/sootr/media/media_files/2025/11/29/ed-action-indore-liquor-scam-2025-11-29-17-36-55.jpg)
Photograph: (The Sootr)
Indore. ED इंदौर सब रीजनल ऑफिस ने एमपी के सबसे बड़े 71 करोड़ के आबकारी फर्जी चालान घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में केस दर्ज करने के बाद ईडी ने छापे भी मारे थे। अब जांच के बाद ईडी ने 70 करोड़ की संपत्तियां अटैच की है।
तीन शहरों में हैं संपत्तियां
ईडी ने विभिन्न शराब ठेकेदारों की इंदौर, मंदसौर और खरगोन में विभिन्न स्थानों पर स्थित संपत्तियों को अटैच किया है। इसमें भूमि और फ्लैट शामिल हैं। कुर्क की गई संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य 70 करोड़ रुपए आंका गया है।
ये भी पढ़ें...विमेंस प्रीमियर लीग WPL में पहली बार मध्यप्रदेश की 5 खिलाड़ी, क्रांति गौड़ भी शमिल
ये भी पढ़ें...अजाक्स प्रांताध्यक्ष IAS संतोष वर्मा पर केस करने के लिए इंदौर कोर्ट में परिवाद दायर
ED, Indore has provisionally attached 28 immovable assets on 28.11.2025 in the form of land and flats situated at various places at Indore, Mandsaur and Khargone, belonging to various liquor contractors under PMLA, 2002, in the case of “Liquor Fake Challan Scam”. The current… pic.twitter.com/AKwLUjNHmu
— ED (@dir_ed) November 29, 2025
रावजी थाने में दर्ज FIR पर हो रही जांच
ईडी ने इंदौर के रावजी पुलिस स्टेशन की एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। एफआईआर में शराब ठेकेदारों पर ट्रेजरी चालान में जालसाजी और हेरफेर का आरोप है। इन आरोपों के तहत सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की बात की गई है। इसमें आरोपी व्यक्ति छोटी-छोटी राशि के चालान तैयार करके बैंक में जमा करते थे। चालान के निर्धारित प्रारूप में रुपए अंकों में और रुपए शब्दों में लिखा होता था।
मूल्य अंकों में भरा जाता था और रुपए शब्दों में के लिए रिक्त स्थान छोड़ दिया जाता था। राशि जमा करने के बाद, जमाकर्ता बाद में रुपए अंकों में राशि में हेरफेर करता था और रुपए शब्दों में के रिक्त स्थान में बढ़ी हुई राशि भर देता था। बढ़ी हुई राशि के चालान की प्रतियां संबंधित मदिरा गोदाम में जमा की जाती थीं। यह प्रक्रिया जिला आबकारी कार्यालय में होती थी।
इसे देशी मदिरा गोदाम या जिला आबकारी कार्यालय, इंदौर के अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करके और मदिरा शुल्क/मूल लाइसेंस शुल्क/न्यूनतम गारंटी के रूप में राशि जमा करके, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर लिया जाता था। इस प्रकार, कम शुल्क चुकाने के बावजूद अधिक मदिरा स्टॉक जमा कर लिया जाता था, जिससे राज्य के खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।
एमपी सरकार के दो साल पूरे होने पर सर्वे में शामिल होने के लिए फोटो पर क्लिक करें...
ये भी पढ़ें...छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व IAS निरंजन दास ने कमाए 16 करोड़, सरकार को हुआ 530 करोड़ का नुकसान
ये भी पढ़ें...आबकारी विभाग के 30 अधिकारियों को ईडी का नोटिस, रिटायर्ड भी आए जद में
ईडी की जांच में यह भी आया
ईडी की पीएमएलए जांच में यह खुलासा हुआ है। राजू दशवंत, अंश त्रिवेदी और अन्य शराब ठेकेदार जालसाजी और धोखाधड़ी में शामिल थे। इन पर आपराधिक षडयंत्र का आरोप है। इससे पहले, ईडी ने इस मामले में मुख्य आरोपी राजू दशवंत और अंश त्रिवेदी को गिरफ्तार किया था। यह जेल में हैं। ईडी की जांच जारी है।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us
/sootr/media/post_attachments/ea7183ce-6cb.png)