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News In Short
इंदौर में सांसद के गनमैन ने बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर रिवॉल्वर तान दी।
घटना शुक्रवार शाम को लोखंडे पुल के पास हुई, जहां अविनाश शराब पी रहा था।
बजरंग दल ने थाने का घेराव किया है। साथ ही, नशे में रिवॉल्वर तानने का आरोप लगाया है।
पुलिस ने देर रात अविनाश के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
News In Detail
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक सुरक्षाकर्मी का हैरान कर देने वाला कारनामा सामने आया है। शुक्रवार को एमजी रोड थाना क्षेत्र में सांसद शंकर लालवानी के पीएसओ (गनमैन) अविनाश भदौरिया का बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से झगड़ा हो गया। गनमैन ने रिवॉल्वर निकालकर कार्यकर्ताओं पर तान दी।
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पुलिस जवान ने बजरंग दल कार्यकर्ता पर तानी रिवॉल्वर
टीआई विजय सिंह सिसौदिया के मुताबिक, ये घटना शुक्रवार शाम 5 बजे लोखंडे पुल के पास हुई। एसएएफ में तैनात पुलिस जवान अविनाश भदौरिया अपने दोस्तों के साथ बैठकर शराब पी रहा था। इसी दौरान सदर बाजार इलाके का बजरंग दल का सदस्य सिद्धू पुरोहित अपने दोस्तों के साथ वहां आया था। वहीं, किसी बात को लेकर उसकी अविनाश से झगड़ा शुरू हो गई।
दोनों के बीच झूमाझटकी हुई और इसी दौरान अविनाश ने रिवॉल्वर निकालकर सिद्धू और उसके साथियों पर तान दी। साथ ही, अविनाश ने बजरंग दल के लोगों पर गोली चलाने की कोशिश भी की।
बीच सड़क पर हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा
पिस्टल दिखाते ही वहां मौजूद लोग गुस्से में आ गए। लोग तुरंत पीएसओ को घेरकर पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। इस दौरान सड़क पर काफी देर तक हंगामा चलता रहा।
बजरंग दल ने किया थाने का घेराव
घटना के बाद पुलिस ने भदौरिया को रिवॉल्वर के साथ पकड़कर थाने ले आई। देर रात तक अधिकारियों ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की और उसे थाने में ही बैठाए रखा। जब बजरंग दल के पदाधिकारियों को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अविनाश पर नशे में रिवॉल्वर तानने का आरोप लगाया। साथ ही उस पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए रात तक एमजी रोड थाने का घेराव किया। इसके बाद रात 11 बजे के आसपास पुलिस ने भदौरिया पर मामला दर्ज किया।
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कांग्रेस प्रवक्ता ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अमित चौरसिया ने अपने बयान में कहा कि यह हैरान करने वाली बात है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की केवल कुछ धाराओं के तहत मामला किया किया है। जबकि घटना के तथ्यों के आधार पर कड़ी धाराएं लगनी चाहिए थीं। इससे यह संदेह बढ़ता है कि जानबूझकर गंभीर अपराध को हलके मामलों में सीमित किया गया है।
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि आरोपी के पास जो पिस्टल थी, वह शासकीय हथियार था या नहीं। ऐसी पिस्टल पर Arms Act की धाराएं स्वतः लागू होती हैं या नहीं, यह भी जांचना आवश्यक है।
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