छोटे शहरों में बढ़ रही नौकरी की मांग, टियर 2-3 शहरों में 40% बढ़ी प्लेसमेंट, जानें इसका कारण

Aman Vaishnav | Jan 25, 2026, 11:54 IST
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jobs growth tier 2 tier 3 cities india 128 crore opportunities
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भारत में अब नौकरियों की सबसे ज्यादा मांग मेट्रो सिटीज के बाहर के शहरों में देखने को मिल रही है। इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद, कोच्चि और चंडीगढ़ जैसे शहरों में भर्ती की रफ्तार 20% तक पहुंच गई है। मेट्रो सिटीज में ये आंकड़ा महज 14% ही रहा।

News In Short

  • मेट्रो सिटी की तुलना में छोटे शहरों में नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
  • साल 2026 में 1.28 करोड़ नई नौकरियों का अनुमान है।
  • एआई और तकनीकी क्षेत्रों में नौकरियों के नए अवसर मिल रहे हैं।
  • छोटे शहरों में हायरिंग बढ़ने से कम खर्च में ज्यादा टैलेंट मिल रहा है।
  • कंपनियां अब छोटे शहरों में अपने हेडक्वार्टर स्थापित कर रही हैं।

News In Detail

छोटे शहरों में बढ़ रही नौकरियों की मांग

भारत में अब नौकरियों की सबसे ज्यादा मांग मेट्रो सिटीज के बाहर के शहरों में देखने को मिल रही है। इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद, कोच्चि और चंडीगढ़ जैसे शहरों में भर्ती की रफ्तार 20% तक पहुंच गई है। मेट्रो सिटीज में ये आंकड़ा 14% ही रहा। लीडिंग जॉब्स और टैलेंट प्लेटफॉर्म फाउंडइट के अनुसार, इस साल छोटे शहरों में 1.28 करोड़ नई नौकरियों का अनुमान है।

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काम में पिछड़े मेट्रो शहर वाले

अपग्रेड रिक्रूट की रिपोर्ट के अनुसार कंपनियां अब छोटे शहरों में रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर बना रही हैं। एआई और बेहतर स्थिरता के कारण यह और भी ज्यादा आसान हो गया है। 2027 तक एआई से जुड़े टेक रोल्स की संख्या 20% से बढ़कर 32% तक पहुंचने का अनुमान है।

इसके अलावा, 79% एचआर लीडर्स का मानना है कि छोटे शहरों में काम करने वाले लोग मेट्रो शहरों में काम करने वाले लोगों की तुलना में काम में बेहतर तरीके से टिके रहते हैं।

क्षेत्रटैलेंट की स्थितिएआई एक्सपोजर (अनुमानित 2027)
मेट्रो शहरयहां कर्मचारी जल्दी नौकरी बदलते हैं (High Attrition)।उच्च, लेकिन अब सैचुरेशन की ओर।
छोटे शहर79% एचआर मानते हैं कि यहां लोग लंबे समय तक टिकते हैं।रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर के जरिए तेजी से बढ़ रहा है।

छोटे शहरों में बढ़ेगी टेक जॉब्स

2024 में कुछ खास शहरों में टेक कंपनियों में काम करने वाले लोगों की संख्या 12% थी। ये बढ़कर 2027 तक 19.7% तक पहुंच सकती है। कंपनियां इन शहरों में इंजीनियरिंग, सपोर्ट, डेटा एनालिटिक्स और बैकएंड ऑपरेशंस जैसे कामों को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं। इससे यहां के लोगों को नए रोजगारऔर स्किल डेवलपमेंट के मौके मिल रहे हैं।

कंपनियां टियर-2 में क्यों जा रही हैं?

कंपनियां अब कम खर्च और ज्यादा टैलेंट के लिए टियर-2 शहरों में अपने हेडक्वार्टर बना रही हैं। इससे नौकरी के अवसर अब बड़े शहरों के बाहर भी बढ़ रहे हैं। बड़े शहरों में लोग जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते हैं, जबकि छोटे शहरों में लोग लंबे समय तक रहते हैं। अपग्रेड रिक्रूट ने बताया कि टियर-2 और 3 शहरों से आने वाले प्लेसमेंट में 40% का इजाफा हुआ है।

AI जॉब्स में 40% बढ़ोतरी

पिछले एक साल में, यहां एआई इंजीनियर्स, डेटा एनालिस्ट और ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट की डिमांड में 40% की बढ़ोतरी हुई है। खासकर बीएफएसआई, आईटी सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हुई है। अब अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी, कोयंबटूर, कोच्चि, इंदौर और लखनऊ जैसे शहर एआई-संबंधित हायरिंग का एक चौथाई हिस्सा बन गए हैं।

जानें छोटे शहर क्यों बन रहे जॉब हब ?

  • राज्य सरकारें अब छोटे शहरों को खास ध्यान में रखकर नीतियां बना रही हैं। दरअसल, इन शहरों में काम करने की लागत टियर-1 शहरों के मुकाबले 10% से 35% तक कम है।
  • तमिलनाडु, कर्नाटक और कुछ राज्यों की नीतियों के बाद बड़ी कंपनियां छोटे शहरों में भी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) बढ़ा रही हैं। बेंगलुरु और चेन्नई के अलावा, ये सेंटर्स अब अन्य शहरों में भी स्थापित हो रहे हैं।
  • इंडस्ट्री के हिसाब से विदेशी कंपनियां 2030 तक भारत में 9.6 लाख करोड़ रुपए निवेश कर सकती हैं।
  • भारत में 1,500 से ज्यादा जीसीसी से 13 लाख नौकरियां बनी हैं। 2026 तक 500 नए जीसीसी जुड़ने की उम्मीद है।
  • विशाखापट्‌टनम, कोयंबटूर, जयपुर, वडोदरा, कोच्चि और चंडीगढ़ में पहले से जीसीसी हैं। ये फाइनेंस, एचआर, सप्लाई चेन, इंजीनियरिंग, आरएंडडी, डिजिटल क्लाउड जैसी सेवाएं देते हैं।
  • टियर-2 शहरों में टैलेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर की कम लागत, कुल ऑपरेशनल खर्च (टीसीओ) को घटाती है, जो टियर-1 शहरों की तुलना में 10%-35% तक कम बताई जा रही है।
  • महिलाओं के लिए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण है। 65% महिला टेक प्रोफेशनल्स घर के पास के छोटे शहरों में काम करना पसंद करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 41% है।
  • फिनटेक, हेल्थ-टेक और एआई-फर्स्ट वेंचर्स में फंडिंग बढ़ने के कारण प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग, ग्रोथ और रेवेन्यू रोल्स में भर्ती होने की संभावना है।
  • नैसकॉम और डेलॉय की इमर्जिंग टेक हब्स रिपोर्ट के मुताबिक, जयपुर, इंदौर, कोयंबटूर, अहमदाबाद और 26 दूसरे शहर अब टेक्नोलॉजी हब बन चुके हैं।

Sootr Knowladge

जानिए टियर शहर क्या होते हैं।

श्रेणीजनसंख्या (RBI मानदंड)विकास का स्तरउदाहरणविशेषताएं
टियर 11 लाख और इससे ज्यादाअत्यधिक विकसित (मेट्रो)दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, चेन्नई, कोलकाताअत्यधिक विकसित शहर, सभी सुविधाएं उपलब्ध
टियर 250 हजार - 1 लाख के बीचतेजी से उभरते केंद्रभोपाल, जयपुर, लखनऊ, सूरत, कोच्चि, अमृतसरबुनियादी ढांचा विकसित हो रहा, सस्ती रहने की लागत
टियर 320 हजार - 50 हजार के बीचमध्यम शहरी विकासमदुरै, नासिक, ग्वालियर, उदयपुर, झांसी, कटकधीरे-धीरे विकास, किफायती आवास, प्रारंभिक व्यापारिक बाजार
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