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BHOPAL. मध्य प्रदेश में हजारों छात्रों के कॉलेज जाने का सपना उच्च शिक्षा विभाग तोड़ रहा है। उच्च शिक्षा विभाग ने बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश 14 अगस्त के बाद से बंद कर दिए हैं। इस वजह से हायर सेकेण्डरी पास करके बैठे ये छात्र बेबस नजर आ रहे हैं। उधर प्रदेश के कॉलेजों में अभी भी तीन लाख से ज्यादा सीटें खाली पड़ी हैं।
सीट खाली होने के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेश पर रोक लगा देने से प्रवेश का औसत बीते साल के मुकाबले गिरने का अंदेशा है। मध्य प्रदेश में यह स्थिति तब है जबकि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं कॉलेजों में प्रवेश दर बढ़ाने का आह्वान कर चुके हैं।
स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पर रोक लगाने की वजह भी अधिकारी स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। जबकि उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भी छात्रों की परेशानी से अंजान हैं। वहीं सीट खाली होने और छात्रों के अप्रवेशी रहने की स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तारीख 14 अगस्त से बढ़ाकर 5 सितम्बर कर दी है।
सवा दो लाख से ज्यादा सीट खाली
मध्य प्रदेश में 56 विश्वविद्यालयों के अंतर्गत 1360 सरकारी और निजी कॉलेज संचालित हैं। इनमें स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी के रेग्युलर कोर्स के साथ तकनीकी एवं वोकेशनल शिक्षा पाठ्यक्रम की 14.85 लाख सीटें हैं। रेग्युलर कोर्स की 7.48 लाख सीटों में से स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए 5.54 सीट निर्धारित हैं।
इस साल बीए, बीएससी, बीकॉम एवं अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में 3.18 लाख छात्रों ने ही प्रवेश लिया है। यानी अब भी 2.36 लाख सीटें कॉलेजों में खाली पड़ी हैं। इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग ने 14 अगस्त के बाद कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश बंद कर दिए हैं।
छात्र जिस पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्रवेश ले रहे थे उसे भी बंद कर दिया गया है। इस वजह से हजारों छात्र इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने से वंचित रह गए हैं। अब उन्हें साल बर्बाद होने की आशंका परेशान कर रही है।
छात्रों को साल बर्बाद होने की चिंता
कॉलेजों में प्रवेश के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्नातक - स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 31 जुलाई अंतिम तिथि निर्धारित की थी। जिसे बाद में 14 अगस्त तक बढ़ा दिया गया था। हांलाकि इससे पूर्व के वर्षों में कॉलेजों में सीट खाली रहने की स्थिति में प्रवेश की प्रक्रिया अक्टूबर तक बढ़ाई जाती रही है।
इस स्थिति को देखते हुए ज्यादातर छात्र अपने नजदीक के कॉलेज में प्रवेश लेने का इंतजार करते रहे। इनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र हैं। जो कम फीस और अपने गांव या कस्बे के नजदीकी कॉलेज में ही प्रवेश लेने में सक्षम हैं।
उनके सामने कॉलेज में प्रवेश के लिए फीस जुटाने की भी समस्या होती है। इसी वजह से इन छात्रों को समय लग गया और अंतिम तिथि बढ़ने की उम्मीद में वे प्रवेश से वंचित रह गए।
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बीबीए-बीसीए में प्रवेश की छूट
उच्च शिक्षा विभाग ने जहां रेग्युलर पाठ्यक्रमों में 14 अगस्त के बाद प्रवेश बंद कर दिए हैं वहीं तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को खुला रखा गया है। कॉलेज जाने वाले छात्र बीबीए, बीसीए जैसे पाठ्यक्रमों में तो प्रवेश ले सकते हैं लेकिन बीए, बीएससी या बीकॉम जैसे पाठ्यक्रम में नहीं।
पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अंतिम तिथि को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के दोहरे रवैए से भी छात्र असमंजस में हैं। छात्रों का कहना है कि प्रदेश में ज्यादातर छात्र बीए, बीएससी या बीकॉम में प्रवेश लेकर पढ़ाई करते हैं। इस साल कॉलेजों में करीब ढाई लाख सीट खाली हैं।
इसके बाद भी उच्च शिक्षा विभाग ने प्रवेश बंद कर दिए हैं। प्रवेश खोले जाने चाहिए। इससे छात्रों का साल बर्बाद होने से बच जाएगा और कॉलेजों को भी सीट खाली रहने का नुकसान नहीं होगा।
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छात्रों की परेशानी से अनजान मंत्री-अधिकारी
प्रदेश के हजारों छात्र स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश बंद होने की वजह से कॉलेजों के चक्कर काटने मजबूर हैं। किसी कॉलेज से उन्हें प्रवेश खुलने की आस बंधाई जा रही है तो कहीं से बैरंग लौटाया जा रहा है। कॉलेजों में ऑनलाइन प्रवेश की अंतिम तारीख आगे बढ़ाने और पोर्टन खोलने की मांग उच्च शिक्षा मुख्यालय तक भी पहुंची है।
इसके बाद भी विभाग के अधिकारी छात्रों की मुश्किल को अनदेखा कर रहे हैं। द सूत्र ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को इस समस्या से अवगत कराते हुए प्रवेश बंद करने के निर्णय के संबंध में बात करनी चाहिए लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।
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