पटवारी हड़ताल मध्य प्रदेश: स्वामित्व योजना से नाराज पटवारी सामूहिक हड़ताल पर, आखिर क्या है पूरा मामला?
Sanjay Dhiman | Sootr Creatives | Oct 07, 2026, 23:55 IST
दरी बिछाकर डटे पटवारी: गुना पटवारी हड़ताल में प्रांतीय पटवारी संघ की चेतावनी, स्वामित्व योजना पर अडिग
गुना में पटवारी हड़ताल शुरू हो गई है। स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री में विक्रेता बनने के विरोध और चार पटवारियों के निलंबन पर प्रांतीय पटवारी संघ ने मोर्चा खोला है। पटवारी बुधवार को कलेक्टोरेट के मुख्य गेट पर दरी बिछाकर बैठ गए। संघ ने 7 अक्टूबर से तीन दिन की पटवारी सामूहिक हड़ताल का फैसला किया है। गुना के पटवारियों ने सरकारी वॉट्सएप ग्रुप भी छोड़ दिए हैं।
गुना में पटवारियों ने प्रशासन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को वे कलेक्टोरेट पहुंचे। मुख्य गेट पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए।
मांग साफ है। चार पटवारियों का निलंबन बिना शर्त वापस हो। कलेक्टर खुद बाहर आकर उनकी बात सुनें।
विरोध की जड़ Swamitva Yojana है। पटवारियों के मुताबिक उन पर Swamitva registry में विक्रेता बनने का दबाव है। विक्रेता यानी बेचने वाला पक्ष।
ऊपर से चार पटवारियों के निलंबन ने गुस्सा बढ़ा दिया। गुना की यह Patwari strike अब पूरे प्रदेश की हड़ताल से जुड़ गई है।
गुना के पटवारी बुधवार को कलेक्टोरेट के मुख्य गेट पर धरने पर बैठे।
पटवारी स्वामित्व रजिस्ट्री में विक्रेता बनने का विरोध कर रहे हैं।
गुना में चार पटवारियों को निलंबित किया गया है।
पटवारी संघों ने 7 अक्टूबर से प्रदेशभर में तीन दिन हड़ताल घोषित की है।
गुना के पटवारियों ने सभी आधिकारिक वॉट्सएप ग्रुप भी छोड़ दिए हैं।
धरने के दौरान डिप्टी कलेक्टर देवांशु शिवहरे मौके पर पहुंचे। उन्होंने पटवारियों को शांत कराने की कोशिश की। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि पांच सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल चेंबर में आकर बात रखे। पटवारियों ने यह प्रस्ताव सिरे से खारिज कर दिया।
पटवारी संघ के पदाधिकारी भी धरने में शामिल थे। प्रदर्शन कलेक्टोरेट परिसर में उग्र रहा। घंटों नारेबाजी चलती रही।
इससे प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया। दूसरे अधिकारियों की मिन्नतें और समझाइश भी बेअसर रहीं।
पदाधिकारियों के मुताबिक निलंबन बिना नोटिस और बिना कानूनी प्रक्रिया के हुआ। इसलिए बातचीत भी चेंबर के बंद दरवाजों के पीछे नहीं होगी। वार्ता कलेक्टोरेट के खुले मैदान में होगी।
गुना पटवारी हड़ताल में दो मांगें सबसे साफ रहीं। पहली, चार पटवारियों का निलंबन बिना शर्त वापस हो। दूसरी, कलेक्टर खुद बाहर आकर बात सुनें। संघ की चेतावनी में निलंबन और नोटिस दोनों की वापसी का जिक्र है।
आखिर यह विवाद शुरू कैसे हुआ? प्रांतीय पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को घोर अन्यायपूर्ण बताया। संघ ने कार्रवाई को दमनकारी और एकतरफा भी कहा है।
ज्ञापन के मुताबिक प्रदेश के पटवारी स्वामित्व योजना में विक्रेता बनने के खिलाफ हैं। यह विरोध प्रांतीय आह्वान (प्रदेश स्तर की अपील) पर है। संघ के मुताबिक 43 जिलों की तरह गुना में भी रजिस्ट्री शून्य है।
अब जरा पीछे चलते हैं। संघ के मुताबिक परिवीक्षाधीन पटवारियों को वॉट्सएप से सेवा समाप्ति के नोटिस मिले। परिवीक्षाधीन यानी प्रोबेशन पर चल रहे पटवारी। संघ ने इस रवैये को तानाशाही बताया है। और यहीं से टकराव बढ़ा।
निलंबित पटवारियों में प्रांतीय जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह किरार शामिल हैं। बाकी तीन हैं ललित मोहन शर्मा, विजय सिंह भील और मेहरबान भील। संघ के मुताबिक चारों पर कार्रवाई बिना कारण बताओ नोटिस और जांच के हुई।
देवास में चार पटवारियों की सेवा समाप्ति हुई है। संघ इसे एकपक्षीय बता रहा है। प्रांतीय पटवारी संघ और मध्य प्रदेश पटवारी संघ की संयुक्त बैठक हुई।
बैठक में 7 अक्टूबर से तीन दिन की पटवारी सामूहिक हड़ताल तय हुई। पटवारी हड़ताल मध्य प्रदेश के सभी जिलों के लिए घोषित हुई है।
विरोध दर्ज कराने के लिए गुना के पटवारी सभी आधिकारिक वॉट्सएप ग्रुपों से निकले। सभी पटवारियों ने यह फैसला एक साथ लिया।
संघ ने साफ चेतावनी दी है। निलंबन और नोटिस वापस नहीं हुए, तो जिले के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। यह कलमबंद हड़ताल (कलम चलाना बंद कर काम रोकना) होगी।
संघ के मुताबिक तब राजस्व का सारा काम ठप हो जाएगा। संघ ने इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर डाली है। संघ ने निलंबन और नोटिस की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया है। फिलहाल पटवारी निलंबन वापसी की मांग पर अड़े हैं।
सोचिए एक बार। राजस्व का काम ठप हुआ, तो आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
मांग साफ है। चार पटवारियों का निलंबन बिना शर्त वापस हो। कलेक्टर खुद बाहर आकर उनकी बात सुनें।
विरोध की जड़ Swamitva Yojana है। पटवारियों के मुताबिक उन पर Swamitva registry में विक्रेता बनने का दबाव है। विक्रेता यानी बेचने वाला पक्ष।
ऊपर से चार पटवारियों के निलंबन ने गुस्सा बढ़ा दिया। गुना की यह Patwari strike अब पूरे प्रदेश की हड़ताल से जुड़ गई है।
समझें क्या है पूरा मामला
पटवारी स्वामित्व रजिस्ट्री में विक्रेता बनने का विरोध कर रहे हैं।
गुना में चार पटवारियों को निलंबित किया गया है।
पटवारी संघों ने 7 अक्टूबर से प्रदेशभर में तीन दिन हड़ताल घोषित की है।
गुना के पटवारियों ने सभी आधिकारिक वॉट्सएप ग्रुप भी छोड़ दिए हैं।
कलेक्टोरेट गेट पर पटवारी हड़ताल
पटवारी संघ के पदाधिकारी भी धरने में शामिल थे। प्रदर्शन कलेक्टोरेट परिसर में उग्र रहा। घंटों नारेबाजी चलती रही।
इससे प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया। दूसरे अधिकारियों की मिन्नतें और समझाइश भी बेअसर रहीं।
पांच सदस्यों का प्रस्ताव क्यों ठुकराया?
पटवारी हड़ताल की मांगें
प्रांतीय पटवारी संघ का ज्ञापन
ज्ञापन के मुताबिक प्रदेश के पटवारी स्वामित्व योजना में विक्रेता बनने के खिलाफ हैं। यह विरोध प्रांतीय आह्वान (प्रदेश स्तर की अपील) पर है। संघ के मुताबिक 43 जिलों की तरह गुना में भी रजिस्ट्री शून्य है।
अब जरा पीछे चलते हैं। संघ के मुताबिक परिवीक्षाधीन पटवारियों को वॉट्सएप से सेवा समाप्ति के नोटिस मिले। परिवीक्षाधीन यानी प्रोबेशन पर चल रहे पटवारी। संघ ने इस रवैये को तानाशाही बताया है। और यहीं से टकराव बढ़ा।
किन चार पटवारियों पर कार्रवाई हुई?
पटवारी सामूहिक हड़ताल का ऐलान
बैठक में 7 अक्टूबर से तीन दिन की पटवारी सामूहिक हड़ताल तय हुई। पटवारी हड़ताल मध्य प्रदेश के सभी जिलों के लिए घोषित हुई है।
वॉट्सएप ग्रुप क्यों छोड़े पटवारियों ने?
पटवारी हड़ताल बढ़ी तो क्या होगा?
संघ के मुताबिक तब राजस्व का सारा काम ठप हो जाएगा। संघ ने इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर डाली है। संघ ने निलंबन और नोटिस की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया है। फिलहाल पटवारी निलंबन वापसी की मांग पर अड़े हैं।
सोचिए एक बार। राजस्व का काम ठप हुआ, तो आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
- गुना में पटवारियों ने किस कारण से प्रशासन के खिलाफ धरना दिया?
गुना में पटवारियों ने चार पटवारियों के निलंबन और स्वामित्व रजिस्ट्री में विक्रेता बनने के दबाव के खिलाफ धरना दिया। - पटवारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
पटवारियों की प्रमुख मांगें हैं: (1) चार पटवारियों का निलंबन बिना शर्त वापस लिया जाए और (2) कलेक्टर स्वयं बाहर आकर उनकी बात सुनें। - अगर पटवारी संघ की मांगें नहीं मानी गई, तो आगामी निर्णय क्या होगा?
अगर पटवारी संघ की मांगें नहीं मानी गईं, तो गुना के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे चुके हैं, जिससे राजस्व का सारा काम ठप हो जाएगा।
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