इंदौर में 200 करोड़ की जमीन पर अजीब खेल, असली पार्वतीबाई का रहस्य, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Sanjay Gupta | Feb 03, 2026, 16:42 IST
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Strange game over land worth Rs 200 crore in Indore the mystery of the real Parvatibai
Photograph: (the sootr)

इंदौर के कनाड़िया में 200 करोड़ की जमीन पर भूमाफिया का बड़ा खेल सामने आया है। हाईकोर्ट ने तीन 'पार्वतीबाई' और संदिग्ध समझौतों पर सरकार से जवाब मांगा है।

NEWS IN SHORT

  • इंदौर के कनाड़िया तहसील में 200 करोड़ की जमीन पर 10 साल से विवाद चल रहा है।
  • पार्वतीबाई की मृत्यु के बाद जमीन का नामांतरण गलत वारिसों को दे दिया गया था।
  • राजस्थान से आए दस्तावेजों के आधार पर एसडीओ कोर्ट ने नामांतरण रद्द किया।
  • हाईकोर्ट ने राज्य शासन से इस मामले में जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
  • सूत्रों के अनुसार इंदौर के भूमाफिया का हाथ इस विवाद में होने की आशंका जताई जा रही है।

NEWS IN DETAIL

INDORE. इंदौर में कनाड़िया तहसील में फिनिक्स माल के पीछे की 200 करोड़ से ज्यादा कीमत की जमीन को लेकर 10 साल से अजीब खेल चल रहा है। यह खेल अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। इसमें ताजा विवाद तब हुआ जब वकील ने इसमें केस वापस लेने का हाईकोर्ट में आवेदन लगा दिया। इसके बाद हाईकोर्ट को इसमें शंका हुई और अब शासन से जवाब मांगा है। इस पूरे मामले में भूमाफिया द्वारा जमीन को लेकर पर्दे के पीछे समझौता करने के खेल की आशंका व्यक्त की जा रही है।

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10 साल पहले कलेक्टोरेट से हुआ खेल शुरू

यह जमीन कनाड़िया के सर्वे नंबर 44 की तीन हेक्टेयर जमीन का है जो मूल रूप से पार्वतीबाई पति ओंकारलाल के नाम पर थी। इसमें कलेक्टोरेट में 2014-15 में आवेदन लगा कि पार्वतीबाई की मौत हो गई है, हम उनके वारिस है और जमीन उनके नाम नामांतरण की जाए। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट में ही तीन-तीन पार्वतीबाई के वारिस खड़े हो गए, इसमें एक तो जीवित थी। बाद में एक को सही वारिस मानते हुए जमीन नामांतरण हुई।

एसडीओ कोर्ट में फिर खुलासा

इसके बाद राजस्थान से नीलेश पालीवाल व प्रकाश पार्वतीबाई का मृत्यु प्रमाणपत्र लेकर इंदौर कलेक्टोरेट पहुंचे और कहा कि पार्वतीबाई की मौत तो 2015 जून में अभी हुई है और वहीं तहसीलदार कोर्ट में 1975 में उनकी मौत मानते हुए गलत वारिसों को जमीन नामांतरण कर दी। इसके बाद एसडीओ कोर्ट ने जमीन नामांतरण रद्द कर दिया।

इसके बाद कोर्टबाजी शुरू

इसके बाद विविध वारिसों ने खुद को असली बताते हुए कोर्ट में केस किए और समझौता डिक्रियां भी हासिल करने का खेल हुआ। वहीं हाईकोर्ट में भी दो-दो पार्वतीबाई के वारिसों ने केस लगा दिया। इसमें कमलाबाई, जगदीशचंद्र, तिलोत्मा आदि पक्षकार थे।

हाईकोर्ट ने आदेश में यह लिखा

हाईकोर्ट जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी ने आदेश में लिखा कि अधिवक्ता डॉ. विवेक पांडे और उनके सहयोगी ने निवेदन किया है कि वह विविध कारणों से अपने आचरण के चलते इस अपील में अब प्रतिनिधित्व करने के इच्छुक नहीं है। रिकार्ड में पता चलता है कि अपील वापस लेने के लिए दो आवेदन दाखिल किए गए हैं, इनकी दोनों की स्थिति भिन्न है।

एक आवेदन में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए मामले को वापस भेजने की शर्त पर अपील लेने का अनुरोध किया और दूसरे ने समाझौते की शर्तों पर अपील वापस लेने का अनुरोध किया। रिकार्ड से पता चलता है कि राज्य शासन भी एक पक्ष है और उनका हित जुड़ा हुआ है। ऐसे में राज्य शासन का पक्ष सुनना आवश्यक है। उन्हें जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाता है।

इस तरह भूमाफिया के खेल की आशंका

सूत्रों के अनुसार भूमाफिया इस खेल में जुड़े हैं। आज यह जमीन मौके की और कमर्शियल महत्व की है। ऐसे में हाईकोर्ट में याचिका वापस लेकर समझौते पर मुहर लगाने की कवायद थी। इसके आधार पर डिक्री पर मुहर लगती और कलेक्टोरेट से भी यह जमीन अपने नाम करा ली जाए। नियमानुसार जब वारिस नहीं होते हैं, तब इस तरह की जमीन राज्य शासन के हित में चली जाती है। इससे बचने के लिए यह पूरा खेल हो रहा है।

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याचिका में इतने पक्षकार

इसमें याचिका में कमलाबाई बागली देवास जिला, शांताबाई सैलाना रतलाम जिला, चंदाबाई डूंगरपुर राजस्थान, वंदनाबाई बागली देवास जिला याचिकाकर्ता है। वहीं पक्षकार में तितोत्मा राजसमंद राजस्थान, प्रकाश चंद्र राजसमंद राजस्थान, नीलश पोरवाल राजसमंज राजस्थान, आशीष पालीवाल राजसमंद राजस्थान और मप्र शासन है।

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