इंदौर में खत्म नहीं हो रहा दूषित पानी का कहर, प्रशासन के दावे फेल, फिर मिले 23 नए मरीज

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी बेकाबू हो चुकी है। अब तक 3 हजार 300 से ज्यादा मरीज सामने आ चुके हैं। प्रशासन के नियंत्रण के दावों के बीच नए मरीज मिल रहे हैं। गुरुवार को फिर 23 नए संक्रमित पाए गए।

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Rahul Dave
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  • इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली बीमारी बेकाबू हो चुकी है।
  • भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के कुल 3300 से ज्यादा मरीज मिले।
  • अब तक 446 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
  • गुरुवार को 23 नए मरीज मिले, 6 की हालत गंभीर है।
  • 10 मरीजों की स्थिति अभी भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

इंदौर। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैली उल्टी-दस्त की बीमारी अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है। नए मरीज लगातार सामने आ रहे हैं। इससे प्रशासन के उन दावों की पोल खुल रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि स्थिति नियंत्रण में हैं। इंदौर हेल्थ डिपार्टमेंट द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को फिर 23 नए मरीज मिले। इनमें से छह को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती करना पड़ा।

10 की हालत अभी भी चिंताजनक

भागीरथपुरा क्षेत्र से अब तक 3 हजार 300 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। यह संख्या किसी सामान्य मौसमी बीमारी की नहीं, बल्कि एक बड़े प्रशासनिक फेल्योर की ओर इशारा करती है। हालात इतने गंभीर हैं कि अब तक 446 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।10 मरीजों की हालत अभी भी चिंताजनक बताई जा रही है।

डर के साए में जी रहे लोग

स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि कई दिनों से गंदा और बदबूदार पानी नलों से आ रहा था। इसकी शिकायतें इंदौर नगर निगम म और स्वास्थ्य विभाग को लगातार दी गईं, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब तक प्रशासन हरकत में आता, तब तक सैकड़ों लोग बीमार हो चुके थे। अब हालात यह हैं कि हर गली-मोहल्ले में उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीज मिल रहे हैं। लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं।

अब पर्चे बांटना और सलाह देना कितना प्रभावी ?

स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रचार-प्रसार सामग्री बांटने और बचाव के निर्देश देने की बात कही जा रही है। जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। सवाल यह है कि जब हजारों लोग बीमार हो चुके हैं, तब पर्चे बांटना और सलाह देना कितना प्रभावी है? यह कदम आग लगने के बाद पानी डालने जैसा प्रतीत हो रहा है।

दोबारा जहरीले पानी को पीने के लिए मजबूर न हों

सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने मरीजों से दवाइयों की पूरी डोज लेने की अपील जरूर की है, लेकिन यह बयान भी प्रशासन की जिम्मेदारी से बचने जैसा लग रहा है। मरीजों की डोज पूरी कराना जरूरी है, लेकिन उससे पहले यह सुनिश्चित करना ज्यादा अहम है कि लोग दोबारा उसी जहरीले पानी को पीने के लिए मजबूर न हों।

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