एक साल में चौथा तबादला, आईएएस नेहा मारव्या ने उठाए सवाल; अफसरों के ग्रुप में भी नहीं मिला समर्थन

Ramanand Tiwari | Sept 06, 2026, 10:02 IST
आईएएस नेहा मारव्या
आईएएस नेहा मारव्या के लगातार तबादलों ने एक बार फिर ब्यूरोक्रेसी में पोस्टिंग और कार्यकाल को लेकर बहस छेड़ दी है। उनकी ताजा पोस्ट में एक साल में चार तबादलों, महज 50 दिन में बदलाव और अधीनस्थ कर्मचारियों की कथित बगावत का जिक्र है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • IAS नेहा मारव्या का एक साल में चौथी बार तबादला हुआ।
  • उन्होंने अफसरों के ग्रुप में लिखकर अपना दर्द जाहिर किया।
  • नेहा मारव्या ने कम समय के कार्यकाल पर सवाल उठाए।
  • उन्होंने कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार और बगावत का दावा किया।
  • शिकायत के बाद भी अपना ही तबादला होने पर सवाल दागा।

मध्य प्रदेश की आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या ने लगातार हो रहे तबादलों को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने आईएएस अधिकारियों के सोशल मीडिया ग्रुप में अपनी बात रखते हुए कहा कि एक साल के अंदर उनका चार बार ट्रांसफर किया गया है। उन्होंने शनिवार यानी 05 सितंबर को जारी हुई तबादला सूची का भी जिक्र किया है।



नेहा ने लिखा कि इस बार उन्हें केवल 50 दिन में ही एक जिम्मेदारी से हटा दिया गया। उन्होंने आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि लगातार तबादलों के कारण किसी भी अधिकारी को काम समझने और परिणाम देने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।



हालांकि नेहा की पोस्ट पर उन्हें आईएएस ग्रुप में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों ने उन्हें सलाह दी कि तबादलों के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराने से पहले खुद के कामकाज का भी मूल्यांकन करना चाहिए।



कुछ अधिकारियों ने कहा कि मध्य प्रदेश में अफसरों को दबाव में काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता। वहीं, वर्तमान सेवा में मौजूद आईएएस अधिकारियों ने इस मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी।



नेहा ने पोस्ट में क्या लिखा?

आईएएस नेहा मारव्या ने अपनी पोस्ट में कहा कि एक साल में उनके चार तबादले हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार को जारी आदेश में उन्हें संचालक आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं और मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त विकास निगम के प्रबंध संचालक की संयुक्त जिम्मेदारी से हटाकर केवल निगम के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी दी गई।



उन्होंने लिखा कि किसी अधिकारी को विभाग की व्यवस्था समझने और काम करने के लिए समय मिलना जरूरी है। बार-बार तबादले होने से काम की निरंतरता प्रभावित होती है।



नेहा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके अधीन कुछ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ विरोध शुरू कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि कुछ कर्मचारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और काम में बाधा डालने की कोशिश की।



उन्होंने लिखा कि जिन कर्मचारियों की शिकायत उन्होंने की थी, उन पर कार्रवाई की उम्मीद थी। लेकिन कार्रवाई की जगह उनका ही तबादला कर दिया गया।



पहले भी विवादों में रहा नेहा का कार्यकाल

आईएएस नेहा मारव्या का कार्यकाल कई बार विवादों में रहा है। अलग-अलग विभागों में पोस्टिंग के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मतभेद सामने आते रहे हैं।



शिवपुरी में कलेक्टर से हुआ था विवाद

शिवपुरी में जिला पंचायत CEO रहते हुए नेहा मारव्या का तत्कालीन कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव से विवाद हुआ था। मामला मंत्रालय तक पहुंचा था।



राजस्व विभाग में भी मतभेद

राजस्व विभाग में पदस्थ रहने के दौरान उनका तत्कालीन प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी से मतभेद की बात सामने आई थी।



डिंडोरी कलेक्टर रहते हुए भी विवाद

मोहन सरकार में नेहा मारव्या को डिंडोरी कलेक्टर बनाया गया था। हालांकि यहां भी विवादों के बाद करीब एक साल में ही उन्हें हटा दिया गया।



आदिम जाति विभाग में भी विवाद

इसके बाद उन्हें आदिम जाति विभाग में जिम्मेदारी दी गई। यहां उनका प्रमुख सचिव गुलशन बामरा से मतभेद सामने आया। इसके बाद उन्हें विभाग से हटाया गया।



कर्मचारियों से विवाद के बाद बदली जिम्मेदारी

बाद में उन्हें आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं, मैपसेट और अनुसूचित जनजाति वित्त विकास निगम की जिम्मेदारी दी गई। यहां भी अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ विवाद की स्थिति बनी। इसके बाद सरकार ने उनकी जिम्मेदारी सीमित कर दी।



आईएएस एसोसिएशन से उम्मीद थी समर्थन की

नेहा मारव्या ने अपनी पोस्ट में आईएएस एसोसिएशन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्हें उम्मीद थी कि लगातार तबादलों के मामले में संगठन उनका पक्ष रखेगा। लेकिन समर्थन नहीं मिलने से वह अपनी ही बिरादरी में अकेली नजर आईं।



इससे पहले भी नेहा मारव्या ने आईएएस ग्रुप में अपनी पोस्टिंग को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने करीब 14 साल की सेवा के बाद भी पर्याप्त फील्ड पोस्टिंग नहीं मिलने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि बिना फील्ड अनुभव के अधिकारी के करियर में संतुलन बनाना मुश्किल होता है।



नहीं मिला एसोसिएशन का समर्थन

आईएएस एसोसिएशन अक्सर अपने अफसरों के साथ खड़ा रहता है, लेकिन नेहा के मामले में कोई भी अफसर साथ देने को तैयार नहीं है। आईएएस सोशल मीडिया ग्रुप पर यह लिखने पर कि मैंने कई वर्षों तक चुप रहकर धैर्य रखा। मुझे लगातार किनारे किया गया और जिम्मेदारियां नहीं दी गईं। मैंने उम्मीद की थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन स्थिति अब और खराब हो गई है। अब तो अधीनस्थ अधिकारी मुझे धमकाने लगे हैं।



इसके बावजूद किसी ने उनके समर्थन में कोई बात नहीं की, इसके उलट उन्हें खुद के व्यवहार में सुधार लाने और आत्मविश्लेषण करने का सुझाव दिया। उधर आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव ने कहा कि इस ग्रुप में कोई भी इस पोस्ट पर रिएक्शन न दे, जिसे जो कहना है नेहा को व्यक्तिगत मैसेज करके कहे। मनु का कहना है कि ग्रुप की बातें मीडिया में जा रही हैं।



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