शिशु मृत्यू दर में एमपी नंबर दो पर, हर तीसरा बच्चा कुपोषण का शिकार, SRS रिपोर्ट में खुलासा
Aman Vaishnav | May 25, 2026, 12:44 IST
madhya pradesh infant mortality rate srs report 2024
मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से काफी खराब है। SRS रिपोर्ट 2024 के अनुसार एमपी में हर एक हजार में से 35 बच्चे अपना पहला जन्मदिन ही नहीं देख पाते हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- SRS रिपोर्ट 2024 के मुताबिक मध्यप्रदेश शिशु मृत्यु दर के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है।
- मध्यप्रदेश में हर एक हजार में से 35 बच्चे एक साल की उम्र पूरी करने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
- एमपी में केरल के मुकाबले बच्चों की मौत का आंकड़ा 4 गुना ज्यादा है।
- प्रदेश में जन्म के पहले 28 दिनों के भीतर ही एक हजार में से 26 नवजातों की मौत हो जाती है।
- राज्य में हर तीसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है।
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बताते हैं। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में पैदा होने वाले कई मासूम अपना पहला जन्मदिन भी नहीं देख पा रहे हैं। शिशु मृत्यु दरके मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में दूसरे नंबर पर बना हुआ है।
madhya-pradesh-infant-mortality-rate-srs-report-2024
पिछले 5 सालों में क्या बदला?
परेशानी की बात यह है कि यह सुधार अब भी राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे है। पूरे देश की बात करें तो भारत में प्रति एक हजार जीवित बच्चों पर मौत का आंकड़ा 24 है (जो 2019 में 30 था)। इसका मतलब है कि मध्यप्रदेश का आंकड़ा देश के औसत से 11 अंक ज्यादा खराब है।
| वर्ष | मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर | भारत की औसत शिशु मृत्यु दर |
| 2019 | 46 | 30 |
| 2023 | 37 | डेटा उपलब्ध नहीं |
| 2024 | 35 | 24 |
गांवों और शहरों के बीच बड़ा फासला
गांवों में इस बदतर स्थिति की सबसे बड़ी वजह ये हैं।
- गांवों के अस्पतालों में कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएं।
- बच्चों और माताओं में कुपोषण।
- बीमारी की हालत में समय पर इलाज न मिल पाना।
- अच्छे और बड़े अस्पतालों का गांवों से बहुत दूर होना।
madhya-pradesh-infant-mortality-rate-srs-report-2024
जन्म के पहले 28 दिन सबसे खतरनाक
- कम वजन में जन्म: पैदा होने के समय बच्चे का वजन सामान्य से कम होना।
- समय से पहले डिलीवरी : नौ महीने पूरे होने से पहले ही बच्चे का पैदा हो जाना।
- संक्रमण : जन्म के तुरंत बाद नवजात को इंफेक्शन हो जाना।
- इलाज की कमी: ऐन मौके पर जरूरी और पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं न मिलना।
कुपोषण का डरावना जाल
वहीं 35.7% बच्चे ठिगने यानी छोटे कद के रह गए हैं। सीधे शब्दों में कहें तो प्रदेश का हर तीसरा बच्चा कुपोषण की मार झेल रहा है। आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में तो यह स्थिति और भी ज्यादा डरावनी है।
केरल मॉडल से क्यों पिछड़ गया मध्यप्रदेश?
SRS रिपोर्ट 2024 के मुताबिक केरल में साल 2021 में IMR 6 था। 2023 में ये घटकर सिर्फ 5 रह गया था। यह आंकड़ा अमेरिका (5.6) से भी बेहतर था। हालांकि साल 2024 में केरल का यह आंकड़ा थोड़ा बढ़कर 8 हो गया है, लेकिन फिर भी यह मध्यप्रदेश से कहीं बेहतर है।
केरल ने कैसे किया यह कमाल?
- महिला के गर्भवती होने से लेकर बच्चे के जन्म के बाद तक हर पल की निगरानी की जाती है।
- महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया गया जिससे वे जागरूक बनीं।
- समय पर पूरी तरह से टीकाकरण और स्तनपान को बढ़ावा दिया गया।
- हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी यानी जिन गर्भवती महिलाओं को खतरा ज्यादा होता है, उनकी पहचान पहले ही कर ली जाती है।
- नवजातों के लिए विशेष रूप से ICU जैसी बेहतरीन सुविधाएं तैयार की गईं।
अस्पताल में प्रसव फिर भी सुधार क्यों नहीं?
अस्पताल पहुंचने के बाद भी नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचा पाना हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए आज भी एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है।
FAQ
- मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर की क्या स्थिति है?
शिशु मृत्यु दर का मतलब होता है कि प्रति एक हजार जीवित पैदा हुए बच्चों में से कितने बच्चों की मौत एक साल की उम्र पूरी करने से पहले हो गई। मध्यप्रदेश में यह दर 35 है, जिसका मतलब है कि हर एक हजार में से 35 बच्चे अपना पहला जन्मदिन नहीं देख पाते हैं। देश में शिशु मृत्यु दर के मामले में मध्यप्रदेश दूसरे नंबर पर है।
एमपी में आज भी बोझ हैं बेटियां! बच्चों को त्यागने और भ्रूण हत्या के मामले में मध्यप्रदेश नंबर एक पर
MP में हर दिन 90 से ज्यादा महिलाएं बन रहीं अपराध का शिकार, एनसीआरबी की रिपोर्ट में खुलासा
लव मैरिज हो या अरेंज, एमपी में हर दिन हो रही एक ट्विशा की मौत, चौंकाएंगे ये आंकड़े
हिट एंड रन के मामलों में एमपी देश में नंबर एक, हर दिन हो रहे 34 से ज्यादा हादसे
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari