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कहा जाता है कि दिल की बात सुनने के लिए पहले दिल को समझना और उससे जुड़ना सीखना पड़ता है। मेरा मानना है कि जब-जब लड़कियों और महिलाओं ने अपने दिल की आवाज सुनी है और पूरे विश्वास के साथ कोई फैसला लिया है, तब-तब उन्होंने असंभव को भी संभव करके दिखाया है।
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महिलाओं के पास है Heart’s Wisdom
महिलाओं को प्रकृति ने विशेष क्षमता दी है। इसे हम अंतर्ज्ञान (Intuition) या Heart’s Wisdom कह सकते हैं। यह वही आंतरिक शक्ति है, जो जीवन के छोटे-छोटे क्षणों से लेकर बड़े और निर्णायक फैसलों तक हमें सही दिशा में मार्गदर्शन देती है।
कई बार ऐसा होता है कि परिस्थितियां बहुत जटिल होती हैं, रास्ते स्पष्ट नहीं होते, लेकिन दिल के भीतर से उठने वाली एक शांत सी आवाज हमें सही निर्णय लेने का साहस देती है, लेकिन इस हृदयगत बोध को जागृत और विकसित करने के लिए नियमित अभ्यास भी उतना ही जरूरी है।
मेडिटेशन से मिली मदद
मेरे जीवन में भी इसका अनुभव कॉलेज के दिनों से ही शुरू हुआ, जब मैंने हार्टफुलनेस मेडिटेशन (Meditation) से हृदय के अभ्यास की शुरुआत की। धीरे-धीरे इस अभ्यास ने मुझे अपने भीतर की गहराइयों को समझने में मदद की। ध्यान केवल एकाग्रता बढ़ाने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमें आंतरिक संतुलन, भावनात्मक स्पष्टता और मानवीय मूल्यों से भी जोड़ता है।
जीवन में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जहां निर्णय लेना आसान नहीं होता...चाहे वह अपने करियर से जुड़ा हो, जीवनसाथी के चुनाव से जुड़ा हो या फिर जीवन की अन्य जिम्मेदारियों से।
दिल से जुड़कर निर्णय लेना सही
मेरे जीवन में भी ऐसे अनेक क्षण आए। पुलिस सेवा जैसी चुनौतीपूर्ण नौकरी में हर दिन नए संघर्ष सामने आते हैं। कई बार ऐसे हालात होते हैं, जहां तुरंत निर्णय लेना पड़ता है और उन निर्णयों का असर बहुत व्यापक होता है। ऐसे समय में अपने दिल से जुड़कर शांत मन से सोचकर निर्णय लेना मेरे लिए हमेशा बहुत सहायक रहा है।
इसी तरह जब जीवन में परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां आईं, तब यह और भी महत्वपूर्ण हो गया कि घर में प्रेम, सद्भाव और सामंजस्य बना रहे। इन सभी परिस्थितियों में हृदय का यह अभ्यास मेरे लिए एक अचूक मार्गदर्शक साबित हुआ है।
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हर पल को खुशी से जीना ही सफलता
आज जब जीवन में अनेक जिम्मेदारियां हैं और दिन बहुत व्यस्तता से भरे होते हैं, तब भी मैं अपने भीतर अद्भुत शांति, उत्साह, खुशी और संतुलन का अनुभव करती हूं। मेरे लिए जीवन की वास्तविक सफलता यही है कि हम हर पल को प्रसन्नता, संतुलन और पूर्णता के साथ जी सकें।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मैं सभी महिलाओं और बेटियों से यही कहना चाहूंगी कि अपने दिल की आवाज सुनना सीखिए। अपने आप को जानने और समझने के लिए थोड़ा समय अवश्य निकालिए।
जब एक बार आपके हृदय से कोई सच्ची प्रेरणा मिले तो पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ जाइए। जीवन में कुछ भी असंभव नहीं होता। बस जरूरत है, अपने प्रति सच्चे और ईमानदार रहने की और अपने भीतर की शक्ति पर विश्वास करने की। क्योंकि जब एक महिला अपने दिल की आवाज को पहचान लेती है, तब उसकी उड़ान को कोई सीमा रोक नहीं सकती।
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