ग्वालियर में खुला देश का पहला AI स्पोर्ट्स सेंटर,खिलाड़ियों की कमजोरी बताएगा एआई
Sanjay Dhiman | Aug 17, 2026, 23:04 IST
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ग्वालियर के LNIPE में देश का पहला स्पोर्ट्स AI सेंटर बनेगा। मंत्री मंडाविया ने नया ब्लॉक का शुभारंभ किया। यह खिलाड़ियों की टैलेंट पहचान और परफॉर्मेंस सुधारने में मदद करेगा।
ग्वालियर के LNIPE में देश का पहला स्पोर्ट्स AI सेंटर बनेगा। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने नया स्पोर्ट्स साइंस ब्लॉक खोला। यह सेंटर खिलाड़ियों की टैलेंट पहचान AI से करेगा। एथलीट डेवलपमेंट और परफॉर्मेंस ट्रैकिंग भी आसान होगी। नवंबर 2026 तक यह पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
ग्वालियर अब सिर्फ इतिहास और विरासत के लिए नहीं जाना जाएगा। यह शहर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित खेल शिक्षा का नया केंद्र बन रहा है। इसका सीधा फायदा खिलाड़ियों और छात्रों को मिलेगा।
लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान यानी LNIPE ने एक नई पहल शुरू की है। इसका नाम है स्पोर्ट्स एजुकेशन टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन। इसके तहत खेल शिक्षा को पूरी तरह हाई-टेक बनाया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने एलएनआईपीई (LNIPE) परिसर में नए स्पोर्ट्स साइंस ब्लॉक का उद्घाटन किया। इसी ब्लॉक के भीतर अत्याधुनिक AI स्पोर्ट्स सेंटर तैयार किया जा रहा है। यह देश का पहला ऐसा सेंटर होगा।
इस सेंटर का मुख्य मकसद शुरुआती उम्र में ही सही टैलेंट पहचानना है। इसे टैलेंट आइडेंटिफिकेशन कहा जाता है। साथ ही एथलीट डेवलपमेंट और परफॉर्मेंस ट्रैकिंग भी की जाएगी।
खिलाड़ियों की शारीरिक बनावट और क्षमता का बारीकी से विश्लेषण होगा। इसी आधार पर उनकी खेल क्षमता विकसित की जाएगी। जैसे हाई जंप खिलाड़ी को बताया जाएगा कि कदम कहां रखने हैं। यह भी बताया जाएगा कि छलांग किस जगह से लगानी है।
इस तकनीक से प्रदर्शन बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। मकसद यही है कि खिलाड़ी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तैयार हों। इससे वे देश के लिए मेडल जीत सकेंगे।
मीडिया से बात करते हुए स्विमिंग खिलाड़ी होमी गुप्ता ने अपनी बात रखी। उनका कहना था कि यह AI प्रोजेक्ट खिलाड़ियों की फिटनेस को नई ऊंचाई देगा। AI के जरिए पोस्टुरल डिफॉर्मिटी यानी शारीरिक बनावट की कमियां आसानी से पकड़ी जा सकेंगी।
यह तकनीक कोचों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगी। वे खिलाड़ियों की तकनीकी दिक्कतें समय रहते पहचान सकेंगे। इससे चोट लगने का खतरा भी कम होगा।
AI एनालिटिक्स जटिल समस्याओं को तुरंत सुलझाने में मदद करेगा। इससे खिलाड़ियों को कम समय में बेहतर नतीजे मिलेंगे।
युवा खिलाड़ी रामजी शर्मा ने भी इस पर खुशी जताई। उनका कहना था कि पहले फिटनेस टेस्ट के लिए दिल्ली जाना पड़ता था। इसमें समय और ऊर्जा दोनों खर्च होते थे। अब यह सुविधा संस्थान में ही मिल जाएगी। इससे वे नियमित रूप से अपनी फिटनेस जांच सकेंगे।
यह सेंटर टैलेंट आइडेंटिफिकेशन, डेवलपमेंट और नर्चरिंग का काम करेगा। बॉडी स्कैनिंग, हाइट, वेट और बोन डेंसिटी जैसे डेटा का इस्तेमाल होगा। इसी डेटा से AI तुरंत बता सकेगा कि कौन सा खिलाड़ी किस खेल के लिए उपयुक्त है।
AI आधारित साइंटिफिक ट्रेनिंग प्लान से भारतीय खेलों की तस्वीर बदल सकती है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखेगा।
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ग्वालियर अब सिर्फ इतिहास और विरासत के लिए नहीं जाना जाएगा। यह शहर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित खेल शिक्षा का नया केंद्र बन रहा है। इसका सीधा फायदा खिलाड़ियों और छात्रों को मिलेगा।
क्या है नया प्रोजेक्ट
केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने एलएनआईपीई (LNIPE) परिसर में नए स्पोर्ट्स साइंस ब्लॉक का उद्घाटन किया। इसी ब्लॉक के भीतर अत्याधुनिक AI स्पोर्ट्स सेंटर तैयार किया जा रहा है। यह देश का पहला ऐसा सेंटर होगा।
AI कैसे करेगा मदद
खिलाड़ियों की शारीरिक बनावट और क्षमता का बारीकी से विश्लेषण होगा। इसी आधार पर उनकी खेल क्षमता विकसित की जाएगी। जैसे हाई जंप खिलाड़ी को बताया जाएगा कि कदम कहां रखने हैं। यह भी बताया जाएगा कि छलांग किस जगह से लगानी है।
इस तकनीक से प्रदर्शन बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। मकसद यही है कि खिलाड़ी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तैयार हों। इससे वे देश के लिए मेडल जीत सकेंगे।
खिलाड़ियों की राय
कोचों को भी फायदा
AI एनालिटिक्स जटिल समस्याओं को तुरंत सुलझाने में मदद करेगा। इससे खिलाड़ियों को कम समय में बेहतर नतीजे मिलेंगे।
युवा खिलाड़ी रामजी शर्मा ने भी इस पर खुशी जताई। उनका कहना था कि पहले फिटनेस टेस्ट के लिए दिल्ली जाना पड़ता था। इसमें समय और ऊर्जा दोनों खर्च होते थे। अब यह सुविधा संस्थान में ही मिल जाएगी। इससे वे नियमित रूप से अपनी फिटनेस जांच सकेंगे।
आगे क्या बदलेगा
AI आधारित साइंटिफिक ट्रेनिंग प्लान से भारतीय खेलों की तस्वीर बदल सकती है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखेगा।
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