इंदौर ED ने जूम डेवलपर्स की 2650 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में बैंकों को 180.87 करोड़ रुपए दिलवाए

जूम डेवलपर्स प्रालि द्वारा बैंकों के साथ की गई 2 हजार 650 करोड़ की धोखाधड़ी में अब बैंकों को राशि वापस मिलने लगी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ED) इंदौर ने जूम से अटैच की गई संपत्ति में से बैंकों को 180.87 करोड़ रुपए वापस दिलवाए हैं।

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Sanjay Gupta
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News In Short

  • जूम डेवलपर्स ने बैंकों के साथ 2 हजार 650 करोड़ की धोखाधड़ी की।

  • ईडी इंदौर ने कुर्क संपत्तियों से वसूली की प्रक्रिया शुरू की।

  • कोर्ट के आदेश पर बैंकों को 180.87 करोड़ रुपए वापस मिले।

  • धोखाधड़ी में पीएनबी समेत कुल 22 बैंक शामिल थे।

News In Detail

इन बैंकों को मिली राशि

इस मामले में विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने अहम आदेश दिया है। प्रमुख बैंक पीएनबी ने कंसोर्टियम बैंकों की तरफ से कोर्ट में आवेदन लगाया था। पीएनबी ने पीएमएलए की धारा 8(8) के तहत कुर्क की गई संपत्तियों को वापस करने की मांग की थी।

वहीं, आईडीबीआई बैंक ने भी इसी मामले में अलग से आवेदन दायर किया था। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें ध्यान से सुनीं। इसके बाद इंदौर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय ने बैंकों के पक्ष में फैसला सुनाया।

अदालत ने आदेश दिया कि कुल 180.87 करोड़ रुपए की कुर्क की गई संपत्तियां बैंकों को वापस की जाएं। यह फैसला बैंकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

2650 करोड़ की धोखाधड़ी है

यह मुआवजा मेसर्स जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस का है। इस मामले में सीबीआई की बीएस एंड एफसी शाखा, नई दिल्ली ने कंपनी और उसके लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

सीबीआई ने जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके डायरेक्टर विजय मदनलाल चौधरी और बिहारी लाल केजरीवाल समेत अन्य आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की। मामला आईपीसी की धारा 120बी और 420 के तहत दर्ज हुआ था।

इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने पीएनबी के नेतृत्व वाले 22 बैंकों के कंसोर्टियम को करीब 2 हजार 650 करोड़ रुपए का चूना लगाया। यह मामला बड़े स्तर की बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया जा रहा है।

इस तरह की थी धोखेबाजी

एफआईआर के अनुसार जेडडीपीएल (जूम) ने विदेशी कंपनियों को कागजी अनुबंधों के आधार पर बिचौलियों/एग्रीगेटरों के पक्ष में जारी बैंक गारंटी के रूप में एक कंसोर्टियम बैंकिंग व्यवस्था के तहत धोखाधड़ी से बैंक से लोन लिया।

बाद में इस लोन राशि को समूह कंपनियों, भारत में स्थित ट्रस्टों और विदेशी संस्थाओं को हस्तांतरित कर दी गई। जांच में यह भी पता चला कि विदेशी एग्रीगेटरों को जूम के डायरेक्टर विजय मदनलाल चौधरी द्वारा संचालित किया जाता था। इसमें आगे की जांच जारी है।

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