गुना में आजीविका मिशन बना अपनों का मिशन, करोड़ों के घोटाले की आशंका
Manya Jain | Jun 14, 2026, 14:33 IST
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गुना में आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूहों के 90 लाख रुपए हितग्राहियों तक नहीं पहुंचे। पोर्टल मिलान में गड़बड़ी पकड़ी गई है। घोटाला 3.5 करोड़ तक होने का अनुमान हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- गुना के ग्रामीण आजीविका मिशन में भारी वित्तीय घोटाला हुआ है।
- स्व-सहायता समूहों के 90 लाख से अधिक की राशि गायब हुई।
- मई महीने में दो सरकारी पोर्टलों के मिलान से गड़बड़ी पकड़ी गई।
- जांच में पता चला कि यह पैसा रिश्तेदारों के खातों में भेजा गया।
- अनुमान है कि असली घोटाला 3.5 करोड़ तक पहुंच सकता है।
पोर्टल मिलान ने खोली पोल
इस मिलान में विकासखंड गुना के प्रतिज्ञा सीएलएफ में नब्बे लाख पच्चीस हजार रुपए की भारी विसंगति पकड़ी गई। एफडीएम पोर्टल पर राशि ट्रांसफर होना दिख रही थी। वहीं, बैंक रिकॉर्ड और स्टेटमेंट की जांच में साफ हो गया कि यह पैसा समूहों को मिला ही नहीं।
2021-22 में हुई गड़बड़ी
SELF HELP GROUP SCAM
सूत्रों के अनुसार, गरीब परिवारों की महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को मिलने वाली यह रकम अधिकारियों और कर्मचारियों के रिश्तेदारों के खातों में भेजी गई। यानी जो पैसा सबसे जरूरतमंदों के लिए था, वह कहीं और चला गया।
3.5 करोड़ तक पहुंच सकता है घोटाला
अब वित्तीय अभिलेख, पोर्टल एंट्रीज और संबंधित बैंक खातों की बारीकी से जांच हो रही है। विभागीय सूत्रों का अनुमान है कि यह घोटाला सिर्फ नव्वे लाख तक सीमित नहीं है। आंकड़ा तीन करोड़ पचास लाख रुपए तक जा सकता है।
सीईओ ने की गड़बड़ी की पुष्टि
उन्होंने यह भी कहा कि यह पैसा हितग्राहियों के असली खातों में नहीं गया। किन खातों में गया, इसकी विस्तृत जांच जारी है।
FAQ
- गुना आजीविका मिशन घोटाला क्या है?
गुना जिले में स्व-सहायता समूहों को दी जाने वाली 90.25 लाख रुपए की सरकारी राशि हितग्राहियों के खातों में नहीं पहुंची। पोर्टल पर पैसा ट्रांसफर दिखाया गया लेकिन असल में यह रकम कहीं और गई। मई 2025 में पोर्टल मिलान के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई। - इस घोटाले में कौन लोग संदेह के घेरे में हैं?
वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिला परियोजना प्रबंधक विष्णु पंवार, अकाउंटेंट मनोज जैन और सहायक वित्त प्रबंधक अमित अग्रवाल संदेह के घेरे में हैं। सूत्रों के अनुसार, समूहों का पैसा इन अधिकारियों और कर्मचारियों के रिश्तेदारों के खातों में भेजा गया। - इस घोटाले में अभी तक जांच में क्या सामने आया है?
जिला पंचायत सीईओ ने 3 सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई जिसमें गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। राज्य स्तरीय टीम भी बैंक खातों और पोर्टल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि असली घोटाला 3.5 करोड़ रुपए तक हो सकता है।
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