कचरा प्रबंधन ठेके में भ्रष्टाचार, नगर निगम–रामकी गठजोड़ के आरोपों पर HC सख्त

कटनी नगर निगम और हैदराबाद की रामकी कंपनी पर आरोप लगे हैं। कचरा ठेके में फर्जी बिलिंग और नियमों का उल्लंघन हुआ। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और सभी पक्षों को नोटिस दिया है।

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Neel Tiwari
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News In Short

  • कटनी नगर निगम और रामकी कंपनी पर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण ठेके में सांठगांठ और फर्जी बिलिंग के आरोप।
  • पार्षद मिथिलेश जैन ने कोर्ट में अपील दायर की थी। जस्टिस संजीव सचदेवा और विनय सराफ की बेंच ने सुनवाई की।
  • अदालत ने राज्य सरकार और सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया।
  • साल 2015 के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट समझौते की शर्तों: बिल जारी करना, सेग्रीगेशन और कंपैक्टर के उपयोग के उल्लंघन का दावा।
  • कंपनी को बिना बिल दिए ही भुगतान कर दिया गया। यह राशि बाद में प्रॉपर्टी टैक्स में जोड़ दी गई।

News In Detail

कटनी नगर निगम और हैदराबाद की रामकी एनवायरो इंजीनियर्स लिमिटेड के बीच डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण ठेके को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पार्षद मिथिलेश जैन द्वारा लगाए गए फर्जी बिलिंग और नियमों के उल्लंघन के आरोपों को हाईकोर्ट ने गंभीर माना है।

कोर्ट ने राज्य सरकार सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।

2015 के ठेके से जुड़ी शर्तों के उल्लंघन का आरोप

पार्षद मिथिलेश जैन ने एक अपील दायर की है। इसमें 7 मई 2015 के समझौते का जिक्र है। यह समझौता कटनी नगर निगम और रामकी कंपनी के बीच हुआ था। यह रीजनल इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ा है। समझौते के तहत हर घर से कचरा जमा करना अनिवार्य था। नागरिकों को कचरा संग्रहण का बिल भी जारी करना था।

कचरा छोटे वाहनों से सीधे कंपैक्टर में डालना जरूरी था। वहां से कचरा सीधे प्लांट तक पहुंचाया जाना था। कचरे का अनिवार्य रूप से सेग्रीगेशन (बंटवारा) करना तय हुआ था।आरोप है कि कंपनी ने इन शर्तों का पालन नहीं किया। इसके बावजूद नगर निगम ने कंपनी को भुगतान कर दिया।

बिल बिना दिए भुगतान, जनता से वसूली का आरोप

अपील में कहा गया है कि नागरिकों को बिना बिल जारी किए कंपनी को भुगतान हुआ। बाद में वही राशि प्रॉपर्टी टैक्स में जोड़कर जनता से वसूली जा रही है। इसके अलावा लगभग तीन लाख मीट्रिक टन कचरा ऐसी कृषि भूमि पर डंप किए जाने का आरोप है, जो प्लांट के लिए आवंटित ही नहीं थी। इसे मास्टर प्लान का खुला उल्लंघन बताया गया है।

जांच में देरी और एफआईआर न होने पर सवाल

पार्षद की ओर से भी एक आरोप लगाया गया है। इन कथित अनियमितताओं की शिकायत नगर निगम, प्रशासन, पुलिस और ईओडब्ल्यू तक की गई। वर्ष 2023 में शिकायत दर्ज होने के बावजूद न तो प्रारंभिक जांच पूरी हुई और न ही एफआईआर दर्ज की गई। सिंगल बेंच से राहत न मिलने के बाद यह अपील डिवीजन बेंच के समक्ष दाखिल की गई।

तीन गुना भुगतान और वजन बढ़ाकर फर्जीवाड़े का दावा

सुनवाई में अधिवक्ता मुकेश अग्रवाल ने अदालत को अहम जानकारी दी। कंपनी कचरा ढोने वाले वाहनों से निर्माण सामग्री ढो रही है। वजन के आधार पर गलत तरीके से भुगतान लिया जा रहा है। रेलवे और ऑर्डनेंस फैक्ट्री के कचरे को भी उसी स्थल पर डंप कर तीन गुना भुगतान लेने का आरोप लगाया गया है।

याचिका में नगर निगम अधिकारियों और रामकी कंपनी पर केस की मांग की गई है। इसमें आर्थिक अनियमितता और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप है। साथ ही, सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला दर्ज करने की अपील की गई है।

आगे क्या

 हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अब सबकी निगाहें टिकी हैं। सरकार, निगम और रामकी कंपनी को अब जवाब देना है।

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