोटिक दवाएं

Aman Vaishnav | Jun 14, 2026, 10:21 IST
Share
बिना ऑडिट के एंटीबायोटिक लिख रहे सरकारी डॉक्टर
बिना ऑडिट के एंटीबायोटिक लिख रहे सरकारी डॉक्टर

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के पर्चों का ऑडिट न होने से एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो रहा है। इस लापरवाही की वजह से मामूली बीमारियां अब मरीजों को आईसीयू तक पहुंचा रही हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के पर्चों की जांच नहीं हो रही है।
  • एंटीबायोटिक दवाओं की निगरानी के लिए अब तक DTC का गठन नहीं किया है।
  • डॉक्टरों द्वारा एंटीबायोटिक दवाएं लिखने से शरीर में बैक्टीरिया मजबूत हो रहे हैं।
  • रिसर्च में सामने आया है कि करीब 50% बैक्टीरिया सुपरबग बन चुके हैं।
  • इस लापरवाही की वजह से मामूली बीमारियां अब मरीजों को आईसीयू तक पहुंचा रही हैं।
अक्सर देखा जाता है कि बीमार पड़ने के समय ज्यादातर लोगडॉक्टर की सलाह ही नहीं लेते हैं। इसके बजाय खुद सीधे मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर खा लेते हैं। इसे मेडिकल की भाषा में ओवर द काउंटर दवा लेना कहते हैं।

अब तक माना जाता था कि एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होने के पीछे लोगों की यही आदत जिम्मेदार है। वहीं, अब एक चौंकाने वाला सच सामने आया है।

असली गड़बड़ी तो सरकारी अस्पतालों के अंदर चल रही है।जहां डॉक्टर मरीजों को क्या और कितनी एंटीबायोटिक दवाएं लिख रहे हैं,इसकी कोई निगरानी ही नहीं हो रही है।

नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों की अनदेखी

दिसंबर 2025 में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एक सख्त निर्देश जारी किया था। इसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को एक जांच करनी थी।

जांच मेंअपने यहां डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं के पर्चों पर ध्यान देना था।इसके लिए सभी कॉलेजों को एक विशेष कमेटी बनाने को कहा गया था। इसका नाम ड्रग एंड थेराप्यूटिक कमेटी है।

हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के ज्यादातर मेडिकल कॉलेजों ने अब तक यह कमेटी बनाई ही नहीं है। इससे डॉक्टर बिना किसी रोक-टोक के मरीजों को एंटीबायोटिक दवाएं लिख रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय जबलपुर के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि, फिलहाल हमारे संस्थान में प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट के लिए कोई समिति गठित नहीं है। कोई औपचारिक ऑडिट भी नहीं किया गया है। हम इस व्यवस्था को शीघ्र लागू करेंगे।

क्या है साइलेंट महामारी, क्यों है खतरनाक?

एपिडेमियोलॉजी एक्सपर्ट डॉ.अंशुल मिश्रा का कहना है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक साइलेंट महामारी है। यह चुपके से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रही है।

समय रहते इसे नहीं रोका गयातो आने वाले दिनों में मामूली सर्जरी,डिलीवरी और अंग प्रत्यारोपण के बाद होने वाले सामान्य इंफेक्शन भी जानलेवा बन जाएंगे। क्योंकि उन पर कोई दवा काम ही नहीं करेगी।

मेडिकल कॉलेज की स्टडी में बड़ा खुलासा

इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ.मनीष पुरोहित के नेतृत्व में एक शोध किया गया था। इस स्टडी में 200 डॉक्टरों ने मिलकर तीन साल तक काम किया था।

साल 2025 के दौरान अस्पताल के 19 हजार717 क्लिनिकल सैंपलों की जांच की गई थी। इसमें बेहद डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

  • सुपरबग का हमला:जांचे गए सैंपलों में से लगभग 50% बैक्टीरिया मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट पाए गए हैं। इसका मतलब है कि इन बैक्टीरिया पर तीन से ज्यादा दवाओं के ग्रुप का कोई असर ही नहीं हो रहा है। इन्हें ही आम भाषा में सुपरबग कहा जाता है।
  • सभी उम्र के लोग निशाने पर:इस समस्या का असर किसी एक उम्र पर नहीं बल्कि बच्चे,बूढ़े और जवान सभी पर बराबर देखा जा रहा है। महिलाएं और पुरुष दोनों ही इसका समान रूप से शिकार हो रहे हैं।
  • 80% तक बेअसर हुईं दवाएं:सामान्य तौर पर दी जाने वालीएंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बैक्टीरिया 70 से 80% तक रेजिस्टेंट हो चुके हैं। यहां तक कि लाइनजोलिड जैसी आखिरी विकल्प मानी जाने वाली दवा की ताकत भी 3 से 5% तक कम हो गई है।

300 के इलाज में लग रहे हजारों-लाखों

जब शरीर पर दवाएं असर करना बंद कर देती हैं,तो मामूली बीमारी भी कितनी भारी पड़ती है,इसे आप इन तीन असली मामलों से समझ सकते हैं।

केस 1: यूरिन इंफेक्शन में भी भर्ती हुआ मरीज

एक 32 वर्षीय महिला को साधारण यूरिन इंफेक्शन हुआ था। यह इंफेक्शन पहले मात्र 200 से 300 रुपए की दवाओं से घर पर ही ठीक हो जाता था।

वहीं एंटीबायोटिक दवाओं के बेअसर होने के कारण महिला को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। नई दवाओं का पता लगाने के लिए कल्चर टेस्ट हुआ और कुल खर्च 15 हजारसे 25 हजार रुपएतक पहुंच गया है।

केस 2: ऑपरेशन के बाद संक्रमण

एक 45 वर्षीय पुरुष के पेट की सर्जरी हुई थी,लेकिन ऑपरेशन के बाद उसके टांकों में रेजिस्टेंट बैक्टीरिया (सुपरबग बैक्टीरिया) का संक्रमण हो गया। सामान्य तौर पर सर्जरी के बाद मरीज को पांच दिन में छुट्टी मिल जाती है।

वहीं संक्रमण को नियंत्रित करने में नौ अतिरिक्त दिनों का समय लगा। मरीज को कुल 14 दिन अस्पताल में रहना पड़ा और उसका खर्च 40 हजार रुपएसे बढ़कर एक लाख 50 हजार रुपएसे अधिक हो गया।

केस 3: आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीज को संक्रमण

एक 62 वर्षीय बुजुर्ग पुरुष फेफड़ों में संक्रमण के कारण आईसीयू में भर्ती थे। जांच में पता चला कि मरीज के शरीर में बेहद घातक जीवाणु यानी सुपरबग मौजूद हैं।

बुजुर्ग पर सबसे महंगी रिजर्व ग्रुप की दवाएं भी बहुत मुश्किल से काम कर रही थीं। इसके चलते मरीजको लंबे समय तक आईसीयू में रहना पड़ा। इसका खर्च ही 15 हजारसे 25 हजार रुपए प्रतिदिन आ रहा था।

FAQ

  1. प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
    प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट का मतलब है डॉक्टरों द्वारा लिखे गए पर्चों की सीनियर डॉक्टरों या एक्सपर्ट्स की टीम द्वारा जांच करना। इसमें यह देखा जाता है कि डॉक्टर ने मरीज को जो एंटीबायोटिक दवा लिखी है, क्या सच में उसकी जरूरत थी? कहीं बिना जरूरत के या बहुत ज्यादा हैवी एंटीबायोटिक तो नहीं दे दी गई?
  2. सुपरबग किसे कहते हैं?
    सुपरबग किसी बैक्टीरिया, वायरस या फंगस का वह रूप होता है, जिस पर बाजार में मौजूद ज्यादातर मुख्य एंटीबायोटिक और एंटीमाइक्रोबियल दवाएं पूरी तरह बेअसर हो जाती हैं।
  3. एंटीबायोटिक का बेअसर होना क्या है?
    जब हम बार-बार, बिना जरूरत के या डॉक्टर की सलाह के बिना अधूरी एंटीबायोटिक दवाएं खाते हैं, तो हमारे शरीर के भीतर मौजूद बैक्टीरिया खुद को उन दवाओं के खिलाफ मजबूत कर लेते हैं।

ये खबरें भी पढ़िए...

एमपी में बढ़ रहे बीपी के पेशेंट, हर चौथा व्यक्ति हाई बीपी का शिकार, हार्ट पर पड़ रहा असर

एमपी में भीषण गर्मी से गाढ़ा हो रहा खून! ब्रेन स्ट्रोक और किडनी डैमेज के बढ़ रहे मरीज

दवाइयों के लिए नहीं भटकेंगे मरीज, एमपी में ई-औषधि पोर्टल पर दिखेगा लाइव स्टॉक

अब फोन पर नहीं मिलेगा डॉक्टर्स का अपॉइंटमेंट, बंद होगा एनएचए हेल्पलाइन नंबर

Tags:
  • NMC
  • नेशनल मेडिकल कमीशन
  • मेडिकल कॉलेज
  • सुपरबग
  • सुपरबग बैक्टीरिया
  • एमजीएम मेडिकल कॉलेज
  • इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा