हाईकोर्ट से राहत के बाद भी 70-80-90% वेतन के लिए लड़ रहे कर्मचारी! सरकार के रवैये पर सवाल
Neel Tiwari | Jul 20, 2026, 17:25 IST
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फिर साफ किया कि परिवीक्षाधीन कर्मचारियों को 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने की शर्त सही नहीं है। इसके बावजूद कर्मचारियों को अपना हक पाने के लिए अलग-अलग याचिकाएं दायर करनी पड़ रही हैं। इससे सरकार के रवैये पर नए सवाल उठ रहे हैं।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला
- हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी प्रोबेशन कर्मचारियों को नहीं मिल रहा पूरा वेतन।
- नियुक्ति के समय 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन की शर्त जोड़ी गई थी।
- हाईकोर्ट पहले भी इस शर्त को कई मामलों में गलत ठहरा चुका है।
- एक बार फिर कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया।
- इसके बाद भी हर कर्मचारी को राहत के लिए अलग से कोर्ट जाना पड़ रहा है।
यही सवाल अब सरकार के रवैये पर भी उठने लगे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर अदालत का फैसला सभी पर लागू हो सकता है, तो हर कर्मचारी को अलग मुकदमा लड़ने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
क्या है 70, 80 और 90% वेतन का विवाद
कर्मचारियों ने इस व्यवस्था को अदालत में चुनौती दी। उनका कहना था कि समान काम करने के बाद भी पूरा वेतन नहीं देना उचित नहीं है। इसी विवाद पर कई बार हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।
फिर हाईकोर्ट पहुंचा कर्मचारी फिर मिली राहत
अदालत ने कहा कि पहले के मामलों में जो राहत दी गई थी, उसका लाभ नए याचिकाकर्ताओं को भी मिलेगा। कोर्ट ने नियुक्ति आदेशों की विवादित शर्त को हटाते हुए राज्य सरकार को पहले के फैसलों के अनुसार लाभ देने के निर्देश दिए।
पहले भी आ चुके हैं ऐसे फैसले
सरकार के रवैये पर क्यों उठ रहे हैं सवाल
केवल वेतन नहीं, दूसरे मामलों में भी यही तस्वीर
कई बार अदालत के स्पष्ट निर्देश आने के बाद भी कर्मचारियों को राहत पाने के लिए नई याचिका लगानी पड़ती है। इससे समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग क्या है
अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर
अगर ऐसा होता है, तो आने वाले समय में हजारों कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि पुरानी व्यवस्था जारी रहती है, तो नए मुकदमों की संख्या भी बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
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