इंदौर में पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह ने जो 250 करोड़ की जमीन बचाई थी, उसे लेने में जुटे भूमाफिया
Sanjay Gupta | Feb 25, 2026, 16:31 IST
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इंदौर के पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह ने खजराना की 250 करोड़ रुपए की जमीन को सरकारी घोषित की थी। वहीं, अब इस जमीन को कानूनी दांव-पेंच के जरिए वापस लेने की कोशिश की जा रही है।
INDROE. इंदौर में भूमाफिया एक बार फिर सक्रिय है। सहकारिता सोसायटी के घोटाले के जरिए हजारों करोड़ की जमीन का खेल करने वाले ये जादूगर अब अपनी जमीन फिर लेने में जुट गए हैं। यह वह जमीनें हैं जो तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह के समय भूमाफिया अभियान चलाकर सरकारी घोषित की गई थीं।
अब जिस जमीन की बात कर रहे हैं, वह खजराना के सर्वे नंबर 114 की 2.016 हेक्टेयर (पांच एकड़) जमीन है। यह जमीन भूमाफियाओं से घिरी सूर्या हाउसिंग सोसायटी की है।
इसे 25 जुलाई 2022 को तत्कालीन कलेक्टर (आईएएस मनीष सिंह) ने नियमों का उल्लंघन करने पर शासन में निहित करने के लिए प्रमुख सचिव शासन को पत्र लिखा था। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड में भी इस संबंध में लिख दिया गया था।
रिकॉर्ड के 12 नंबर कॉलम में किया गया था कि भूमि शासन में वैष्ठित करने की कार्रवाई राजस्व विभाग व कलेक्टर कार्यालय में प्रचलित है।न्यायालय कलेक्टर द्वारा संस्था द्वारा नगर भूमि सीमा एक्ट 1976 की धारा 20 (1) (क) का उल्लंघन करने के चलते यह कार्रवाई की जा रही है।
संस्था को यह जमीन 1998 में शासकीय सीलिंग एक्ट में अतिशेष होने पर आवासहीन लोगों को आवास उपलब्ध कराने के लिए दी गई थी। जब संस्था बनी तब इसमें 150 सदस्य थे। वहीं, बाद में 25 सदस्य रह गए।
इसमें भूमाफिया दीपक मद्दा के भाई नीलेश जैन संस्था के प्रमुख बन गए थे। इनके करीबी लोग, कर्मचारी, परिजन इसमें सदस्य बन गए थे। संस्था की जमीन का टीएंडसीपी से आवासीय की जगह कर्पोरेट विकास का नक्शा पास कराया गया था।
मनीष सिंह ने कलेक्टर रहते हुए इस संस्था के एक-एक सदस्य की जांच कराई थी। इसके बाद 25 पन्नों का पत्र 25 जुलाई 2022 को प्रमुख सचिव को भेजा था। इसमें कहा था कि इस जमीन में छूट की शर्तों का उल्लंघन किया गया है। जमीन की कीमत 250 करोड़ से ज्यादा है और इसे शासन में वैष्ठित किया जाना चाहिए।
संस्था की जमीन वापस लेने के लिए अब इसमें कानूनी तौर पर खेल किया जा रहा है। संस्था के चुनाव हुए और बचे-खुचे सदस्यों ने इसमें राजेश सोलंकी को अध्यक्ष बना लिया था। अब सोलंकी ने संस्था की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है।
इसमें कहा गया है कि केवल 25 जुलाई 2022 के तत्कालीन कलेक्टर के पत्र के आधार पर जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किया गया था। इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश शासन या कलेक्टर कोर्ट से हुआ ही नहीं है।
अब हाईकोर्ट जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने इस संबंध में एमपी सरकार और इंदौर कलेक्टर से जवाब मांगा है। साथ ही, 25 जुलाई 2022 के पत्र संबंध में औपचारिक आदेश की कॉपी मांगी है।
जानकारों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में कोई भी बदलाव शासकीय आदेश से होता है। पत्र के आधार पर नहीं किया जा सकता है। चाहे आदेश तहसलीदार कोर्ट से हो, एसडीओ या फिर कलेक्टर कोर्ट से।
वहीं अभी तक यह साफ नहीं है कि इस जमीन को लेकर क्या कोई औपचारिक आदेश हुआ है। कायदे से शासन को इस संबंध में जमीन लेने का आदेश देना था। वहीं, अभी तक शासन का इस संबंध में आदेश सामने नहीं आया है। यदि यह आदेश हाईकोर्ट में पुटअप नहीं हुआ तो फिर ऐसे में जिला प्रशासन और शासन के लिए इस जमीन को बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
इस संबंध में सिंह ने एक-एक सदस्य की जांच कराई थी। इसमें भूमाफिया दीपक मद्दा को इस खेल के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि संस्था संचालक मद्दा का सगा भाई नीलेश है।
कई सदस्य दाखाबाई जैन, हस्तीमल लोढ़ा, चंदनबाला जैन, महेंद्र जैन, दिलीप जैन, ममता जैन एक ही परिवार से हैं। साथ ही अशोक पिपाड़ा, अंशुल जैन, प्राचर्न, जैन रवि जैन एक ही परिवार से हैं। देवीसिंह राठौर, कमलेश भंडारी जैसे सदस्य तो भूमाफिया के कर्मचारी मात्र हैं। यानी संस्था और जमीन पूरी तरह से भूमाफिया की जेब में हैं।
भूमाफियाओं की चालबाजी की खबर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा तक भी पहुंच गई है। इसके बाद इस केस को हाईकोर्ट में मजबूती से लड़ने के लिए अधिवक्ताओं को सूचित किया गया है।
साथ ही अधिकारियों को भी इस मामले में सभी रिकॉर्ड एकत्र करने और मजबूत जवाब तैयार करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त शासन स्तर पर भी चर्चा हो रही है कि इस जमीन पर किसी भी तरह भूमाफिया हावी नहीं हो सके।
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इस जमीन को लेकर शुरू हुई जादूगरी
इसे 25 जुलाई 2022 को तत्कालीन कलेक्टर (आईएएस मनीष सिंह) ने नियमों का उल्लंघन करने पर शासन में निहित करने के लिए प्रमुख सचिव शासन को पत्र लिखा था। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड में भी इस संबंध में लिख दिया गया था।
रिकॉर्ड के 12 नंबर कॉलम में किया गया था कि भूमि शासन में वैष्ठित करने की कार्रवाई राजस्व विभाग व कलेक्टर कार्यालय में प्रचलित है।न्यायालय कलेक्टर द्वारा संस्था द्वारा नगर भूमि सीमा एक्ट 1976 की धारा 20 (1) (क) का उल्लंघन करने के चलते यह कार्रवाई की जा रही है।
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मनीष सिंह ने इस तरह जांच करके ली थी जमीन
इसमें भूमाफिया दीपक मद्दा के भाई नीलेश जैन संस्था के प्रमुख बन गए थे। इनके करीबी लोग, कर्मचारी, परिजन इसमें सदस्य बन गए थे। संस्था की जमीन का टीएंडसीपी से आवासीय की जगह कर्पोरेट विकास का नक्शा पास कराया गया था।
मनीष सिंह ने कलेक्टर रहते हुए इस संस्था के एक-एक सदस्य की जांच कराई थी। इसके बाद 25 पन्नों का पत्र 25 जुलाई 2022 को प्रमुख सचिव को भेजा था। इसमें कहा था कि इस जमीन में छूट की शर्तों का उल्लंघन किया गया है। जमीन की कीमत 250 करोड़ से ज्यादा है और इसे शासन में वैष्ठित किया जाना चाहिए।
अब संस्था ने यह शुरू किया खेल
इसमें कहा गया है कि केवल 25 जुलाई 2022 के तत्कालीन कलेक्टर के पत्र के आधार पर जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किया गया था। इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश शासन या कलेक्टर कोर्ट से हुआ ही नहीं है।
अब हाईकोर्ट जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने इस संबंध में एमपी सरकार और इंदौर कलेक्टर से जवाब मांगा है। साथ ही, 25 जुलाई 2022 के पत्र संबंध में औपचारिक आदेश की कॉपी मांगी है।
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कॉपी नहीं मिली तो शासन के हाथ से फिसल सकती है जमीन
वहीं अभी तक यह साफ नहीं है कि इस जमीन को लेकर क्या कोई औपचारिक आदेश हुआ है। कायदे से शासन को इस संबंध में जमीन लेने का आदेश देना था। वहीं, अभी तक शासन का इस संबंध में आदेश सामने नहीं आया है। यदि यह आदेश हाईकोर्ट में पुटअप नहीं हुआ तो फिर ऐसे में जिला प्रशासन और शासन के लिए इस जमीन को बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
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भूमाफिया को लेकर पत्र में बहुत कुछ लिखा गया था
कई सदस्य दाखाबाई जैन, हस्तीमल लोढ़ा, चंदनबाला जैन, महेंद्र जैन, दिलीप जैन, ममता जैन एक ही परिवार से हैं। साथ ही अशोक पिपाड़ा, अंशुल जैन, प्राचर्न, जैन रवि जैन एक ही परिवार से हैं। देवीसिंह राठौर, कमलेश भंडारी जैसे सदस्य तो भूमाफिया के कर्मचारी मात्र हैं। यानी संस्था और जमीन पूरी तरह से भूमाफिया की जेब में हैं।
इंदौर कलेक्टर भी हुए सक्रिय
साथ ही अधिकारियों को भी इस मामले में सभी रिकॉर्ड एकत्र करने और मजबूत जवाब तैयार करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त शासन स्तर पर भी चर्चा हो रही है कि इस जमीन पर किसी भी तरह भूमाफिया हावी नहीं हो सके।
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