किशोर वाधवानी मामले में सेंट्रल एक्साइज विभाग के इंस्पेक्टर से उच्च स्तर के 76 अधिकारियों की नौकरी खतरे में, 40 के हो चुके बयान
Pratibha ranaa | Mar 20, 2024, 14:39 IST
किशोर वाधवानी
द सूत्र के पास मौजूद गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार विभाग ने पाया कि इन्होंने अधिकांश मशीन को ट्रायल रन, खराब जैसे बहाने बताकर उससे गैरकानूनी उत्पादन होने दिया गया।
संजय गुप्ता, INDORE. सिगरेट और गुटखा घोटाले में डायरेक्टोरेट जनलर ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) की रिपोर्ट और गोपनीय प्रतिवेदन के बाद किशोर वाधवानी ( Kishore Wadhwani ) की फैक्टरी एलोरा टौबेको के बाहर ड्यूटी करने वाले सेट्रल एक्साइज के अधिकारियों की नौकरी खतरे में आ गई है। इसमें इंस्पेक्टर से लेकर उनकी हिरार्की के कई उच्च स्तर के अधिकारी है। इनकी संख्या 76 है, जिसमें से 40 के करीब तो समन जारी कर बयान भी विजिलेंस विंग ले चुकी है।
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इसमें फील्ड पोस्टिंग इंस्पेक्टर की प्रमुख भूमिका रही है। इनका काम 2015 के जारी आदेशानुसार फैक्टरी में बन रही सिगेरट की मॉनीटरिंग करना था। द सूत्र के पास मौजूद गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार विभाग ने पाया कि इन्होंने अधिकांश मशीन को ट्रायल रन, खराब जैसे बहाने बताकर उससे गैरकानूनी उत्पादन होने दिया गया। इसके चलते 2022 करोड़ की टैक्स चोरी बनी। डीजीजीआई ने यह गोपनीय रिपोर्ट विजिलेंस को दे दी है, जिसेक बाद 40 अधिकारियों को समन जारी कर बयान भी रिकार्ड कर लिए गए हैं।
द सूत्र के पास रिपोर्ट में 11 अधिकारियों के नाम भी है। इसमें रवि सिहं, कुशल सिंह, भरत बाथम, मंजूर खान, अंकित कुमार, बृजमोहन मीणा, दीपक अग्रवाल, दिनेश काटेकर, विनायक गजभिए, सुरेश रामभद, जितेंद्र कुमार है। इन सभी को समन जारी कर बयान लिए जा चुके हैं।
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समन जारी कर बचान लेने के बाद अब विजिलेंस विंग इन सभी को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया करने जा रही है, जिसमें इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होगी। फिलहाल अधिकारियों ने विजिलेंस विंग को यही बयान दिए हैं कि उन्होंने काम 2015 के आदेशों के अनुसार ही किया है और उनकी कोई गलती नहीं है।
इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वीआर वेंकटरमण ने कोर्ट में साफ कहा कि यह सभी अधिकारियों की मॉनिटरिंग में उत्पादन होता था, लेकिन हमारे विभाग के अधिकारियों के साथ इनकी मिलीभगत थी, दोनों ने मिलकर यह टैक्स चोरी को अंजाम दिया है। इन जिम्मेदार अधिकारयों के खिलाफ विभाग कार्रवाई कर रहा है। अब रही बात बिना दिमाग लगाए और केवल मशीन की उत्पादकता के आधार पर नोटिस की तो यह बताना चाहेंगे कि इसके लिए दो साल तक जांच चली है, 2020 में छापे हुए और नोटिस जून-अगस्त 2022 में किए गए हैं। इस नोटिस के लिए 250 से ज्यादा सक्षम दस्तावेज, प्रमाण मौजूद है, इसके बाद नोटिस जारी हुए हैं।
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इन अधिकारियों ने फैक्टरी के बाहर की थी ड्यूटी
इसमें फील्ड पोस्टिंग इंस्पेक्टर की प्रमुख भूमिका रही है। इनका काम 2015 के जारी आदेशानुसार फैक्टरी में बन रही सिगेरट की मॉनीटरिंग करना था। द सूत्र के पास मौजूद गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार विभाग ने पाया कि इन्होंने अधिकांश मशीन को ट्रायल रन, खराब जैसे बहाने बताकर उससे गैरकानूनी उत्पादन होने दिया गया। इसके चलते 2022 करोड़ की टैक्स चोरी बनी। डीजीजीआई ने यह गोपनीय रिपोर्ट विजिलेंस को दे दी है, जिसेक बाद 40 अधिकारियों को समन जारी कर बयान भी रिकार्ड कर लिए गए हैं।
11 के नाम द सूत्र के पास
द सूत्र के पास रिपोर्ट में 11 अधिकारियों के नाम भी है। इसमें रवि सिहं, कुशल सिंह, भरत बाथम, मंजूर खान, अंकित कुमार, बृजमोहन मीणा, दीपक अग्रवाल, दिनेश काटेकर, विनायक गजभिए, सुरेश रामभद, जितेंद्र कुमार है। इन सभी को समन जारी कर बयान लिए जा चुके हैं।
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अब आगे विभाग नोटिस जारी करने की तैयारी में
समन जारी कर बचान लेने के बाद अब विजिलेंस विंग इन सभी को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया करने जा रही है, जिसमें इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होगी। फिलहाल अधिकारियों ने विजिलेंस विंग को यही बयान दिए हैं कि उन्होंने काम 2015 के आदेशों के अनुसार ही किया है और उनकी कोई गलती नहीं है।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने माना अधिकारी मिले हुए थे
इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वीआर वेंकटरमण ने कोर्ट में साफ कहा कि यह सभी अधिकारियों की मॉनिटरिंग में उत्पादन होता था, लेकिन हमारे विभाग के अधिकारियों के साथ इनकी मिलीभगत थी, दोनों ने मिलकर यह टैक्स चोरी को अंजाम दिया है। इन जिम्मेदार अधिकारयों के खिलाफ विभाग कार्रवाई कर रहा है। अब रही बात बिना दिमाग लगाए और केवल मशीन की उत्पादकता के आधार पर नोटिस की तो यह बताना चाहेंगे कि इसके लिए दो साल तक जांच चली है, 2020 में छापे हुए और नोटिस जून-अगस्त 2022 में किए गए हैं। इस नोटिस के लिए 250 से ज्यादा सक्षम दस्तावेज, प्रमाण मौजूद है, इसके बाद नोटिस जारी हुए हैं।
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