आरक्षक ने लहार विधायक पर डाली पोस्ट, निलंबित, अब SDOP और TI पर भी लगाए आरोप
Ratan Kumar Mishra | Aug 20, 2026, 21:59 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHIND. भिंड में लहार विधायक अंबरीश शर्मा पर पोस्ट डालना आरक्षक आलोक राठौर को भारी पड़ा। लाइन अटैच करने के बाद भी आरक्षक ने दौबारा पोस्ट डाली। इसके बाद एसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया।
समझें क्या है पूरा मामला...
- विधायक पर फिर पोस्ट डाली, आरक्षक निलंबित।
- भिंड में आरक्षक ने एसडीओपी पर लगाए आरोप।
- लाइन अटैच के बाद भी नहीं रुका आरक्षक।
- टीआई पर दस हजार के लेनदेन का आरोप।
- लहार विधायक विवाद में आरक्षक निलंबित हुआ।
भिंड में आरक्षक आलोक राठौर फिर विवादों में हैं। उन्होंने लहार से बीजेपी विधायक अंबरीश शर्मा पर दोबारा पोस्ट डाली है। इसके बाद एसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया। आरक्षक ने एसडीओपी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।
फिर पोस्ट डालकर बढ़ाया विवाद
इसके बाद पुलिस विभाग में शिकायतों का दौर शुरू हुआ। विधायक अंबरीश शर्मा ने एसपी से मामले की शिकायत की। अन्य लोगों ने भी आरक्षक की पोस्ट पर शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने आरक्षक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
14 अगस्त को हुआ था लाइन अटैच
इस बार भी पोस्ट में विधायक का जिक्र किया गया। पोस्ट को लेकर पुलिस विभाग में फिर हलचल बढ़ गई। बताया गया कि पोस्ट आदित्य ठाकुर की आईडी से डाली गई। हालांकि पोस्ट में आरक्षक आलोक राठौर के फोटो थे। एसपी ने इस मामले की जांच कराई। जांच के बाद आरक्षक को निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के बाद एसडीओपी पर आरोप
मीडिया ने जब एसडीओपी से मामले पर सवाल किया, तो उन्होंने आरक्षक की पोस्ट को नशे से जोड़कर बताया। उनका कहना था कि आरक्षक नशे में पोस्ट डाल रहा था। हालांकि इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है।
टीआई पर दस हजार रुपए का आरोप
टीआई ने बताया कि यह घटना वर्ष 2022 की है। उनके अनुसार तब वह लहार थाने में पदस्थ थे। आरक्षक दीपक यादव ने उनसे आर्थिक मदद ली थी। टीआई के मुताबिक रकम बाद में वापस कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि इसका भुगतान फोन से किया गया था। आरक्षक द्वारा दिखाया गया स्क्रीनशॉट इसी लेनदेन का बताया गया है।
पहले भी मिलती रही शिकायतें
अधिकारियों ने उसके शराब पीने की आदत का दावा किया। पुलिस के अनुसार ड्यूटी के दौरान भी विवाद सामने आए। इसके चलते उसे पहले भी लाइन अटैच किया गया था। हालांकि इस कार्रवाई की पूरी फाइल सार्वजनिक नहीं है।
मिहोना थाने में कैसे पहुंचा आरक्षक
मिहोना में उसे वाहनों की जांच की जिम्मेदारी मिली थी। इनमें रेत और तूरी से जुड़े वाहन शामिल थे। इसी दौरान उसके व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आईं। पुलिस के अनुसार बाद में उसे लाइन अटैच किया गया।
पत्नी और सड़क हादसे से जुड़े पुराने मामले
इन मामलों की मौजूदा कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन्हें आरक्षक के खिलाफ साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी भी आरोप का फैसला जांच और अदालत से ही होता है।
आगे क्या होगा
पुलिस कार्रवाई के बाद विभागीय प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। इस मामले में सोशल मीडिया पोस्ट मुख्य वजह बनी है। साथ ही पुलिसकर्मी की सेवा संबंधी भूमिका भी जांच के दायरे में है। अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
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