जिस पर भागीरथपुरा कांड में थे लापरवाही के आरोप, उस आईएएस रोहित सिसोनिया को बनाया रायसेन कलेक्टर, कांग्रेस हमलावर
मोहन सरकार ने 13 अक्टूबर 2026 की रात आईएएस रोहित सिसोनिया को रायसेन कलेक्टर बनाया है। सिसोनिया भागीरथपुरा कांड के समय इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त थे। भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट में उनके नाम पर बड़ी लापरवाही दर्ज है। लेकिन यह अकेला मामला नहीं है, जब अफसर कांड करने के बाद भी पुरस्कृत होते रहे हैं।
रायसेन कलेक्टर बने आईएएस रोहित सिसोनिया
सरकार जी, कुछ इंसानियत और नैतिकता बची है भी या नहीं….⁉️♦️दिसंबर, 2025 में इंदौर में जहरीले पानी पीने से 36 निर्दोष मौतें, 1400-1500 लोग उपचारार्थ विभिन्न अस्पतालों में दाख़िल,राज्य सरकार द्वारा न्यायिक जांच आयोग के गठन का स्वांग, जांच आयोग ने 25 अगस्त, 2026 को जांच रिपोर्ट हायकोर्ट को सौंपी,रिपोर्ट में दोषियों के रूप में अपर आयुक्त श्री रोहित सिसोनिया की दोषियों के रूप में स्पष्ट भूमिका सार्वजनिक हुई, 13 अक्टूबर, 2026 को देर रात सरकार द्वारा जारी तबादला सूची में गंभीर अपराध के दोषी सिसोनिया जी पदोन्नत होकर बने “कलेक्टर रायसेन”….🟥 सरकार जी, भागीरथपुरा के शोकाकुल परिवारों की “शोक की पहली दीपावली 🪔” भी अभी नहीं आई है, उनके परिवार,अपना दुर्भाग्य झेल रहे इंदौर की अस्मिता, उसके धैर्य कितनी परीक्षाएं और लेंगे….‼️👉🏽सरकार जी,सिसोनिया जी को उनकी “*उत्कृष्ट सेवाओं को लिए प्राप्त इस सम्मान से Thanku sarvice में तो नवाज़ा नहीं गया होगा*”…..⁉️@DoPTGoI @BJP4MP @BJP4India@CMMadhyaPradesh @GovernorMP @AmitShah @narendramodi @DrMohanBhagwat
— KK Mishra (@KKMishraINC) October 14, 2026
भागीरथपुरा कांड में क्या हुआ था
30 और 31 दिसंबर को 73 सैंपल लिए गए थे। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के मुताबिक इनमें 55 फेल हुए थे। 39 सैंपल में फीकल कोलीफॉर्म (मल से आने वाला बैक्टीरिया) मिला था। यह मामला Bhagirathpura case के नाम से चर्चित है।
आयोग ने कहां पाई चूक
रिपोर्ट के मुताबिक पानी और सीवर की लाइनें पास-पास चल रही थीं। लीकेज से सीवर का पानी पेयजल में मिलता रहा। आयोग ने माना कि यह घटना टाली जा सकती थी।
जांच रिपोर्ट में है आईएएस सिसोनिया का जिक्र
( thesootr ने सबसे पहले उजागर की थी रिपोर्ट- भागीरथपुरा कांड पर कमेटी के सामने IAS, महापौर यह बोले, सिसोनिया बोले- अंतरात्मा कुछ और कहती है)
चर्चा 18 दिसंबर को हुई थी। फाइल 26 दिसंबर को वित्तीय बोली खोलने के लिए आगे बढ़ी थी। इसमें करीब 72 दिन लग गए थे। महापौर के मुताबिक उन्हें 29 दिसंबर की सुबह घटना की जानकारी मिली थी।
आयोग ने देरी को कैसे देखा
2 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्ती दिखाई थी। उन्होंने सिसोनिया को इंदौर से हटाने के निर्देश दिए थे। अब वही अफसर एक जिले की कमान संभालेंगे।
केके मिश्रा ने उठाए सवाल
बड़ा सवाल तो यह है कि रोहित सिसोनिया अकेले नहीं हैं…
आईएएस दिलीप यादव : 16 दिन में नया पद
भूमिका: वे तब इंदौर नगर निगम आयुक्त थे और सरकार ने उन्हें हटाया था। हालांकि आयोग ने बाद में उन्हें क्लीन चिट दे दी।
नई पोस्टिंग: 16 दिन में भोपाल में उप सचिव बने थे। फिर मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के एमडी (MD- Managing Director) बनाए गए।
आईएएस ऋषि गर्ग : हरदा के बाद बिजली कंपनी
लापरवाही: एसीएस (ACS - Additional Chief Secretary) संजय दुबे की जांच ने कलेक्टर और एसपी की बराबर जवाबदेही तय की। GAD ने उन्हें आरोप पत्र दिया। हालांकि गर्ग ने 2022 में यह फैक्ट्री बंद कराई थी, जिसे तत्कालीन संभागायुक्त ने फिर चालू कराया।
नई पोस्टिंग: पहले मंत्रालय में उप सचिव, फिर मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी के एमडी बने।
आईएएस क्षितिज सिंघल : सिवनी से इंदौर निगम तक
भूमिका: वे तब सिवनी कलेक्टर थे और सरकार ने उन्हें हटाया था।
नई पोस्टिंग: पहले मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी बने थे। फिर इंदौर नगर निगम आयुक्त बनाए गए।
आईएएस दीपक आर्य : सात दिन में नई जिम्मेदारी
भूमिका: तत्कालीन सागर कलेक्टर के तौर पर उन्हें हटाया गया था।
नई पोस्टिंग: सिर्फ सात दिन में मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के सीईओ बन गए।
आईएएस तरुण राठी : बस हादसे के बाद आयुक्त
भूमिका: तत्कालीन गुना कलेक्टर के तौर पर उन्हें हटाया गया था।
नई पोस्टिंग: एक महीने बाद वाल्मी के संचालक बने। फिर स्वास्थ्य आयुक्त और बाद में जनजातीय विकास आयुक्त बने।
आईएएस आदित्य सिंह बालाघाट कलेक्टर बने
आरोप: मामला ट्रस्ट की संपत्ति के नामांतरण से जुड़ा बताया गया। शिकायत पीएमओ (PMO - Prime Minister's Office) और मुख्य सचिव तक पहुंची। यह आरोप किसी जांच में साबित होने की जानकारी सामने नहीं आई।
नई पोस्टिंग: 21 जनवरी 2026 को अशोकनगर कलेक्टर पद से हटाकर उप सचिव बनाए गए थे। 13 अक्टूबर की सूची में आदित्य सिंह बालाघाट कलेक्टर बनाए गए।
ड्रग इंस्पेक्टर: 11 महीने में बहाली
लापरवाही: ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और शरद कुमार जैन 6 अक्टूबर 2025 को निलंबित हुए थे। एसटीएफ (STF - Special Task Force) और विभागीय जांच अब भी जारी है।
नई पोस्टिंग: 23 सितंबर 2026 को दोनों बहाल हुए। शर्मा गुना और जैन जबलपुर में उप संचालक बने। स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने शासन की सहमति के बिना बहाली पर जांच के निर्देश दिए।
सवाल किसी एक अफसर का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है, जहां हटाना और फिर बड़ा पद देना साथ चलता दिखता है। क्या जांच रिपोर्ट के बाद विभागीय कार्रवाई होगी? इस पर सरकार की ओर से अभी कोई जवाब नहीं आया है।
यह खबर क्यों जरूरी है:
FAQs
- आईएएस रोहित सिसोनिया को कहां का कलेक्टर बनाया गया है?
रोहित सिसोनिया को रायसेन का कलेक्टर बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 की रात यह आदेश जारी किया। इससे पहले वे किसान कल्याण विभाग में उप सचिव थे। - भागीरथपुरा कांड क्या है?
इंदौर के भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई। प्रशासन ने 36 मौतें मानीं, जबकि आयोग ने 22 मौतों की पुष्टि की। सीवर और पेयजल लाइनों के लीकेज को वजह बताया गया। - जांच रिपोर्ट में आईएएस रोहित सिसोनिया पर क्या कहा गया?
रिपोर्ट के मुताबिक पाइपलाइन टेंडर फाइल उनके स्तर पर करीब 72 दिन आगे नहीं बढ़ी। आयोग ने मुख्य भूमिका कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव की मानी। सिसोनिया की भूमिका निगरानी के स्तर पर देखी गई।
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