एमपी से गुजरात पहुंची जहरीली शराब, 9 की मौत, 41 भर्ती, एक हजार गांव में अलर्ट
Aman Vaishnav | Aug 20, 2026, 09:40 IST
एमपी से गुजरात पहुंची जहरीली शराब
गुजरात के भावनगर में नकली शराब पीने से 9 लोगों की मौत हो गई। इनमें एक एमपी मुरैना का युवक भी शामिल था। इसके अलावा 41 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं सात की हालत गंभीर है।
गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब ने कोहराम मचा दिया है। इससे अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है। मृतकों में एक युवक मध्य प्रदेश के मुरैना का है।
वहीं भावनगर के अस्पतालों में 41 लोग भर्ती हैं। इनमें से 7 की हालत गंभीर बताई जा रही है। कुछ मरीजों की तबीयत इतनी तेजी से बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल तक पहुंचने का मौका नहीं मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि यही शराब कई गांवों तक पहुंच चुकी है।
बता दें कि यह पूरा मामला 16 अगस्त की रात शुरू हुआ था। घोघा के खरकड़ी गांव में एक पार्टी रखी गई थी। एक युवक के पुलिस में चयन की खुशी मनाई जा रही थी।
यह पार्टी हरपाल सिंह गोहिल की बाड़ी में हुई थी। पुलिस के अनुसार शराब घनश्याम नाम के तस्कर से ली गई थी। इसे रॉयल स्टैग की बोतलों में परोसा गया था।
पार्टी के कुछ घंटों बाद ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद अलग-अलग इलाकों से भी ऐसे ही मामले सामने आने लगे।
गुजरात पुलिस की शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। शराब की 28 पेटियां उज्जैन से गुजरात के भावनगर भेजी गई थीं। इनमें से 15 पेटियां अब तक बरामद हो चुकी हैं।
बाकी 13 पेटियों का अभी कोई सुराग नहीं मिला है। स्थानीय लोगों का दावा है कि शराब कई गांवों तक पहुंच चुकी है। इसी आशंका के चलते प्रशासन ने 1000 गांवों को अलर्ट पर रखा है।
पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों की पहचान की है। इनमें रईस और जुबेर उज्जैन के रहने वाले हैं। तीसरा आरोपी भावनगर का गौतम सोलंकी है। पुलिस के मुताबिक तीनों तस्करी से लाई शराब में मिलावट करते थे।
इसमें स्थानीय स्तर पर मिथाइल अल्कोहल मिलाया जाता था। इसी मिलावट से शराब जानलेवा हो गई। रईस और जुबेर की गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश पुलिस की मदद ली जा रही है।
रईस के अहमदाबाद के रास्ते भावनगर पहुंचने का शक है। इसे लेकर रातभर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। सीडीआर (CDR – Call Detail Records) की जांच में अहमदाबाद के 3 तस्करों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस इनसे भी पूछताछ कर रही है।
मध्य प्रदेश से गुजरात में शराब तस्करी का नेटवर्क नया नहीं है। गुजरात से सटे झाबुआ और अलीराजपुर से तस्करी के 18 प्रमुख रास्ते हैं। जंगलों और नर्मदा नदी के रास्ते भी शराब पहुंचाई जाती है।
इन इलाकों में महुआ से कच्ची शराब बनाई जाती है। इसे बनाने की प्रक्रिया में गड़बड़ी होने पर जहरीले अल्कोहल का खतरा बढ़ जाता है।
जांच में डिनेचर्ड स्पिरिट का एंगल भी सामने आया है। इसका इस्तेमाल आमतौर पर अस्पतालों और उद्योगों में होता है। इससे बनाई गई अवैध शराब (अवैध शराब कारोबार) जानलेवा साबित हो सकती है।
इसमें मौजूद मिथाइल अल्कोहल गंभीर विषाक्तता पैदा कर सकता है। ज्यादा मात्रा में सेवन से मौत हो सकती है। कम मात्रा में भी आंखों की रोशनी जाने का खतरा (जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत) रहता है।
मामले की जांच स्टेट मॉनिटरिंग सेल यानी एसएमसी (SMC – State Monitoring Cell) को सौंपी गई है। इस काम में पुलिस की 15 टीमें लगाई गई हैं। इनमें से 5 टीमें अस्पताल में भर्ती लोगों से जानकारी जुटा रही हैं।
5 टीमें संदिग्ध बोतलों और सप्लाई चेन की कड़ियां तलाश रही हैं। बाकी टीमें मूल सप्लायरों तक पहुंचने में जुटी हैं। शराब में कौन सा केमिकल था और कितनी मात्रा में था, इसका पता एफएसएल (FSL – Forensic Science Laboratory) जांच से चलेगा।
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वहीं भावनगर के अस्पतालों में 41 लोग भर्ती हैं। इनमें से 7 की हालत गंभीर बताई जा रही है। कुछ मरीजों की तबीयत इतनी तेजी से बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल तक पहुंचने का मौका नहीं मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि यही शराब कई गांवों तक पहुंच चुकी है।
कैसे शुरू हुई इस मामले की शुरुआत
यह पार्टी हरपाल सिंह गोहिल की बाड़ी में हुई थी। पुलिस के अनुसार शराब घनश्याम नाम के तस्कर से ली गई थी। इसे रॉयल स्टैग की बोतलों में परोसा गया था।
पार्टी के कुछ घंटों बाद ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद अलग-अलग इलाकों से भी ऐसे ही मामले सामने आने लगे।
उज्जैन से आई थी शराब की खेप
बाकी 13 पेटियों का अभी कोई सुराग नहीं मिला है। स्थानीय लोगों का दावा है कि शराब कई गांवों तक पहुंच चुकी है। इसी आशंका के चलते प्रशासन ने 1000 गांवों को अलर्ट पर रखा है।
मुख्य आरोपी और मिथाइल अल्कोहल
इसमें स्थानीय स्तर पर मिथाइल अल्कोहल मिलाया जाता था। इसी मिलावट से शराब जानलेवा हो गई। रईस और जुबेर की गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश पुलिस की मदद ली जा रही है।
रईस के अहमदाबाद के रास्ते भावनगर पहुंचने का शक है। इसे लेकर रातभर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। सीडीआर (CDR – Call Detail Records) की जांच में अहमदाबाद के 3 तस्करों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस इनसे भी पूछताछ कर रही है।
एमपी से पुराना तस्करी नेटवर्क
इन इलाकों में महुआ से कच्ची शराब बनाई जाती है। इसे बनाने की प्रक्रिया में गड़बड़ी होने पर जहरीले अल्कोहल का खतरा बढ़ जाता है।
डिनेचर्ड स्पिरिट का एंगल
इसमें मौजूद मिथाइल अल्कोहल गंभीर विषाक्तता पैदा कर सकता है। ज्यादा मात्रा में सेवन से मौत हो सकती है। कम मात्रा में भी आंखों की रोशनी जाने का खतरा (जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत) रहता है।
जांच में जुटी 15 टीमें
5 टीमें संदिग्ध बोतलों और सप्लाई चेन की कड़ियां तलाश रही हैं। बाकी टीमें मूल सप्लायरों तक पहुंचने में जुटी हैं। शराब में कौन सा केमिकल था और कितनी मात्रा में था, इसका पता एफएसएल (FSL – Forensic Science Laboratory) जांच से चलेगा।
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