विधानसभा के चुनाव प्रचार में इतने दिन नापा मध्यप्रदेश, शिवराज कर लेते पृथ्वी की परिक्रमा, कमलनाथ का पूरा हो जाता वर्ल्ड टूर
Jitendra Shrivastava | Nov 21, 2023, 24:00 IST
विधानसभा के चुनाव प्रचार में इतने दिन नापा मध्यप्रदेश, शिवराज कर लेते पृथ्वी की परिक्रमा, कमलनाथ का पूरा हो जाता वर्ल्ड टूर
प्रदेश का यह विधानसभा चुनाव नेताओं के लिए राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए दिग्गजों ने चूनाव प्रचार में पूरे मध्यप्रदेश को नाप दिया है
अरुण तिवारी, BHOPAL. प्रदेश का यह विधानसभा चुनाव नेताओं के लिए राजनीतिक अस्तित्व बचाने की चुनौती बन गया है। यही कारण है कि दिग्गजों ने चूनाव प्रचार में पूरे मध्यप्रदेश को नाप दिया है। यह चुनाव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए सबसे ज्यादा अहम है। शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव में इतनी दूरी तय की है जितनी में वे पूरी पृथ्वी की परिक्रमा कर लेते। वहीं कमलनाथ ने पिछले चुनाव से दोगुना ज्यादा समय चुनाव प्रचार में खर्च किए है। इतने समय में उनका वर्ल्ड टूर हो जाता।
शिवराज ने 2018 में 149, जबकि इस बार 165 सभाएं की
पिछले दो दशकों में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव इस बार सबसे ज्यादा संघर्ष पूर्ण है। यह विधानसभा चुनाव कई नेताओं का राजनीतिक भविष्य तय करने वाला है। चुनाव परिणाम सीएम शिवराज सिंह चौहान के लिए बहुत ज्यादा अहम हैं। यही कारण है कि उन्होंने चुनाव प्रचार में पूरे मध्यप्रदेश को नाप दिया है। 2018 में शिवराज ने 149 सभाएं और रैलियां की थी। जबकि इस बार ये आंकड़ा बढ़कर 165 सभाएं हो गया है। जबकि इस बार पिछले चुनाव की अपेक्षा प्रचार के लिए दस दिन कम मिले हैं। शिवराज ने 1 अक्टूबर से 15 नवंबर यानी 45 दिनों में 165 सभाएं की हैं। इन सभाओं में सीएम ने करीब 40 हजार किलोमीटर की दूरी तय की है। इतने दिनों में पृथ्वी का पूरा एक चक्कर लग सकता है।
कमलनाथ ने 2018 के चुनाव से दोगुनी सभाएं की हैं
अब बात करते हैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की। कमलनाथ के लिए यह चुनाव राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने की लड़ाई है। यही कारण है कि उन्होंने साल 2018 के चुनाव से दोगुनी सभाएं इस चुनाव में की हैं। 2018 में कमलनाथ ने 55 सभाएं की थीं जो इस डेढ़ महीने में बढ़कर 114 हो गईं। इस दौरान कमलनाथ ने प्रदेश की अधिकांश विधानसभा सीटों तक जाने की कोशिश की। इस चुनाव प्रचार में कमलनाथ ने करीब 25 हजार किलोमीटर का सफर तय किया है। इतने दिनों में पूरा एक वर्ल्ड टूर हो सकता है।
आइए अब बताते हैं प्रदेश के चुनाव प्रचार में बीजेपी-कांग्रेस के दिग्गजों ने कितने दिन खर्च किए...
बीजेपी के दिग्गजों ने की इतनी सभाएं
शिवराज और कमलनाथ के चकरघिन्नी बनने के साथ ही दिल्ली के नेताओं की प्रदेश में बड़े पैमाने पर मौजूदगी से ये साफ जाहिर होता है कि ये चुनाव इन दोनों पार्टियों के लिए कितना अहम है। इस चुनाव में इतना संघर्ष है कि राजनीतिक पंडित भी इसके परिणाम का अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं।
शिवराज ने 2018 में 149, जबकि इस बार 165 सभाएं की
पिछले दो दशकों में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव इस बार सबसे ज्यादा संघर्ष पूर्ण है। यह विधानसभा चुनाव कई नेताओं का राजनीतिक भविष्य तय करने वाला है। चुनाव परिणाम सीएम शिवराज सिंह चौहान के लिए बहुत ज्यादा अहम हैं। यही कारण है कि उन्होंने चुनाव प्रचार में पूरे मध्यप्रदेश को नाप दिया है। 2018 में शिवराज ने 149 सभाएं और रैलियां की थी। जबकि इस बार ये आंकड़ा बढ़कर 165 सभाएं हो गया है। जबकि इस बार पिछले चुनाव की अपेक्षा प्रचार के लिए दस दिन कम मिले हैं। शिवराज ने 1 अक्टूबर से 15 नवंबर यानी 45 दिनों में 165 सभाएं की हैं। इन सभाओं में सीएम ने करीब 40 हजार किलोमीटर की दूरी तय की है। इतने दिनों में पृथ्वी का पूरा एक चक्कर लग सकता है।
कमलनाथ ने 2018 के चुनाव से दोगुनी सभाएं की हैं
अब बात करते हैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की। कमलनाथ के लिए यह चुनाव राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने की लड़ाई है। यही कारण है कि उन्होंने साल 2018 के चुनाव से दोगुनी सभाएं इस चुनाव में की हैं। 2018 में कमलनाथ ने 55 सभाएं की थीं जो इस डेढ़ महीने में बढ़कर 114 हो गईं। इस दौरान कमलनाथ ने प्रदेश की अधिकांश विधानसभा सीटों तक जाने की कोशिश की। इस चुनाव प्रचार में कमलनाथ ने करीब 25 हजार किलोमीटर का सफर तय किया है। इतने दिनों में पूरा एक वर्ल्ड टूर हो सकता है।
आइए अब बताते हैं प्रदेश के चुनाव प्रचार में बीजेपी-कांग्रेस के दिग्गजों ने कितने दिन खर्च किए...
बीजेपी के दिग्गजों ने की इतनी सभाएं
- नरेंद्र मोदी- 20
- अमित शाह- 14
- वीडी शर्मा- 55
- ज्योतिरादित्य सिंधिया-110
- प्रियंका गांधी-12
- राहुल गांधी- 12
- मल्लिलकार्जुन खड़गे- 9
शिवराज और कमलनाथ के चकरघिन्नी बनने के साथ ही दिल्ली के नेताओं की प्रदेश में बड़े पैमाने पर मौजूदगी से ये साफ जाहिर होता है कि ये चुनाव इन दोनों पार्टियों के लिए कितना अहम है। इस चुनाव में इतना संघर्ष है कि राजनीतिक पंडित भी इसके परिणाम का अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं।
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