IAS संतोष वर्मा को थाने में देना होंगे हस्ताक्षर के नमूने, जिला कोर्ट से आदेश

Sanjay Gupta | Feb 13, 2026, 12:06 IST
ias santosh verma signature samples indore court order
विवादित आईएएस संतोष वर्मा को अब अपने हस्ताक्षर के नमूने इंदौर पुलिस को देने होंगे। इस सिलसिले में पुलिस के आवेदन पर इंदौर जिला कोर्ट ने आदेश दिए हैं। वर्मा को इंदौर के एमजी रोड थाने में जाकर अपने हस्ताक्षर के नमूने देने होंगे।

आशंका है कि न्यायाधीश के हस्ताक्षर खुद किए

Indore: अपर लोक अभियोजक योगेश जायसवाल ने बताया कि आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ लसूड़िया थाने में एक केस दर्ज किया गया था। इसमें अपर सत्र न्यायाधीश विजेंद्र रावत के दो फैसले सामने आए थे।



एक फैसले में उन्हें दोषमुक्त करार दिया गया था, जबकि दूसरे में आपसी समझौते से राजीनामा बताया गया। वहीं, दोषमुक्त वाले फैसले को लेकर न्यायाधीश रावत ने थाने में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कराया था। उनका कहना था कि यह आदेश उनकी कोर्ट से नहीं हुआ था।



इस मामले (ias santosh verma case) में यह आशंका जताई जा रही है कि वर्मा ने खुद अपने नाम पर हस्ताक्षर किए। फिर इसे विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) में पेश कर दिया। इसके बाद उन्हें आईएएस पद पर पदोन्नति मिल गई।



वर्मा हस्ताक्षर टाल रहे थे

वर्मा के खिलाफ पुलिस जांच चल रही है। इसमें पुलिस को उनके हस्ताक्षर की जरूरत है। कई बार नोटिस के बाद भी वह इसे देने के लिए नहीं आए। इस पर पुलिस ने इंदौर जिला कोर्ट में आवेदन लगाया था। इस पर कोर्ट ने यह आदेश दिए हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि वर्मा जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।



जमानत रद्द करने की भी मांग

पुलिस ने वर्मा द्वारा जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए अग्रिम जमानत शर्तों के उल्लंघन की भी बात कही है। साथ ही इस आधार पर जमानत रद्द करने की मांग की।



वहीं वर्मा के वकील ने उन्हें बेवजह फंसाने की बात कही है। एक बार हस्ताक्षर नमूना होने के बाद कोर्ट पुलिस के जमानत रद्द करने के आवेदन पर विचार करेगा।



इन विवादित बयानों से चर्चा में आए थे वर्मा

आईएएस संतोष वर्मा का नाम हाल ही में एक विवादित बयान के कारण चर्चा में आया था। वर्मा ने पहले बयान में ब्राह्मण समाज और उनके परिवारों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।



अजाक्स संगठन के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा को नया प्रांताध्यक्ष चुना गया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब तक ब्राह्मण मेरे बेटे से संबंध नहीं बनाता, आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण तब तक रहेगा, जब तक रोटी-बेटी का व्यवहार समान नहीं होता।



एक और विवादित बयान आया था सामने

इसके बाद वर्मा का एक और विवादित बयान सामने आया था। इसमें उन्होंने खुद को माई (संतोष वर्मा माई के लाल बयान) का लाल बताते हुए अजाक्स संगठन पर गंभीर आरोप लगाए थे। वर्मा ने कहा था कि 2016 तक में हम माई के लाल बने थे, आज हमें तोड़ा जा रहा है। इस बयान के बाद उनकी चर्चा फिर से तेज हो गई थी।



हाईकोर्ट पर लगाए थे आरोप

एक कार्यक्रम के दौरान IAS अफसर संतोष वर्मा ने कहा था कि एसटी वर्ग के बच्चों को सिविल जज कोई और नहीं, बल्कि हाईकोर्ट नहीं बनने दे रहा है। वर्मा ने आगे कहा कि यह वही हाईकोर्ट है, जिससे हम बाबा साहब के संविधान के हिसाब से चलने की गारंटी मांगते हैं।



समाज में बढ़ा आक्रोश

IAS संतोष वर्मा के इन विवादित बयानों के बाद, मध्य प्रदेश और देशभर में उनके खिलाफ विरोध की लहर दौड़ पड़ी थी। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इस मुद्दे पर बयानबाजी कर रही थी। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने वर्मा के बयानों को खतरनाक बताया था।



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