IAS नेहा मारव्या बोलीं- कमरे से बाहर निकालिए इनको, अफसर बोले- हम नहीं निकलेंगे
Ramanand Tiwari | Aug 14, 2026, 23:27 IST
नेहा मारव्या विवाद
जनजातीय क्षेत्रीय विकास परियोजना की संचालक IAS नेहा मारव्या और अपर संचालक स्तर की महिला अफसरों के बीच बैठक में तीखी बहस का मामला सामने आया है। अधिकारियों ने विरोध में पेन डाउन हड़ताल की और मामला अब मुख्य सचिव तक पहुंच गया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- ‘बाहर निकालिए’ पर महिला अफसरों का पलटवार
- बैठक में बहस, अफसरों ने कहा- नहीं निकलेंगे
- 40-50 साल पुराने रिकॉर्ड का हिसाब तलब
- अधिकारियों ने पेन डाउन हड़ताल की
- सोमवार को मुख्य सचिव से मुलाकात लगभग तय
‘कमरे से बाहर निकालिए इनको’ से शुरू हुआ घमासान
मौके पर मौजूद दो अपर संचालक रैंक की महिला अधिकारियों ने भी जवाब दे दिया। उनका कहना था- ‘हम नहीं निकलेंगे। यह सरकारी ऑफिस है, हम क्यों निकलें बाहर... आपने ही बुलाया है। आपने ही दो बार टाइम दिया था- एक बजे और चार बजे।’
यहीं से बैठक का माहौल गरमा गया। बताया जा रहा है कि उस समय अन्य अधिकारी भी मौजूद थे और महिला अधिकारियों तथा IAS नेहा मारव्या के बीच तीखी बहस हुई।
2017 की योजना में 2.40 लाख महिलाओं का मामला
एक अपर संचालक ने आरोप लगाया कि अगस्त की करीब 30 करोड़ रुपए की राशि अभी तक हितग्राहियों के खातों में नहीं पहुंची। उनका कहना था कि भुगतान प्रक्रिया से सीधे जुड़े नहीं होने के बावजूद उन्हें जिम्मेदार ठहराकर नोटिस और इंक्रीमेंट रोकने जैसी कार्रवाई की गई।
इसी दौरान कथित तौर पर फाइलों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की गई। अधिकारियों ने कहा कि जिम्मेदारी जिस अधिकारी की है, जवाबदेही भी उसी की तय होनी चाहिए।
‘50 साल का हिसाब’ मांगने से मचा हड़कंप
कई अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी 40 से 50 साल पुराने रिकॉर्ड को लेकर बताई जा रही है। आरोप है कि पुरानी योजनाओं से जुड़े दस्तावेज और खर्च का ब्योरा बेहद कम समय में उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इतने पुराने रिकॉर्ड अलग-अलग शाखाओं और एजेंसियों में हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत जुटाना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है।
तीन घंटे में रिकॉर्ड देने का दबाव?
इसके बावजूद कई मामलों में कुछ घंटों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इससे नियमित काम प्रभावित होता है और देरी होने पर नोटशीट में प्रतिकूल टिप्पणी या कार्रवाई की आशंका रहती है।
चाय के बिल से सैलरी अप्रूवल तक विवाद
सैलरी अप्रूवल को लेकर भी विवाद की बात कही जा रही है। अधिकारियों के अनुसार कथित तौर पर पूछा गया कि ‘सैलरी किसकी निकालना है, किसकी नहीं, इसका अप्रूवल मुझसे लेना जरूरी है।’
अधिकारियों ने खोला मोर्चा
इसी बीच विभागीय राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष संजय वाष्णेय ने कहा कि संघ ने पूरे मामले को लेकर मुख्य सचिव से मुलाकात के लिए पत्र लिखा है। उनका कहना है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की बेइज्जती नहीं होनी चाहिए।
वाष्णेय ने कहा कि कोई भी काम अधिकारी और कर्मचारी के आपसी सामंजस्य से ही बेहतर तरीके से संभव होता है। किसी बड़े या छोटे अधिकारी को किसी को भी अपमानित करने का अधिकार नहीं है। अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित बेइज्जती के मामले पर अब विराम लगना चाहिए।
राजपत्रित अधिकारी संघ भी आया सामने
संघ अध्यक्ष संजय वाष्णेय के मुताबिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मान के साथ काम करने का माहौल मिलना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी स्तर पर आपसी सामंजस्य बिगड़ने से विभागीय कामकाज प्रभावित होता है।
सोमवार को मुख्य सचिव से मुलाकात लगभग तय
अब संघ पदाधिकारियों की सोमवार को मुख्य सचिव से मुलाकात होना लगभग तय बताया जा रहा है। संघ इस मुलाकात में अधिकारियों और कर्मचारियों की शिकायतें तथा कथित अपमानजनक व्यवहार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगा।
फिलहाल विवाद का दूसरा पक्ष भी सामने आना बाकी है। IAS नेहा मराव्या की ओर से लगाए गए आरोपों और अधिकारियों के दावों पर आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
IAS नेहा मारव्या ने रिसीव नहीं किया कॉल
क्या सख्त प्रशासन या अफसरों के सम्मान की सीमा पार?
अब सबकी नजर सोमवार को मुख्य सचिव के साथ होने वाली प्रस्तावित मुलाकात और उसके बाद सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसले पर है।
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