मध्यावधि 2026: जबलपुर संभाग में जनता का मूड साफ, सर्वे में दिखी कांटे की टक्कर
The Sootr | Jun 15, 2026, 15:20 IST
जबलपुर संभाग
जबलपुर संभाग: 13 जून 2026 को मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार का आधा सफर पूरा हो गया। ढाई साल बीत गए। अब उल्टी गिनती शुरू है। और ठीक इसी दौरान thesootr लेकर आया है मध्यप्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा और विश्वसनीय सर्वे…
मध्यप्रदेश की हर विधानसभा से डेटा लेकर तैयार किए गए इस सर्वे में जानिए...जबलपुर संभाग के लोगों के मन की बात… और हां! ये सर्वे किसी तरह की घोषणा नहीं करता सिर्फ प्राप्त आंकड़ों से परसेप्शन बताता है।
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जबलपुर संभाग में विधायक संतुष्टि का औसत 56.4% है। सरकार संतुष्टि का औसत 51.4% है। कांग्रेस सक्रियता का औसत 53.7% रहा। तीनों आंकड़े आपस में बहुत करीब हैं। इंदौर संभाग में विधायक और सरकार के बीच 8 अंक का फासला था। जबलपुर में यह फासला सिर्फ 5 अंक है। यहां मुकाबला ज्यादा कांटे का है। न तो सत्तापक्ष की एकतरफा बढ़त है, न विपक्ष की।
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संभाग में 12 सीटों पर विधायक संतुष्टि 53% से नीचे है। यह स्थानीय असंतोष की तरफ इशारा करता है। सबसे ऊंची संतुष्टि बड़वारा सीट पर है। यहां बीजेपी विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह को 69.7% समर्थन मिला। बिछिया सीट दूसरे नंबर पर है। यहां कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पड्डा को 68.4% समर्थन मिला। निवास सीट तीसरे नंबर पर है, यहां चैन सिंह बरकड़े को 66% समर्थन मिला। सबसे कम संतुष्टि मुड़वारा सीट पर है। यहां बीजेपी विधायक संदीप जायसवाल को सिर्फ 38.5% समर्थन मिला। यह पूरे संभाग में सबसे कम है।
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सरकार संतुष्टि का औसत बहुमत रेखा से थोड़ा ऊपर है। लेकिन 13 सीटों पर यह आंकड़ा 48% से नीचे है। यानी एक तिहाई से ज्यादा सीटों पर सरकार की छवि कमजोर है। सबसे ऊंची सरकार संतुष्टि बरगी सीट पर है। यहां बीजेपी विधायक नीरज सिंह ठाकुर को 69.8% समर्थन मिला। यह पूरे संभाग का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। सबसे कम सरकार संतुष्टि चौरई सीट पर है। यहां कांग्रेस विधायक सुजीत मेरसिंह की सीट पर सिर्फ 35.8% लोग संतुष्ट हैं। छिंदवाड़ा सीट पर भी सरकार संतुष्टि सिर्फ 41.6% है।
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संभाग में 11 सीटों पर 58% से ज्यादा लोग कांग्रेस को सक्रिय मानते हैं। आदिवासी इलाकों में यह धारणा सबसे मजबूत है। बिछिया सीट पर कांग्रेस सक्रियता 69.7% दर्ज हुई, जो सबसे ज्यादा है। छिंदवाड़ा सीट पर भी यह आंकड़ा 65.8% तक पहुंच गया। सबसे कम कांग्रेस सक्रियता नरसिंहपुर सीट पर है, सिर्फ 38% लोग कांग्रेस को सक्रिय मानते हैं। यह बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। दलवार आंकड़े भी दिलचस्प हैं। कांग्रेस विधायकों वाली सीटों पर विधायक संतुष्टि 56.8% है, जो बीजेपी सीटों से ज्यादा है। लेकिन बीजेपी सीटों पर सरकार संतुष्टि 52.7% है, जो कांग्रेस सीटों से ज्यादा है।
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जबलपुर जिले में आठ सीटें हैं। यहां सात सीटें बीजेपी के पास हैं। जिला औसत में विधायक संतुष्टि 56.1% और सरकार संतुष्टि 54.6% है। पाटन और जबलपुर छावनी सीटें विधायक संतुष्टि में आगे हैं। लेकिन जबलपुर उत्तर सीट सबसे चिंताजनक है। यहां विधायक और सरकार दोनों संतुष्टि सिर्फ 43.2% पर है। छिंदवाड़ा जिले में सात सीटें हैं। यहां छह सीटें कांग्रेस के पास हैं। जिला औसत में सरकार संतुष्टि सिर्फ 47.4% है, जो संभाग में सबसे कम है। छिंदवाड़ा सीट पर कांग्रेस नेता कमलनाथ को विधायक स्तर पर 63.1% समर्थन मिला। लेकिन यहां सरकार संतुष्टि सिर्फ 41.6% है। जुन्नारदेव सीट पर विधायक संतुष्टि सबसे कम, सिर्फ 44.3% दर्ज हुई।
बालाघाट जिले में छह सीटें हैं। यहां विधायक संतुष्टि का औसत 53% है। परसवाड़ा और लांजी सीटें मजबूत मानी जा रही हैं। कटंगी और वारासिवनी सीटों पर विधायक संतुष्टि सबसे कम, करीब 42% है। कटनी जिले में चार सीटें हैं, सभी बीजेपी के पास हैं। बड़वारा सीट तीनों मानकों में सबसे मजबूत है। यहां विधायक संतुष्टि 69.7%, सरकार संतुष्टि 67% और कांग्रेस सक्रियता 62.1% है। लेकिन मुड़वारा सीट पूरे संभाग में सबसे कमजोर है। यहां विधायक संतुष्टि सिर्फ 38.5% है। बहोरीबंद सीट पर सरकार संतुष्टि भी सिर्फ 39.5% है।
नरसिंहपुर जिले में चार सीटें हैं, सभी बीजेपी के पास हैं। यह जिला सत्तापक्ष के लिए सबसे अनुकूल है। यहां कांग्रेस सक्रियता सबसे कम, सिर्फ 45% है। नरसिंहपुर सीट पर प्रहलाद सिंह पटेल को 64.7% समर्थन मिला। यहां कांग्रेस सक्रियता सिर्फ 38% है, जो संभाग में सबसे कम है। तेंदूखेड़ा सीट पर विधायक संतुष्टि कमजोर, सिर्फ 45.7% है। सिवनी जिले में चार सीटें हैं। यहां विधायक छवि अच्छी है, पर सरकार छवि नरम है। केवलारी सीट सबसे संतुलित मानी जा रही है। यहां विधायक संतुष्टि 61.1% और सरकार संतुष्टि 54.3% है। सिवनी सीट जिले में सबसे कमजोर है, विधायक संतुष्टि सिर्फ 50% है।
मंडला जिले में तीन सीटें हैं। यह जिला विधायक संतुष्टि में संभाग का सबसे मजबूत जिला है, औसत 62.1%। बिछिया सीट तीनों मानकों में शीर्ष पर है। मंडला सीट पर विधायक संतुष्टि 52% और सरकार संतुष्टि 48% है, यह संतुलित मानी जा रही है। डिंडौरी जिले में दो सीटें हैं, एक बीजेपी और एक कांग्रेस के पास। यहां विधायक और सरकार संतुष्टि लगभग बराबर है। डिंडोरी सीट पर कांग्रेस सक्रियता 60.4% है। शहपुरा सीट पर सरकार संतुष्टि बेहतर, 56.6% है।
सर्वे का निचोड़ साफ है। जबलपुर संभाग दोनों दलों के लिए कड़े मुकाबले वाला है। नरसिंहपुर और जबलपुर शहर सत्तापक्ष के मजबूत बिंदु हैं। छिंदवाड़ा-बालाघाट बेल्ट विपक्ष के लिए अनुकूल है। 13 सीटों पर सरकार संतुष्टि कमजोर है, इन पर तत्काल ध्यान चाहिए। मुड़वारा, बहोरीबंद और चौरई जैसी सीटें सबसे ज्यादा चिंता की हैं।
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हमने पूछे सिर्फ तीन सवाल
- क्या आप अपने विधायक से संतुष्ट हैं?
- BJP और डॉ. मोहन यादव की सरकार से संतुष्ट हैं या नहीं?
- क्या कांग्रेस प्रदेश में active दिखती है?
तो पहली बार हर नागरिक जान सकेगा
- उसके अपने जिले का मूड क्या है
- उसके विधायक को जनता पास करती है या फेल
- मोहन यादव सरकार के बारे में उसके इलाके की राय क्या है
- कांग्रेस जनता को active दिखती है या नहीं
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मध्यावधि 2026: जबलपुर संभाग thesootr Survey
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विधायक संतुष्टि का हाल
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सरकार छवि सबसे कमजोर कड़ी
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कांग्रेस सक्रियता का ट्रेंड
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जबलपुर-छिंदवाड़ा का हाल
बालाघाट-कटनी की तस्वीर
नरसिंहपुर-सिवनी का हाल
मंडला-डिंडौरी की झलक
आगे क्या जरूरी
FAQ
- सवाल: जबलपुर संभाग सर्वे में सबसे ज्यादा विधायक संतुष्टि किस सीट पर मिली?
जवाब: बड़वारा सीट पर बीजेपी विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह को 69.7% समर्थन मिला, जो पूरे संभाग में सबसे ज्यादा है। इसके बाद बिछिया (68.4%) और निवास (66%) का नंबर आता है। - सवाल: जबलपुर संभाग में सरकार से सबसे कम संतुष्ट जनता किस सीट पर है?
जवाब: चौरई सीट पर सरकार संतुष्टि सिर्फ 35.8% है, जो पूरे संभाग में सबसे कम है। यह कांग्रेस विधायक सुजीत मेरसिंह की सीट है। छिंदवाड़ा सीट पर भी यह आंकड़ा सिर्फ 41.6% है। - सवाल: जबलपुर संभाग में कांग्रेस की सक्रियता सबसे ज्यादा कहां है?
जवाब: बिछिया सीट पर कांग्रेस सक्रियता 69.7% दर्ज हुई, जो संभाग में सबसे ज्यादा है। इसके बाद छिंदवाड़ा (65.8%) और अमरवाड़ा (63.5%) का नंबर आता है।
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