एमपी में सूखी ठंड का कहर, ढाई महीने से नहीं बरसा मावठा, खेती और सेहत पर मंडराया बड़ा खतरा

मध्य प्रदेश में इस बार ढाई महीने से मावठा नहीं बरसा है। सूखी ठंड के कारण लोगों की सेहत और खेती पर संकट मंडरा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ कमजोर होने से राज्य में हवा की नमी खत्म हो गई है। अब किसानों को फसलों के नुकसान और बढ़ती लागत का डर सता रहा है।

author-image
Aman Vaishnav
New Update
madhya pradesh dry winter mavtha impact farming health
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

News In Short 

  • मध्य प्रदेश में इस बार ढाई महीने से मावठे की एक भी बूंद नहीं गिरी।

  • मौसम वैज्ञानिकों ने स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की कमी को मुख्य कारण बताया।

  • हवा में नमी की कमी से सांस की तकलीफ और एलर्जी के मरीज तेजी से बढ़े।

  • फसलों में सिंचाई की लागत बढ़ी और पाले का खतरा गहराया।

  • आगामी मार्च में तेज गर्मी और प्री-मानसून में ओलावृष्टि की आशंका।

News In Detail 

एमपी में सूखा बीता मावठा

मध्य प्रदेश में सर्दी का सीजन अब अंतिम दौर में पहुंच गया है। करीब ढाई महीने बीत जाने के बाद भी यहां बारिश नहीं हुई। शीतकालीन बारिश यानी मावठे की एक बूंद भी नहीं गिरी है। आमतौर पर दिसंबर और जनवरी में अच्छी बारिश दर्ज होती है। इस बार आसमान साफ रहा और बादल नहीं दिखाई दिए। प्रदेश में 1 नवंबर से 28 फरवरी तक मावठा होता है। यह बारिश मिट्टी में नमी बनाए रखने का काम करती है।

मावठा न होने के पीछे के वैज्ञानिक कारण

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय नहीं रहे। जो भी पश्चिमी विक्षोभ आए, वे बहुत ज्यादा कमजोर निकले। इस कारण मध्य भारत तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पाई। हवा में नमी न होने से बादल भी नहीं बन सके। नतीजा यह हुआ कि रात का तापमान अचानक नीचे गिरा। इसी वजह से प्रदेश में इस बार कड़ाके की ठंड रही। हवा पूरी तरह शुष्क रही और नमी का स्तर गिरा।

सेहत पर सूखी ठंड का प्रहार

सूखी ठंड शरीर की प्राकृतिक नमी को तेजी से सोखती है। इससे इंसानों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर पड़ जाती है। सांस की तकलीफ और सर्दी-खांसी की समस्या ठंड में बहुत देखने को मिलती है। वायरल फीवर और गले में खराश की समस्या आम है। हवा में नमी न होने से फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है। 

कृषि विशेषज्ञों की राय 

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार गेहूं, चना और सरसों के लिए मावठा बहुत जरूरी है। मावठा फसलों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होता। बारिश न होने से अब ज्यादा सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे किसानों की खेती की लागत काफी बढ़ गई है। मिट्टी की ऊपरी परत में नमी खत्म हो चुकी है। नमी न होने से न्यूनतम तापमान और नीचे गिर सकता है। इससे फसलों पर पाले की मार का खतरा बढ़ गया है।

फसलों में कीट का खतरा

मौसम में आए इस बदलाव से फसलें असुरक्षित हो गई हैं। आलू, टमाटर और मटर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन फसलों में कीट और वायरस का प्रकोप बढ़ सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को निरंतर निगरानी की सलाह दी है। सूखी ठंड के कारण पौधों का विकास भी रुक सकता है। उत्पादन कम होने की आशंका से किसान अब काफी डरे हुए हैं। सिंचाई की कमी से दाने की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। समय रहते उचित छिड़काव करना अब बहुत जरूरी हो गया है।

भविष्य के मौसम पर मंडराते खतरे

सर्दियों में नमी न होने का असर आगे भी दिखेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार मार्च के महीने में भीषण गर्मी पड़ेगी। प्री-मानसून के दौरान आंधी और तूफान की घटनाएं बढ़ेंगी। इस दौरान ओलावृष्टि होने की भी बहुत संभावना है। वायुमंडल का संतुलन बिगड़ने से मानसून की चाल बदल सकती है। सर्दियों की नमी मौसम के चक्र को संतुलित रखती है। नमी की कमी से मानसून आने में देरी हो सकती है। यह स्थिति पर्यावरण के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है।

Sootr Knowledge

इन बातों का जरूर ध्यान रखें।

  • हाइड्रेशन बढ़ाएं: प्यास न लगने पर भी पानी जरूर पिएं। शरीर में पानी की कमी से खून गाढ़ा हो सकता है।

  • नेजल स्प्रे का उपयोग: नाक के अंदर की परत सूखने से संक्रमण बढ़ता है। डॉक्टर की सलाह पर नेजल ड्रॉप्स का उपयोग करें।

  • भाप लेना शुरू करें: दिन में कम से कम एक बार भाप लें। इससे श्वसन तंत्र की नमी बनी रहती है।

  • डाइट पर ध्यान: डाइट में गुड़, तिल और अदरक शामिल करें। ये चीजें शरीर का आंतरिक तापमान बनाए रखती हैं।

आगे क्या

आने वाले दो हफ्तों में ठंड और तीखी हो सकती है। नमी न होने से रात का पारा और नीचे गिरेगा। फरवरी के अंत तक गर्मी का अहसास शुरू हो जाएगा। किसानों को सिंचाई के प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश में इस साल मावठा न होना चिंताजनक है। इसका असर स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तीनों पर पड़ेगा। सरकार और जनता को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए। सावधानी और सही प्रबंधन ही अब एकमात्र रास्ता बचा है।

ये खबरें भी पढ़िए...

एमपी का मौसम: पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बदलेगा मौसम, नए साल में छाएगा घना कोहरा

पश्चिमी विक्षोभ से बदल सकता है मौसम का मिजाज, तापमान में गिरावट, दो दिन हल्की बारिश होने की संभावना

MP Weather Update : प्रदेश में बारिश का अलर्ट, इन जिले में ओलावृष्टि गिरने का अनुमान, जानें मौसम का हाल

मौसम विभाग का शीतलहर का अलर्ट, तापमान 2 डिग्री तक गिरने का अनुमान, बादल छाए रहने की संभावना

MP weather एमपी का मौसम कृषि विशेषज्ञों की राय MP Weather update मध्य प्रदेश
Advertisment