जिप्सम और मिट्टी की नकली सरसों से सरकार और व्यापारी को लाखों का चूना
Sanjay Sharma | Feb 03, 2026, 19:28 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश के सागर में जिप्सम और मिट्टी से बनी नकली सरसों बेचकर करोड़ों का घोटाला किया। मार्कफेड और नेफेड के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को चपत लगी है।
NEWS IN SHORT
2. पुलिस के हाथ नकली सरसों बेचने वालों का सुराग नहीं लगा है और न कोई आरोपी पकड़ा गया है।
3. नेफेड और मार्कफेड जैसी संस्थाओं की खरीद और नीलामी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
4. मध्य प्रदेश से अनाज, दलहन और तिलहन की खरीदी से व्यापारी दूरी बना सकते हैं।
5. नकली सरसों बेंचने वाले गिराह की जालसाजी प्रदेश की साख को भी दागदार कर रही है।
INTRO
काली सरसों की मिलावट खोरी से दो करोड़ से ज्यादा की ठगी, बोरियों से किसान कोड का गायब होना, सर्वेयर की रिपोर्ट सब संदेह के दायरे में हैं। सवाल यह भी उठ रहा है नकली सरसों की पहचान क्यों नहीं की जा सकी।
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News in Detail :
जालसाजों का गिरोह पहले बड़े छन्नों से मिट्टी के महीन दाने बनाते हैं और फिर उसे जिप्सम, सीमेंट के पावडर में डालकर मिला देते हैं। इससे मिट्टी के दानों पर सरसों के रंग की तरह परत चढ़ जाती है। इन दानों को सुखाने के बाद बोरियों में भरकर अलग- अलग राज्यों में असली सरसों में मिलाकर बेंच दिया जाता है।
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कमीशन के लालच में फंसे जिम्मेदार
बोरियों से कैसे गायब हुए कोड
हजारों क्विटंल नकली सरसों खरीदते समय सैकड़ों बोरियां किसान कोड के बिना ही वेयर हाउस में जमा कराई गईं। इसी वजह से वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। क्योंकि किसान कोड के बिना इस लाट में एक भी बोरी जमा ही नहीं की जा सकती थी।
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अफसरों के लालच से लगी चपत
पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया है लेकिन केवल खरीदी करने वाले सरकारी कर्मचारी और अधिकारी ही नामजद आरोपी बना पाई है। उन मिलावटखोरों की कोई जानकारी नहीं जुटा पाई है जो खरीद केंद्र पर सरसों बेंचकर लाखों का फटका लगा गए। प्रारंभिक जांच में नकली सरसों की खरीदी से सरकार को एक से दो करोड़ रुपए की चपत लगने का अंदेशा है।
बच निकले जालसाज, फंसें जिम्मेदार
कंपनी की आपत्ति के बाद नेफेड के अधिकारी रंजीत कुमार सिंह ने बेंची गई सरसों और रहली के गोदाम में रखी बोरियों की जांच कराई गई। एक्सपर्ट ने जैसे ही सरसों के दानों कों पानी में डाला मिलावटखोरी का भेद खुल गया।
अब हेराफेरी में शामिल सहकारी समिति छिरारी के संचालक विजय कुमार जैन, सहकारी समिति उपकेन्द्र खैराना संचालक जगदीश लोधी, नेफेड सर्वेयर अभिषेक दुबे, पुष्पेन्द साहू, वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन की तत्कालीन शाखा प्रबंधक वर्षा तोमर की तलाश जारी है। जबकि लाखों का चूना लगाने वाले जालसाजों की कोई खबर ही नहीं है।
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