VIP दर्शन टिकट से उज्जैन का काल भैरव मंदिर मालामाल, 45 दिन में 3.09 करोड़ कमाई
Sanjay Dhiman | Jul 05, 2026, 18:24 IST
Photograph: (the sootr)
उज्जैन के काल भैरव मंदिर में ₹500 की वीआईपी टिकट से 45 दिनों में ₹3.09 करोड़ की बंपर कमाई हुई है। महाकाल के बाद यहाँ सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ रही है।
उज्जैन के काल भैरव मंदिर में वीआईपी दर्शन टिकट व्यवस्था शुरू हुई है। यह टिकट 500 रुपए का है। 20 मई से 3 जुलाई के बीच इससे 3.09 करोड़ रुपए की आय हुई। महाकालेश्वर मंदिर के बाद यहीं सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। भीड़ बढ़ने पर टिकट वितरण कई बार रोकना भी पड़ता है।
उज्जैन का काल भैरव मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास स्थान है। महाकालेश्वर मंदिर के बाद यहीं सबसे अधिक भीड़ जुटती है। रोज बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने एक नया कदम उठाया। श्रद्धालुओं को जल्दी दर्शन कराने के लिए वीआईपी दर्शन टिकट शुरू किया गया।
यह टिकट 500 रुपए का रखा गया है। इससे श्रद्धालु अलग रास्ते से मंदिर में प्रवेश करते हैं। इस वजह से सामान्य दर्शन करने वालों को दिक्कत नहीं होती। दोनों तरह के दर्शन एक साथ आराम से चलते हैं।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार 20 मई से 3 जुलाई के बीच बड़ी रकम जुटी। इस अवधि में शीघ्र दर्शन टिकटों से 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपए की आय हुई। यह आंकड़ा मंदिर प्रबंधन ने खुद जारी किया है।
खास बात यह है कि जिन दिनों भीड़ के कारण टिकट रोकना पड़ा, उन दिनों की गिनती इसमें नहीं है। यानी असल आय इससे भी ज्यादा हो सकती थी। मंदिर प्रबंधक संध्या मार्कंडेय ने इसकी पुष्टि की है।
सामान्य दिनों में शीघ्र दर्शन टिकटों से रोज 4 से 5 लाख रुपए की आय होती है। जब भीड़ ज्यादा होती है तो यह आंकड़ा 10 से 11 लाख रुपए तक पहुंच जाता है।
आय पूरी तरह श्रद्धालुओं की संख्या पर निर्भर करती है। जितनी ज्यादा भीड़, उतनी ज्यादा कमाई होती है। यह पैटर्न लगभग हर हफ्ते देखने को मिलता है।
मंदिर परिसर की जगह सीमित है। इस वजह से वीआईपी (VIP – Very Important Person) टिकटों की संख्या भी नियंत्रित रखी जाती है। भीड़ अचानक बढ़ने पर टिकट वितरण आधे घंटे के लिए रोकना पड़ता है।
ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि परिसर में धक्का-मुक्की न हो। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। भीड़ नियंत्रण मंदिर प्रबंधन के लिए रोज की चुनौती बन गया है।
शनिवार, रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दिनों में शीघ्र दर्शन टिकटों का वितरण पूरी तरह बंद करना पड़ता है।
पहले छुट्टियों में भी टिकट जारी होते थे। लेकिन भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ने के कारण यह फैसला बदलना पड़ा। अब व्यवस्था बनाए रखना ही प्रबंधन की पहली प्राथमिकता है।
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नई व्यवस्था क्यों शुरू हुई
यह टिकट 500 रुपए का रखा गया है। इससे श्रद्धालु अलग रास्ते से मंदिर में प्रवेश करते हैं। इस वजह से सामान्य दर्शन करने वालों को दिक्कत नहीं होती। दोनों तरह के दर्शन एक साथ आराम से चलते हैं।
45 दिनों में हुई करोड़ों की कमाई
खास बात यह है कि जिन दिनों भीड़ के कारण टिकट रोकना पड़ा, उन दिनों की गिनती इसमें नहीं है। यानी असल आय इससे भी ज्यादा हो सकती थी। मंदिर प्रबंधक संध्या मार्कंडेय ने इसकी पुष्टि की है।
रोज कितनी होती है आय
आय पूरी तरह श्रद्धालुओं की संख्या पर निर्भर करती है। जितनी ज्यादा भीड़, उतनी ज्यादा कमाई होती है। यह पैटर्न लगभग हर हफ्ते देखने को मिलता है।
सीमित जगह बनी है चुनौती
ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि परिसर में धक्का-मुक्की न हो। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। भीड़ नियंत्रण मंदिर प्रबंधन के लिए रोज की चुनौती बन गया है।
छुट्टी के दिन रहती है ज्यादा भीड़
पहले छुट्टियों में भी टिकट जारी होते थे। लेकिन भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ने के कारण यह फैसला बदलना पड़ा। अब व्यवस्था बनाए रखना ही प्रबंधन की पहली प्राथमिकता है।
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