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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- इंदौर की अयोध्यापुरी कॉलोनी में भूमि माफियाओं से जुड़े विवादों का नया मोड़ आया है।
- देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था ने पूर्व सचिव लखोटिया को नोटिस भेजा।
- लखोटिया ने नोटिस को परेशान करने की साजिश बताया और अपनी रजिस्ट्री प्रक्रिया को सही ठहराया।
- सहकारिता विभाग द्वारा सदस्यता सूची और प्लॉट दस्तावेजों की बार-बार जांच की जा रही है।
- यह वही कॉलोनी है, जहां भूमाफियाओं पर पहले भी कलेक्टर मनीष सिंह ने कार्रवाई की थी।
NEWS IN DETAIL
INDORE. सालों से भूमाफियाओं से घिरी देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था की अयोध्यापुरी कॉलोनी में नया विवाद हो गया है। पूर्व सचिव लखोटिया को ही प्लॉट को लेकर संस्था ने नोटिस जारी कर दिया है।
यह नोटिस जारी किया गया
यह नोटिस संस्था के उपाध्यक्ष वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज जायसवाल ने जारी किया गया है। यह नोटिस संस्था के पूर्व सचिव विमला लखोटिया के नाम पर जारी हुआ है, जिनके पास संस्था का प्लॉट नंबर 128 है।
नोटिस में कहा गया है कि प्लॉट व संस्था के संबंधित मूल दस्तावेजों के साथ निरीक्षण के लिए संस्था के दफ्तर में सात दिन के अंदर उपस्थित होइए। दस्तावेजों का निरीक्षण संचालक मंडल की बैठक में लिया जाकर सर्वसहमति से फैसला लेकर उपायुक्त सहकारिता इंदौर को दिया जाएगा।
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क्यों दिया गया नोटिस
सहकारिता विभाग द्वारा लगातार संस्था के मूल सदस्यों और उनके प्लॉट को लेकर जांच की जा रही है। इसे लेकर कई बार विवाद हो चुके हैं और खासकर सदस्यता सूची विवादित है। इसकी पूर्व में भी जांच कराई गई थी। इसमें एक ही परिवार में कई सदस्यों के पास प्लॉट की बात आई थी। इन्हीं विवादों में लखोटिया भी उलझी हैं।
क्या बोल रहे लखोटिया
उधर गौरीशंकर लखोटिया का इस मामले में कहना है कि यह बेवजह का परेशान करने का खेल है। कई बार जांच हो चुकी है और यह प्लॉट वैध है। मैंने ही इस प्लॉट की रजिस्ट्री अपने नाम कराने के लिए आवेदन किया हुआ है, जिससे रोकने के लिए यह नोटिस किया गया है। इसकी जरूरत ही नहीं थी, केवल एनओसी देने और जांच के नाम पर सहकारिता से मिलीभगत कर भ्रष्टाचार करने की मंशा है।
संस्था की जमीन पर भूमाफियाओं पर हो चुका केस
यह वही संस्था और कॉलोनी है जिसमें भू माफिया अभियान के तहत तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा केस दर्ज कराए गए थे। इसमें भूमाफिया दीपक मद्दा के साथ सुरेंद्र संघवी व अन्य पर केस हुए थे। तब संस्था के 369 प्लाटधारकों ने अपने प्लॉट पर कब्जा लिया था। लेकिन अभी भी कॉलोनी वैध नहीं हुई है। इसे लेकर भूमाफियाओं ने निगम में आपत्ति लगा दी थी।
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