कचरे में फेंका 2 किलो चांदी का कलश, सफाईकर्मियों ने सैकड़ों टन मलबे से खोज निकाला
Aman Vaishnav | Jul 21, 2026, 15:20 IST
कचरे में फेंका चांदी का कलश
इंदौर के राजेंद्र नगर में कचरे के साथ 2 किलो का चांदी का कलश भी फेंक दिया। शाम को जब परिवार को कलश गायब होने का पता चला, तो उन्होंने तुरंत अपने वार्ड के पार्षद प्रशांत बड़वे से मदद मांगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- इंदौर में कचरा उठाने वाली गाड़ी में एक झोला फेंक दिया गया था।
- इस पुराने झोले में परिवार का दो किलो वजनी चांदी का कलश रखा था।
- सुबह कचरा उठा तो झोला भी उसी के साथ चला गया।
- शाम को परिवार को याद आया कि कलश गायब है।
- इसके बाद पार्षद और निगम की टीम ने मिलकर तलाश शुरू की और कलश ढूंढ निकाला।
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बरसों पुराने झोले में पड़ा था लौटा
यह झोला बरसों से घर में यूं ही पड़ा हुआ था। किसी को अंदाजा नहीं था कि इसी झोले में परिवार का पुश्तैनी चांदी का कलश रखा है।
घर की सफाई के दौरान ऐसी पुरानी चीजें अक्सर बिना ध्यान दिए एक तरफ रख दी जाती हैं। यही झोला भी लंबे समय से किसी कोने में पड़ा था। परिवार को यह भी नहीं पता था कि इसमें इतनी कीमती और भावनात्मक रूप से जुड़ी चीज मौजूद है।
देर शाम जाकर परिवार को इस बात का एहसास हुआ तो घर में तुरंत हड़कंप मच गया। सब लोग कलश ढूंढने में जुट गए, लेकिन वह कहीं नहीं मिला।
तब समझ आया कि कलश सुबह वाले कचरे के साथ ही चला गया है। परिवार के लिए यह कलश सिर्फ चांदी का बर्तन नहीं था, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक निशानी था।
घरवाले फौरन वार्ड के पार्षद प्रशांत बड़वे के घर पहुंचे। उन्होंने रुंधे गले से पूरी बात बताई। पार्षद ने बिना देर किए मदद का भरोसा दिलाया और कचरा वाहन के चालक को फोन लगाया।
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कचरा जीटीएस से प्लांट गया
प्रभारी ने बताया कि वह कचरा अब ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थित प्लांट भेजा जा चुका है। यह सुनकर परिवार की चिंता और बढ़ गई, क्योंकि इतने बड़े ढेर में एक छोटा कलश ढूंढना आसान नहीं था।
बता दें कि शहर भर से रोज टनों कचरा इसी तरह जीटीएस होते हुए ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचता है। वहां गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग छांटा जाता है। इतने बड़े पैमाने पर काम होने की वजह से किसी एक छोटी चीज को ढूंढना बड़ी चुनौती होती है।
शनिवार को शुरू हुई तलाश
सूचना मिलते ही शनिवार सुबह करीब सात बजे कर्मचारियों ने तलाश फिर शुरू कर दी। कर्मचारियों ने ढेर को बारीकी से खंगालना शुरू किया।
करीब तीन घंटे की मेहनत के बाद सुबह दस बजे कलश मिल गया। अगर यह तलाश एक दिन और टल जाती, तो सूखा कचरा मशीन में दब चुका होता। ऐसे में कलश का मिलना और मुश्किल हो सकता था।
कर्मचारियों ने तुरंत यह खबर पार्षद बड़वे तक पहुंचाई। इसके बाद कलश रावेरकर परिवार को सौंप दिया गया।
रहवासियों ने किया सम्मान
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