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भारत सरकार की महत्वाकांक्षी केन बेतवा लिंक परियोजना Ken-Betwa Link Project का उद्देश्य जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत, केन नदी से बेतवा नदी तक 220 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जा रही है। यह योजना देश की पहली रिवर इंटरलिंकिंग परियोजना के रूप में स्थापित की जा रही है, जिस पर 45 हजार करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया है।
टाइगर रिजर्व की कीमत पर विकास- पन्ना के जंगलों की बलि
15 हेक्टेयर जंगल में 3526 पेड़ों की कटाई :
परियोजना के पहले चरण में पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर ज़ोन में स्थित घने जंगल को काटा जा रहा है। अभी तक 15 हेक्टेयर क्षेत्र में लगे 3526 वृक्षों की कटाई हो चुकी है। इनमें शीशम, सागौन, अर्जुन, बहेड़ा, तेंदू, पीपल जैसे बहुमूल्य वृक्ष शामिल हैं।
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6017 हेक्टेयर जंगल, 23 लाख पेड़ों पर खतरा
परियोजना के पूर्ण निर्माण तक लगभग 6017 हेक्टेयर जंगल प्रभावित होगा, जिससे अनुमानित 23 लाख पेड़ समाप्त हो सकते हैं।
मुख्य कटे गए वृक्ष
वृक्ष का नाम महत्ता
सागौन मूल्यवान लकड़ी
शीशम फर्नीचर निर्माण
अर्जुन आयुर्वेदिक औषधियों में उपयोग
पीपल पर्यावरणीय संतुलन में सहायक
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निर्माण की प्रगति- सडक़, कैंप और सुरंग
ढोढऩ बांध का निर्माण
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परियोजना के तहत नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी को 8 वर्षों में ढोढऩ बांध का निर्माण करना है। इस कार्य में 12 किलोमीटर लंबी सुरंग, दो जलविद्युत संयंत्र और बांध की संरचना शामिल है।
खास जानकारी
- कैंप और सडक़ निर्माण से बढ़ा पेड़ों का विनाश
- भुसौर गेट से केन नदी तक 12 किमी लंबी सडक़ चौड़ी की जा रही है।
- सडक़ निर्माण में 10 हेक्टेयर क्षेत्र से 2600 वृक्ष काटे गए।
- कैंप निर्माण के लिए अतिरिक्त 5 हेक्टेयर क्षेत्र से 926 वृक्षों को हटाया गया।
पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति के बाद कटाई
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति प्राप्त कर ही पेड़ों की कटाई की जा रही है। केवल उन्हीं वृक्षों की गणना हो रही है जिनका तना 20 सेमी से अधिक मोटा है, जबकि पतले पेड़ों की गिनती नहीं की जा रही।
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अंतिम निर्णय अभी बाकी
फिलहाल बांध क्षेत्र में आने वाले बाकी वृक्षों को काटा जाएगा या नहीं, यह निर्माण के बाद जलस्तर के अनुसार तय किया जाएगा।
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पर्यावरणीय चिंताएं और स्थानीय विरोध
पर्यावरणविदों का कहना है कि यह परियोजना न केवल टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करेगी, बल्कि जैव विविधता पर भी गंभीर असर डालेगी। स्थानीय समुदायों और वन्यजीव संरक्षक समूहों द्वारा परियोजना के विरोध की संभावना भी जताई जा रही है।
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