विदिशा के सिरोंज में ओंकारेश्वर के संत ने किया था मूर्ति निकलने का दावा, खुदाई में निकली हनुमान प्रतिमा, पूजा-पाठ का दौर शुरु
Chandresh Sharma | Sept 06, 2023, 24:00 IST
ओंकारेश्वर के एक संत को सपना आया था, जिसके बाद उसने दावा किया कि सिरोंज के लटेरी के धरगा गांव में उसकी बताई जगह पर हनुमान जी की पाषाण प्रतिमा मौजूद है। खुदाई करने पर करीब ढाई फिट की प्रतिमा निकलेगी।
अमित रैकवार, VIDISHA. विदिशा के सिरोंज में एक अजब घटना घटी है, जिस पर सहसा विश्वास नहीं किया जा सकता। दरअसल ओंकारेश्वर के एक संत को सपना आया था, जिसके बाद उसने दावा किया कि सिरोंज के लटेरी के धरगा गांव में उसकी बताई जगह पर हनुमान जी की पाषाण प्रतिमा मौजूद है। खुदाई करने पर करीब ढाई फिट की प्रतिमा निकलेगी। दावा करने वाले संत का नाम हरिदास त्यागी है। बड़ी बात यह है कि संत के दावे को परखने जब ग्रामीणों ने मौके पर खुदाई की तो वास्तव में वहां से दो से ढाई फुट की प्रतिमा निकली है।
फिलहाल खुदाई पर लगाई रोक
कुछ फुट की खुदाई करने के बाद जब वहां प्रतिमा दिखाई देने लगी तो लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई। पवनपुत्र हनुमान के जयकारे लगने लगे, पूजा पाठ और कीर्तन का दौर भी शुरु हो गया। लेकिन लोगों की बढ़ती भीड़ और स्थानीय पुलिस, राजस्व और वन विभाग के बीच सामंजस्य नहीं बना और प्रशासन ने खुदाई को रुकवा दिया। इस फैसले से मौके पर मौजूद ग्रामीणों में काफी रोष देखा जा रहा है।
6 महीने पहले आया था स्वप्न
ओंकारेश्वर से सिरोंज पहुंचे संत हरिदास त्यागी का कहना है कि उन्हें 6 माह पहले यह स्वप्न आया था। उस वक्त वे भी अचंभे में पड़ गए, फिर स्वप्न में जिस स्थान का इशारा मिला था, उसकी तलाश में यहां पहुंचे और ग्रामीणों को स्वप्न की बात बताई। ग्रामीणों ने भी संत की बात पर यकीन करते हुए खुदाई शुरु कर दी। लेकिन प्रशासन द्वारा खुदाई पर रोक लगाए जाने से संत हरिदास भी नाखुश हैं। उनका कहना है कि प्रभु ने खुद स्वप्न देकर यह बात बताई, अब लोगों को उनके भगवान की पूजन-अर्चन से भला प्रशासन क्यों रोक रहा है।
क्या कहते हैं नियम
दरअसल किसी भी पुरातन प्रतिमा पर पुरातत्व विभाग और संस्कृति मंत्रालय का अधिकार होता है। किसी भी प्राचीन धरोहर, मूर्ति या स्मारक को आमजन इस प्रकार खुदाई कर नहीं निकाल सकते। वहीं मौके पर लगी लोगों की भीड़ को देखते हुए कानून व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।
फिलहाल खुदाई पर लगाई रोक
कुछ फुट की खुदाई करने के बाद जब वहां प्रतिमा दिखाई देने लगी तो लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई। पवनपुत्र हनुमान के जयकारे लगने लगे, पूजा पाठ और कीर्तन का दौर भी शुरु हो गया। लेकिन लोगों की बढ़ती भीड़ और स्थानीय पुलिस, राजस्व और वन विभाग के बीच सामंजस्य नहीं बना और प्रशासन ने खुदाई को रुकवा दिया। इस फैसले से मौके पर मौजूद ग्रामीणों में काफी रोष देखा जा रहा है।
6 महीने पहले आया था स्वप्न
ओंकारेश्वर से सिरोंज पहुंचे संत हरिदास त्यागी का कहना है कि उन्हें 6 माह पहले यह स्वप्न आया था। उस वक्त वे भी अचंभे में पड़ गए, फिर स्वप्न में जिस स्थान का इशारा मिला था, उसकी तलाश में यहां पहुंचे और ग्रामीणों को स्वप्न की बात बताई। ग्रामीणों ने भी संत की बात पर यकीन करते हुए खुदाई शुरु कर दी। लेकिन प्रशासन द्वारा खुदाई पर रोक लगाए जाने से संत हरिदास भी नाखुश हैं। उनका कहना है कि प्रभु ने खुद स्वप्न देकर यह बात बताई, अब लोगों को उनके भगवान की पूजन-अर्चन से भला प्रशासन क्यों रोक रहा है।
क्या कहते हैं नियम
दरअसल किसी भी पुरातन प्रतिमा पर पुरातत्व विभाग और संस्कृति मंत्रालय का अधिकार होता है। किसी भी प्राचीन धरोहर, मूर्ति या स्मारक को आमजन इस प्रकार खुदाई कर नहीं निकाल सकते। वहीं मौके पर लगी लोगों की भीड़ को देखते हुए कानून व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।
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