बीमारू श्रेणी से बाहर एमपी, कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती, 4 विभाग मिलकर लड़ेंगे
Kaushiki | Jun 02, 2026, 10:57 IST
madhya pradesh malnutrition
मप्र बीमारू राज्यों की श्रेणी से बाहर हो गया है, लेकिन कुपोषण अभी भी बड़ी समस्या है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने चार विभागों को मिलकर एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए। एनएफएचएस 2026 के अनुसार 39.7% बच्चे कम वजन के हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- मप्र बीमारू श्रेणी से बाहर हो गया है, लेकिन कुपोषण बड़ी चुनौती बनी है।
- सीएम डॉ. मोहन यादव ने चार विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए।
- एनएफएचएस 2026 के मुताबिक, 39.7% बच्चे अभी भी कम वजन के हैं।
- पोषण आहार विवाद सुलझाने के लिए अगली कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव आएगा।
- 6 से 23 माह के केवल 12% बच्चों को पर्याप्त पोषण मिल पा रहा है।
एमपी में कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती
Malnutrition in MP
4 विभागों को मिला एक्शन का जिम्मा
बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान का भी जिक्र हुआ। उस बयान में कहा गया था कि मप्र सहित कई राज्य बीमारू श्रेणी से बाहर निकल चुके हैं, लेकिन कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
Malnutrition in MP
पोषण आहार विवाद भी सुलझेगा
क्या कहते हैं एनएफएचएस के आंकड़े?
यह 35.7 प्रतिशत से घटकर 31.4 प्रतिशत पर आ गई है। लेकिन यह आंकड़ा अभी भी चिंताजनक है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि 6 से 23 माह के केवल 12 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त पोषण मिल पा रहा है। यानी 10 में से 9 से ज्यादा शिशुओं को उनकी जरूरत के मुताबिक खाना नहीं मिल रहा। यह स्थिति बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर डालती है।
क्यों जरूरी है ये एकजुटता?
चार विभागों के मिलकर काम करने से योजनाओं का लाभ जमीन पर ज्यादा असरदार तरीके से पहुंच सकेगा। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों तक सही समय पर सही पोषण पहुंचाना ही इस पूरे अभियान का मकसद है।
खबर क्यों जरूरी है?
39.7 प्रतिशत बच्चों का कम वजन होना और 12 प्रतिशत शिशुओं को ही पर्याप्त पोषण मिलना, यह संवैधानिक अधिकारों की कसौटी पर बड़ी चूक है। सरकार का चार विभागों को एकजुट करने का निर्णय सही दिशा में एक कदम है।
यह खबर नागरिकों, नीति निर्माताओं और समाज सेवी संस्थाओं सभी के लिए जरूरी है। डिजिटल नैतिकता के लिहाज से यह खबर पूरी तरह तथ्यों पर आधारित है और किसी वर्ग के प्रति भेदभाव से मुक्त है। यह एक जिम्मेदार और सामाजिक सरोकार से जुड़ी पत्रकारिता का उदाहरण है।
FAQ
- मध्यप्रदेश में कुपोषण की मौजूदा स्थिति क्या है?
एनएफएचएस 2026 के आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में 5 साल से कम उम्र के 39.7 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं। 23.8 प्रतिशत बच्चे दुबलेपन के शिकार हैं। ठिगनेपन की दर 35.7 से घटकर 31.4 प्रतिशत हुई है, जो थोड़ा सुधार दर्शाता है। सबसे चिंताजनक यह है कि 6 से 23 माह के केवल 12 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त पोषण मिल पा रहा है। - कुपोषण दूर करने के लिए मप्र सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा और पंचायत एवं ग्रामीण विकास इन चार विभागों को मिलकर संयुक्त एक्शन प्लान बनाने के नि - पोषण आहार विवाद क्या है और यह क्यों अटका हुआ था?
पोषण आहार विवाद इस बात को लेकर था कि बच्चों और महिलाओं को दिया जाने वाला पोषण आहार तैयार करने का काम स्वयं सहायता समूहों को दिया जाए या निजी कंपनियों को। यह फैसला लंबे समय से अटका था, जिससे टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। सीएम ने अब निर्देश दिए हैं कि इस पर निर्णय लेकर अगली कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाया जाए।
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