सरकारी मोतियाबिंद ऑपरेशन ठप, पैसे खर्च करने को मजबूर ग्रामीण
Umeshwari Baghel | Jun 02, 2026, 10:00 IST
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छत्तीसगढ़ के दूरदराज गांवों में बुजुर्ग मोतियाबिंद ऑपरेशन का लंबा इंतजार कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों में निजी ऑपरेशन शामिल कर अभियान की असफलता छुपाई जा रही है। स्वास्थ्य अमला अनुपस्थित, हजारों अभी ऑपरेशन का इंतजार कर रहे हैं।
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ के गांवों में बुजुर्ग मोतियाबिंद ऑपरेशन का लंबा इंतजार
- सरकारी आंकड़ों में निजी ऑपरेशन जोड़ कर अभियान की असफलता छुपाई जा रही
- दूरदराज के जिलों में स्वास्थ्य अमला अनुपस्थित, ग्रामीण परेशान
- स्वास्थ्य मंत्री के जिले में लक्ष्य का केवल 42% ऑपरेशन पूरा हुआ
- ग्रामीण बुजुर्गों की आंखों की रोशनी खतरे में, कार्रवाई जरूरी
NEWS IN DETAIL
यह स्थिति केवल उनका नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के 13 जिलों के दूरदराज के गांवों के हजारों बुजुर्गों की है। आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में फ्री सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे ग्रामीण खुद पैसे देकर ऑपरेशन कराने को मजबूर हैं।
जमीन पर हकीकत
सरकारी आंकड़ों में भ्रामक स्थिति
इसके अलावा निजी अस्पतालों में 79,983 लोगों ने पैसे देकर ऑपरेशन करवाए। सरकारी तंत्र ने निजी अस्पतालों में कराए गए ऑपरेशन को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल कर दिया, जिससे आंकड़े शहरों में लक्ष्य से कई गुना अधिक दिखाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री के जिले का हाल
कड़वा सच
गरियाबंद, कोकड़ीमाल: सुखवती बाई समेत 10 ग्रामीणों का मोतियाबिंद गंभीर स्थिति में था। उन्हें 220 किमी दूर रायपुर लाकर आपातकालीन सर्जरी कराई गई। गंगाबाई अभी भी जांच टीम का इंतजार कर रही हैं।
डा. निधि ग्वारले ने क्या कहा
निजी अस्पतालों के आंकड़ों को सरकारी रिपोर्ट में जोड़ने की वजह, माध्यम चाहे कोई भी हो, अंधत्व नियंत्रण का काम ही हो रहा है। पेंडिंग सर्जरी जल्द पूरी करने का आश्वासन दिया।
टाइमलाइन
राज्य में 1.80 लाख मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य रखा गया।
2025–2026 – सरकारी और एनजीओ प्रदर्शन
सरकारी मेडिकल कॉलेजों: 14,009 ऑपरेशन
जिला/सिविल/केंद्रीय अस्पताल: 31,146
एनजीओ अस्पताल: 38,503
सरकारी + एनजीओ मिलाकर: 83,658 ऑपरेशन
निजी अस्पतालों में पैसे देकर कराए गए ऑपरेशन: 79,983
सरकारी आंकड़ों में निजी ऑपरेशन को जोड़कर कुल रिपोर्ट तैयार की गई।
ग्रामीण स्थिति
दूरदराज के गांवों में बुजुर्गों के ऑपरेशन लंबित।
हर गांव में औसतन 2–3 बुजुर्ग ऑपरेशन का इंतजार कर रहे हैं।
गंभीर मरीजों को 200+ किमी दूर बड़े अस्पतालों में लाकर आपातकालीन सर्जरी।
स्वास्थ्य मंत्री के जिले का हाल
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में केवल 42% ऑपरेशन ही लक्ष्य के अनुसार हुए।
अफसरों का तर्क: सामाजिक संस्था की अनुपस्थिति।
वर्तमान स्थिति
हजारों बुजुर्ग अभी भी ऑपरेशन का इंतजार कर रहे हैं।
पेंडिंग ऑपरेशन जल्द पूरी करने का आश्वासन दिया गया।
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य अमला और जानकारी की कमी बनी हुई है।
निष्कर्ष
FAQ
- ग्रामीण इलाकों में बुजुर्गों के मोतियाबिंद ऑपरेशन क्यों नहीं हो पा रहे हैं?
दूरदराज के गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच बहुत कम है। सरकारी मेडिकल टीम अक्सर इन इलाकों में नहीं पहुँचती या केवल औपचारिकता निभाती है। बुजुर्गों को शहर जाकर ऑपरेशन करवाना पड़ता है, जिससे समय, यात्रा और खर्च की समस्या होती है। इसके अलावा कई लोग ऑपरेशन को लेकर डरते हैं और जानकारी की कमी के कारण जरूरी जांच भी नहीं कराते। - सरकारी रिपोर्ट में निजी अस्पतालों में कराए गए ऑपरेशन क्यों जोड़ दिए जाते हैं?
सरकारी तर्क यह है कि माध्यम चाहे कोई भी हो, अंधत्व नियंत्रण का काम हो रहा है। लेकिन इससे वास्तविक ग्रामीण स्थिति और पेंडिंग ऑपरेशन की गंभीरता छुप जाती है। सरकारी आंकड़ों में शहरों को चमका दिया जाता है, लेकिन दूरदराज के गांवों का सच छिप जाता है। इससे असल कमियों का पता ही नहीं चल पाता। - पिछले साल का लक्ष्य और वास्तविक स्थिति क्या थी?
पिछले साल 1.80 लाख ऑपरेशन का लक्ष्य था। सरकारी अस्पतालों और एनजीओ मिलाकर कुल 83,658 ऑपरेशन हुए। इसके अलावा निजी अस्पतालों में 79,983 लोग पैसे देकर ऑपरेशन करवा चुके हैं। सरकारी रिपोर्ट में निजी ऑपरेशन को जोड़ने से आंकड़े शहरों में लक्ष्य से कई गुना अधिक दिखाए गए, जबकि दूरदराज के गांवों में हजारों बुजुर्ग अभी भी ऑपरेशन का इंतजार कर रहे हैं।
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