मध्यप्रदेश में बढ़ते मेडिकल कॉलेजों के साथ फैकल्टी की कमी चिंता का विषय

Sanjay Sharma | Feb 08, 2026, 19:35 IST
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madhya pradesh medical colleges
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एमपी सरकार ने छोटे जिलों के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर्स को वेतन के अलावा 20% प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे डॉक्टर्स की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

News in Short

  • छोटे जिलों के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर्स को 20% प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव तैयार है।
  • प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ी, लेकिन शैक्षणिक स्टाफ की कमी बनी हुई है।
  • सिंगरौली, श्योपुर, मंदसौर, सिवनी में 50% से 90% तक फैकल्टी पद खाली हैं।
  • प्रदेश में प्रोफेसर और अन्य शैक्षणिक पदों की कमी के कारण ऑनलाइन क्लासें चल रही हैं।
  • चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए केबिनेट में भेजने की तैयारी की है।

News in Detail

BHOPAL. मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर्स की कमी को दूर करने की तैयारी की जा रही है। छोटे जिलों के मेडिकल कॉलेजों में सेवा देने पर इन डॉक्टर्स को वेतन के अलावा 20 फीसदी प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इससे संबंधित प्रस्ताव पर सरकार की मुहर लगने का इंतजार है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग इसके लिए मानदंड भी तैयार कर चुका है।

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कॉलेजों बढ़े, प्रोफेसर कम

मध्यप्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बुधनी, छतरपुर और दमोह में मेडिकल कॉलेज इसी सत्र से शुरू होने जा रहे हैं। इनके शुरू होने के साथ ही प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 17 हो जाएगी। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में इजाफा हुआ है, लेकिन उनके अनुपात में शैक्षणिक स्टाफ नहीं मिल रहा है।

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दूरस्थ जिलों में फैकल्टी नहीं

सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में करीब 90 फीसदी फैकल्टी के पद खाली हैं। यहां स्वीकृत पदों की संख्या 116 है,लेकिन नियुक्ति करीब डेढ़ दर्जन पदों पर ही हो सकी है। श्योपुर मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी के 116 पदों पर केवल 15 फैकल्टी ही काम कर रही है।

श्योपुर, सिंगरौली, नीचम, मंदसौर और सिवनी में भी 50 से लेकर 90 फीसदी तक फैकल्टी खाली हैं। इन कॉलेजों में पढ़ने के लिए स्टूडेंट्स तो पहुंच गए, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक मौजूद नहीं हैं। इसकी वजह से ऑनलाइन क्लास जरिए इन्हें पढ़ाया जा रहा है।

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कैसे तैयार होंगे अच्छे डॉक्टर

बीते 15 साल में सरकारी मेडिकल कॉलेज की संख्या 14 तक पहुंच गई है। बुधनी, दमोह और छतरपुर में भी इसी सत्र से मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएंगे। इन्हें मिलाकर संख्या 17 पहुंच जाएगी।

सरकार के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ गई है, लेकिन इनमें मेडिकल स्टूडेंट को पढ़ाने वाले प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर ही नहीं मिल रहे हैं। अधिकतर विभाग बंद पड़े होने से इनमें पढ़ाई ही नहीं हो रही है। ऐसे में प्रदेश के अस्पतालों में इलाज के लिए अच्छे डॉक्टर कैसे मिलेंगे यह भी सवाल बना हुआ है।

सरकार की स्वीकृति का इंतजार

मेडिकल कॉलेजों में टीचिंग स्टाफ की कमी विभाग की भी चिंता बनी हुई है। प्रोफेसर नहीं होने से मेडिकल कॉलेजों की छवि भी खराब हो रही है। इनमें प्रवेश लेने वाले मेडिकल स्टूडेंट भी पढ़ाई को लेकर परेशान हैं। क्योंकि प्रोफेसर न होने से यहां ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़ाई हो रही है।

इसको देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्पेशल अलाउंस देने का प्रस्ताव तैयार किया है। यानी बड़े जिलों को छोड़कर दूरस्थ जिलों के मेडिकल कॉलेजों में नियुक्ति लेने वाले डॉक्टर्स को वेतन के अलावा 20 फीसदी अलाउंस दिया जाएगा।

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विभाग ने फाइनल किया ड्राफ्ट

चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल का कहना है विभाग ने स्पेशल अलाउंस का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसको लेकर अधिकारियों के साथ बैठक कर मानदंड और शर्तें भी तय कर ली गई हैं।

अधिकारियों को ड्राफ्ट को अंतिम रूप देकर केबिनेट में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के पदों पर जल्दी नियुक्ति के प्रयास कर रहा है। पूरा भरोसा है, ड्राफ्ट से डॉक्टर छोटे जिलों के मेडिकल कॉलेज में काम करने मे रुचि दिखाएंगे।

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