मेडिकल अस्पताल पर ऑर्गन ट्रैफिकिंग का बड़ा आरोप, पति की मौत के बाद पत्नी पहुंची कोर्ट

Neel Tiwari | Sootr Creatives | Oct 08, 2026, 15:53 IST
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जबलपुर के सरकारी अस्पताल पर ऑर्गन ट्रैफिकिंग का मामला आया सामने
जबलपुर के सरकारी अस्पताल पर ऑर्गन ट्रैफिकिंग का मामला आया सामने

जबलपुर के मेडिकल अस्पताल में पति की संदिग्ध मौत को लेकर पत्नी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। परिवाद में अस्पताल रिकॉर्ड, शव की पहचान और अंतिम निपटान पर सवाल उठाते हुए अंग/ऊतक (टिश्यू) निकालने की आशंका की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। जानें क्या है पूरा मामला...

पति को लेकर अस्पताल पहुंची थी पत्नी, फिर रिकॉर्ड में बन गया ‘अज्ञात’

जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से जुड़ा मामला कोर्ट पहुंच गया है।लालमाटी की प्रीति विश्वकर्मा ने पति किशोर विश्वकर्मा की मौत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट पंकज सविता की कोर्ट में परिवाद दायर किया है।

परिवाद में इलाज और पुलिस रिकॉर्ड के बीच विरोधाभास का आरोप लगाया गया है। सबसे गंभीर सवाल शव की पहचान, संरक्षण और अंतिम निपटान को लेकर है। प्रीति ने शरीर के अंग या ऊतक निकाले जाने की भी आशंका जताई है।

उन्होंने किसी संभावित अनधिकृत कार्रवाई की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है।

12 अगस्त को पति को लेकर पहुंची थी मेडिकल

परिवाद के मुताबिक 12 अगस्त 2025 की सुबह करीब 9:52 बजे प्रीति अस्पताल पहुंचीं। वह अपने पति किशोर को इलाज के लिए मेडिकल अस्पताल लेकर आई थीं। ओपीडी में डॉक्टर ने किशोर की जांच की और ECG और सोनोग्राफी टेस्ट बताए। करीब दो बजे किशोर की ECG जांच अस्पताल में कराई गई।

इसके साथ सोनोग्राफी से जुड़ी प्रक्रिया भी अस्पताल में पूरी हुई। शाम करीब चार बजे प्रीति पति को इमरजेंसी कैजुअल्टी लेकर पहुंचीं। वहां पर्ची बनाई गई और रजिस्टर में भी एंट्री की गई। इसके बाद RMO के हस्ताक्षर कराने के लिए उन्हें भेजा गया।

पांच बजे लौटी तो पति कैजुअल्टी से गायब

परिवाद के मुताबिक, प्रीति RMO के हस्ताक्षर कराने गईं, लेकिन वह नहीं मिले। करीब 5 बजे वह इमरजेंसी लौटीं तो किशोर वहां मौजूद नहीं थे। प्रीति को लगा कि अस्पताल ने उनके पति को भर्ती कर लिया है।
इसी भरोसे में वह बच्चों को देखने के लिए घर चली गईं। अगले दिन 13 अगस्त को वह बच्चों के साथ अस्पताल पहुंचीं। वहां भी उन्हें पति के बारे में कोई साफ जानकारी नहीं मिली।
इसके बाद 14 अगस्त को भी किशोर की तलाश जारी रही।

आधी रात स्ट्रेचर पर दिखे पति, रोकने का आरोप

परिवाद का सबसे अहम हिस्सा 14 अगस्त की रात से जुड़ा है। प्रीति के मुताबिक रात करीब 12 बजे वह अस्पताल परिसर में थीं। तभी उन्होंने एक वार्ड बॉय को स्ट्रेचर ले जाते देखा। स्ट्रेचर पर लेटे व्यक्ति को उन्होंने अपने पति किशोर के रूप में पहचाना। प्रीति का कहना है कि वहां दो लड़कियां और एक पुरुष मौजूद थे। उन्होंने अपने पति किशोर के पास जाने की कोशिश भी की। प्रीति का आरोप है कि उन्हें वहां जाने से रोका गया। उनके साथ अभद्रता और गाली-गलौज किए जाने का भी आरोप है।

पुलिस रिकॉर्ड में ‘गोलकुंडा से आया अज्ञात व्यक्ति’

परिवाद में अस्पताल और पुलिस रिकॉर्ड को लेकर बड़ा सवाल उठाया गया है। मर्ग क्रमांक 71/2025 के मुताबिक 13 अगस्त को अज्ञात व्यक्ति कैजुअल्टी लाया गया। रिकॉर्ड में उस अज्ञात व्यक्ति की उम्र करीब 60 साल बताई गई है।

रिकॉर्ड में वार्ड बॉय विवेक सेन द्वारा उसे लाने की बात दर्ज है। कथित तौर पर वह कैजुअल्टी के सामने बने ‘गोलकुंडा’ से लाया गया था। रिकॉर्ड में करीब 11:30 बजे उसे अस्पताल में भर्ती कराना दर्ज है।

इलाज के दौरान करीब 1:30 बजे उसकी मौत होने की बात दर्ज है। प्रीति का दावा है कि वह खुद पति को 12 अगस्त अस्पताल लाई थीं। अब यही विरोधाभास जांच के लिए सबसे बड़ा आधार बन गया है।

पत्नी को मौत की सूचना क्यों नहीं मिली?

परिवादिनी ने पूछा कि किशोर 13 अगस्त को अस्पताल में भर्ती थे। अगर उनकी मौत हो गई थी तो परिवार को सूचना क्यों नहीं मिली। प्रीति लगातार अस्पताल में अपने पति किशोर को तलाशती रही थीं।
इसके बावजूद उन्हें पति की मौत की जानकारी नहीं दी गई। बाद में पुलिस जांच और न्यायिक कार्रवाई में उन्हें इसकी जानकारी मिली। परिवाद में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।

मौत से लेकर पोस्टमार्टम तक रिकॉर्ड जांच के घेरे में

प्रीति के मुताबिक बाद में उन्हें बताया गया कि किशोर का पोस्टमार्टम हुआ। उन्हें बताया गया कि फेफड़ों में संक्रमण से किशोर की मौत हुई। परिवाद में इलाज, मेडिकल हिस्ट्री, दवाओं और उपचार रिकॉर्ड की जांच मांगी गई।

साथ ही वाइटल चार्ट और मौत के वास्तविक कारण की विशेषज्ञ जांच मांगी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा, स्लाइड और सुरक्षित नमूने कोर्ट से तलब करने की मांग है। शव की तस्वीरें और पहचान से जुड़े दस्तावेज भी तलब करने की मांग है।

‘अंग निकालने’ की आशंका, जांच की मांग

परिवाद का गंभीर आरोप शरीर के अंग या ऊतक (टिश्यू) की आशंका से जुड़ा है। प्रीति ने शव की पहचान, संरक्षण और अंतिम निपटान में अनियमितता की आशंका जताई। उन्होंने शव से अंग बेचे जाने की आशंका भी परिवाद में जताई है।

हालांकि परिवाद में साफ कहा गया है कि यह कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं है। आशंका की पुष्टि या खंडन फॉरेंसिक और मेडिकल जांच से कराने की मांग है।

CCTV और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से खुलेगा घटनाक्रम?

परिवाद में 12 से 14 अगस्त 2025 के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है। इनमें ओपीडी, ECG, सोनोग्राफी, कैजुअल्टी, प्रवेश-निकास, वार्ड और मॉर्चरी के कैमरे शामिल हैं।

DVR, NVR, सर्वर, कंप्यूटर लॉग और पेशेंट रजिस्ट्रेशन की फॉरेंसिक जांच मांगी गई है। इसके साथ ऑडिट ट्रेल और एक्सेस लॉग की जांच की भी मांग है। परिवादिनी का कहना है कि तकनीकी जांच से रिकॉर्ड में बदलाव, डिलीट या छेड़छाड़ का पता चल सकती है।

पाली मेडिकल कॉलेज का अनोखा फैसला: नए MBBS बैच के आते ही सीनियर्स को 15 दिन की छुट्टी, रैगिंग रोकने का अनूठा तरीका | Pali Medical College's Unique Decision: Seniors Get 15 Days Leave Upon New MBBS Batch Arrival, A Novel Way to Prevent Ragging
पाली मेडिकल कॉलेज का अनोखा फैसला, नए MBBS बैच के आते ही सीनियर्स की 15 दिन छुट्टी
07 Oct 2026 ,
By Saurabh Mishra
पाली के महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज ने नए एमबीबीएस छात्रों को सुरक्षित माहौल देने के लिए सीनियर्स को 15 दिन के लिए कैंपस से दूर रखा है। यह कदम नए छात्रों को रैगिंग से मुक्त माहौल में कॉलेज और हॉस्टल की जिंदगी में ढालने के लिए उठाया गया है। सीनियर छात्रों की थ्योरी की क्लास ऑनलाइन जारी रहेगी, लेकिन उन्हें हॉस्टल में रहने की अनुमति नहीं होगी।
पाली के महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज ने नए एमबीबीएस छात्रों को सुरक्षित माहौल देने के लिए सीनियर्स को 15 दिन के लिए कैंपस से दूर रखा है। यह कदम नए छात्रों को रैगिंग से मुक्त माहौल में कॉलेज और हॉस्टल की जिंदगी में ढालने के लिए उठाया गया है। सीनियर छात्रों की थ्योरी की क्लास ऑनलाइन जारी रहेगी, लेकिन उन्हें हॉस्टल में रहने की अनुमति नहीं होगी।

मर्ग, गुम इंसान रिपोर्ट और हाई कोर्ट की कार्रवाई भी जांच में आएगी

पति की तलाश में प्रीति ने सबसे पहले पुलिस से संपर्क किया। परिवाद के मुताबिक सितंबर 2025 में गढ़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई। यह रिपोर्ट प्रीति के पति के गुम होने से जुड़ी हुई थी। पति की तलाश और स्थिति जानने हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई। यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पति की जानकारी के लिए लगाई गई थी। अब परिवाद में मर्ग क्रमांक 71/2025 की पूरी डायरी मांगी गई है।

साथ ही गुम इंसान की जांच से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं। हाई कोर्ट में पुलिस की रिपोर्ट भी कोर्ट से तलब करने की मांग है। इसके अलावा मामले से जुड़े दूसरे दस्तावेज भी मंगाने की मांग की गई।

13 नवंबर को कोर्ट में बयान, इसके बाद आगे बढ़ेगा मामला

यह परिवाद अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट पंकज सविता की कोर्ट में दायर है। मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को कोर्ट में की जाएगी। इस दौरान परिवादिनी प्रीति विश्वकर्मा के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

उनकी तरफ से अधिवक्ता विवेक तिवारी कोर्ट में पक्ष रख रहे हैं। परिवाद में डॉक्टर प्रतीक्षा और वार्ड बॉय कृष्णा की भूमिका जांचने की मांग है। वार्ड बॉय विवेक सेन समेत अस्पताल अधिकारियों की भूमिका भी जांचने की मांग है। प्रशासन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है।

कोर्ट से स्वतंत्र जांच और जरूरत पड़ने पर शव निकालने की मांग

आवेदिका प्रीति ने कोर्ट से मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र मजिस्ट्रियल जांच मांगी है। यह मांग BNSS की धारा 196 के तहत कोर्ट में रखी गई है। जरूरत पड़ने पर दफन शव को विधि अनुसार बाहर निकालने की मांग की है।

इसके बाद स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड और फॉरेंसिक विशेषज्ञों से जांच कराई जाए। मेडिकल कर्मचारी की लापरवाही या रिकॉर्ड में हेरफेर साबित होने पर कार्रवाई हो। साक्ष्य छिपाने या गलत जानकारी की पुष्टि पर संबंधित धाराओं में कार्रवाई हो।

अब सवाल सिर्फ मौत का नहीं, पूरे रिकॉर्ड का है

इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक जांच अभी होना बाकी है। कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल किशोर विश्वकर्मा के अस्पताल पहुंचने का होगा। यह भी देखा जाएगा कि वे अस्पताल कब और किस हालत में पहुंचे।

अस्पताल में उन्हें किस नाम और पहचान से दर्ज किया गया था। उनकी मौत कब हुई और पत्नी को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। इसके साथ शव की पहचान, पोस्टमार्टम और अंतिम निपटान की प्रक्रिया भी जांच में रहेगी।

ऑर्गन ट्रैफिकिंग की आशंका सही है या नहीं, यह जांच से साफ होगा। इसका जवाब रिकॉर्ड, फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर मिलेगा।

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