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News in Short
- मध्यप्रदेश भवन विकास निगम ने IPMS 2.0 लागू करने का फैसला किया है।
- यह डिजिटल सिस्टम निर्माण कार्यों की हर प्रक्रिया को रिकॉर्ड करेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
- WMS पहले सिर्फ एस्टीमेट और बिलिंग तक सीमित था, अब IPMS में टेंडर, पत्राचार और गुणवत्ता जांच भी डिजिटल होगी।
- IPMS 2.0 से भ्रष्टाचार और ठेकेदार-इंजीनियर गठजोड़ पर रोक लगने की उम्मीद है।
- IPMS 2.0 की असली परीक्षा अब होगी, क्या यह ईमानदारी से लागू होगा।
News in Detail
मध्य प्रदेश भवन विकास निगम लिमिटेड (BDC) ने निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए IPMS 2.0 लागू करने की तैयारी की है। यह कदम निगरानी और गुणवत्ता सुधार के उद्देश्य से उठाया गया है। यह सिस्टम प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर भुगतान और गुणवत्ता जांच तक हर प्रक्रिया को डिजिटल बनाएगा। हालांकि, सवाल यह है कि क्या नया सिस्टम पुराने आरोपों और इंजीनियर-ठेकेदार गठजोड़ पर लगाम लगा पाएगा। इन कारणों से निगम की छवि बार-बार सवालों में रही है।
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पुराने दाग, जिनसे उपजा बदलाव का दबाव
भवन विकास निगम से जुड़े कई निर्माण कार्य पहले घटिया गुणवत्ता के पाए गए हैं। आरोप रहे हैं कि ठेकेदारों को एडवांस भुगतान किया गया। बदले में काम की गुणवत्ता से समझौता हुआ। जिन विभागों के लिए भवन बने, उनके अधिकारियों ने शिकायत की। शिकायतें निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों के खिलाफ थीं। डिजिटल निगरानी की कमी के कारण खामियां समय पर पकड़ में नहीं आईं।
अब क्या है IPMS 2.0?
IPMS 2.0 एक डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital platform ) है, जहां प्लानिंग से फाइनल बिल तक, हर दस्तावेज, निर्णय और भुगतान रिकॉर्ड होगा। यानी अब फाइलें इधर-उधर नहीं, सब कुछ एक क्लिक में सामने।
पहले क्या था WMS, और क्यों नाकाम रहा?
IPMS से पहले निगम में WMS (वर्क मैनेजमेंट सिस्टम) चलता था। WMS की सीमाएं: सिर्फ एस्टीमेट, DPR और बिलिंग तक सीमित,पूरी प्रोजेक्ट तस्वीर नहीं दिखती थी, निगरानी कमजोर रहती थी,खामियां आसानी से छिप जाती थीं।
IPMS 2.0 में टेंडर प्रक्रिया, विभागीय पत्राचार, आर्किटेक्ट रिपोर्ट, कार्य प्रगति,रनिंग और फाइनल बिल, गुणवत्ता जांच सब कुछ डिजिटल डैशबोर्ड पर दिखेगा।
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भुगतान पर सख्त नजर
IPMS में साफ दर्ज रहेगा अब तक कितना भुगतान हुआ कितना भुगतान बाकी है। इससे एडवांस पेमेंट,अनियमित भुगतान, बिलिंग गड़बड़ियों पर रोक लगने की उम्मीद है।
इंजीनियर-ठेकेदार गठजोड़ पर ब्रेक?
अब तक आरोप लगते रहे हैं कि इंजीनियर और ठेकेदारों की मिलीभगत से घटिया काम पास कराया गया। IPMS में हर एंट्री सिस्टम में दर्ज होगी। इससे मनमानी की गुंजाइश कम होगी। IPMS 2.0 के तीन मजबूत स्तंभ WMS वर्क मैनेजमेंट सिस्टम काम की प्लानिंग और प्रगति की निगरानी CMS
कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट सिस्टम
टेंडर, अनुबंध और शर्तों पर नियंत्रण QMS क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टमनिर्माण गुणवत्ता की डिजिटल जांच। अजय श्रीवास्तव ने कहा कि IPMS ऐप से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर प्रभावी नियंत्रण होगा। वर्क, कॉन्ट्रैक्ट और क्वालिटी तीनों सिस्टम एक साथ कंट्रोल में रहेंगे। क्वालिटी मैनेजमेंट अब पहले से ज्यादा सख्त और शार्प होगा।
क्यों जरूरी था IPMS?
बार-बार गुणवत्ता पर सवाल, अफसर-इंजीनियर गठजोड़ के आरोप ,डिजिटल निगरानी का अभाव, विभाग और एजेंसी की साख पर असर।
देर से सही, लेकिन जरूरी फैसला
यह सिस्टम अगर सालों पहले लागू होता,तो शायद कई विवाद और सवाल पैदा ही नहीं होते। IPMS 2.0 को एक सुधारात्मक पहल माना जा रहा है,लेकिन इसकी असली परीक्षा यही होगी। क्या इसे ईमानदारी और सख्ती से लागू किया जाता है या नहीं।
असली सवाल-
- क्या सिस्टम जमीन पर काम करेगा?
- क्या पुराने भ्रष्ट तरीकों पर सच में रोक लगेगी?
- या IPMS भी सिर्फ एक और सरकारी ऐप बनकर रह जाएगा?
IPMS 2.0 से पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन जवाब सिस्टम नहीं, उसके ईमानदार इस्तेमाल से मिलेगा।
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