इंदौर के एलिवेटेड कॉरिडोर पर हाईकोर्ट में सवा घंटे अंतिम बहस, वीडियो प्रेंजेटेशन भी

Sanjay Gupta | Oct 07, 2026, 23:07 IST
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एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सवा घंटे सुनवाई हुई।
एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सवा घंटे सुनवाई हुई।

एलआईजी चौराहा से नवलखा चौराहा तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सवा घंटे से अधिक समय तक अंतिम सुनवाई हुई। शासन की ओर से परियोजना की उपयोगिता समझाने के लिए वीडियो प्रेंजेटेशन भी किया गया है। औपचारिक आदेश अभी आना बाकी है।

याचिकाकर्ता ने यह लगाई आपत्तियां

इंदौर हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता अतुल सेठ और अधिवक्ता पालक मंगानी ने कहा कि वीडियो ठीक है। लेकिन एलिवेटेड कॉरिडोर (Elevated Corridor) की वास्तविक उपयोगिता के समर्थन में ठोस ट्रैफिक आंकड़े और तकनीकी अध्ययन प्रस्तुत नहीं किए गए। याचिकाकर्ता के अनुसार केवल वीडियो के माध्यम से किसी परियोजना की उपयोगिता साबित नहीं की जा सकती।

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इंदौर में सोमवार से सफाईकर्मियों का आंदोलन चल रहा है, जिससे शहर की हालत बेहद खराब हो गई है। इन आंदोलनकारियों का गुस्सा बीजेपी नेताओं पर बढ़ता ही जा रहा है और इस पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। महापौर का कहना है कि कांग्रेस इस सबको भड़का रही है।
इंदौर में सोमवार से सफाईकर्मियों का आंदोलन चल रहा है, जिससे शहर की हालत बेहद खराब हो गई है। इन आंदोलनकारियों का गुस्सा बीजेपी नेताओं पर बढ़ता ही जा रहा है और इस पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। महापौर का कहना है कि कांग्रेस इस सबको भड़का रही है।

जिन इंजीनियर की मंजूरी उनके डिजाइन पर विवाद

बहस के दौरान शासन की ओर से जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (GAD) का उल्लेख किया गया और बताया गया कि इस पर पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर के हस्ताक्षर हैं तथा निर्माण इसी के अनुसार किया जाएगा। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर वाली तकनीकी डिजाइन पर भरोसा किया जा रहा है, उन्हीं के स्तर पर पूर्व में बने कुछ पुलों की डिजाइन को लेकर भी प्रश्न उठे हैं।

बहस में भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज सहित अन्य पुलों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि प्रदेश में 45 से अधिक पुलों की डिजाइन पर पुनर्विचार और सुधार की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में बिना स्वतंत्र और विस्तृत तकनीकी अध्ययन के एलिवेटेड कॉरिडोर को शहर पर लागू करना उचित नहीं होगा।

राहुल गांधी के डिजिटल सत्याग्रह में शिक्षा का मुद्दा वोट चोरी से आगे, एमपी से 2300 आवाजें दर्ज | Rahul Gandhi's Digital Satyagraha: Education Issue Surpasses Vote Theft, 2300 Voices from MP Registered
राहुल गांधी की डिजिटल सत्याग्रह में एमपी से 2300 आवाजें, वोट चोरी से ज्यादा गूंजा शिक्षा का सवाल
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By Sandeep Kumar
राहुल गांधी के डिजिटल सत्याग्रह में मध्य प्रदेश के 53 जिलों से करीब 2300 आवाजें दर्ज हो चुकी हैं। इंदौर 210 आवाजों के साथ सबसे आगे है, भोपाल से 154 दर्ज हुईं। शिक्षा पर सबसे ज्यादा 503 लोगों ने बात रखी। कांग्रेस इसे अनसुनी आवाजों का मंच बता रही है। भाजपा ने इसे नेगेटिव पॉलिटिक्स कहा। एमपी में वोट चोरी की शिकायतें भी आई हैं।
राहुल गांधी के डिजिटल सत्याग्रह में मध्य प्रदेश के 53 जिलों से करीब 2300 आवाजें दर्ज हो चुकी हैं। इंदौर 210 आवाजों के साथ सबसे आगे है, भोपाल से 154 दर्ज हुईं। शिक्षा पर सबसे ज्यादा 503 लोगों ने बात रखी। कांग्रेस इसे अनसुनी आवाजों का मंच बता रही है। भाजपा ने इसे नेगेटिव पॉलिटिक्स कहा। एमपी में वोट चोरी की शिकायतें भी आई हैं।

एक्रोपोलिस की सर्वे रिपोर्ट पर भी आपत्ति

बहस का एक महत्वपूर्ण मुद्दा एक्रोपोलिस कॉलेज की ट्रैफिक सर्वे रिपोर्ट और SGSITS द्वारा उठाई गई आपत्तियों का भी रहा। याचिकाकर्ता ने कहा कि SGSITS की रिपोर्ट/टिप्पणियां करीब एक वर्ष तक विभाग के पास पड़ी रहीं। उनके अनुसार अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक इस संबंध में आवश्यक संयुक्त तकनीकी चर्चा नहीं हुई।

योजना की लगात 700 करोड़ होगी

वहीं परियोजना की लागत का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार करीब 350 करोड़ रुपए की लागत का आंकड़ा वर्ष 2019-20 से चला आ रहा है। जबकि पिछले छह वर्षों में परियोजना के डिजाइन और विभिन्न भुजाओं में बदलाव हुए हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि परियोजना की वास्तविक अंतिम लागत का अब तक स्पष्ट आकलन सामने नहीं आया है और उनके अनुमान के अनुसार कुल लागत 700 से 750 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।

एमपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 10+ जिलों के कलेक्टर और कमिश्नर बदलेंगे, IPS लिस्ट अटकी | Major administrative reshuffle in MP: Collectors and Commissioners of 10+ districts to change, IPS list stuck
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07 Oct 2026 ,
By Sourabh Bhatnagar
मध्य प्रदेश में जल्द बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार 10 से ज्यादा जिलों के कलेक्टर बदलने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही कुछ संभागों के कमिश्नर भी बदले जा सकते हैं। वहीं, दूसरी ओर आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची अटक सकती है। बताया जा रहा है कि IPS अधिकारियों के नामों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।
मध्य प्रदेश में जल्द बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार 10 से ज्यादा जिलों के कलेक्टर बदलने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही कुछ संभागों के कमिश्नर भी बदले जा सकते हैं। वहीं, दूसरी ओर आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची अटक सकती है। बताया जा रहा है कि IPS अधिकारियों के नामों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।

रोटरी से कॉरिडोर पर ट्रैफिक बाधित होगा

प्रस्तावित रोटरी को लेकर याचिकाकर्ता ने कहा कि करीब 24 मीटर की आंतरिक रोटरी बनाए जाने से उसकी वाहन गुजरने की क्षमता सीमित रह सकती है। इससे पीक आवर्स में जाम की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ऐसे रेडियल स्वरूप वाले शहर में केवल एक लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के बजाय अलग-अलग प्रमुख चौराहों पर फ्लाईओवर या अन्य उपयुक्त समाधान अधिक प्रभावी हो सकते हैं। इस मामले में कोर्ट से अनुरोध किया गया कि पूरे प्रोजेक्ट का स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी अध्ययन कराने के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित की जाए।

काम को रोका जाए

मांग की गई कि जब तक समिति की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक परियोजना के कार्य को रोका जाए और समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ता ने अपने अध्ययन के आधार पर दावा किया कि एलिवेटेड कॉरिडोर की सभी भुजाओं को मिलाकर इसकी उपयोगिता 10 प्रतिशत से भी कम बैठती है, जबकि अलग-अलग प्रमुख चौराहों पर बनाए जाने वाले फ्लाईओवरों की संयुक्त उपयोगिता 42 प्रतिशत से अधिक हो सकती है।

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<b>Indore:</b> बाबा रामदेव और बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच चल रहा विवाद औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। रामदेव की कंपनी पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने पूर्व सांसद के खिलाफ घी को लेकर दिए बयान के चलते 50 करोड़ रुपए की मानहानि का केस इंदौर हाईकोर्ट में दायर किया था।

इन्होंने भी रखा पक्ष

वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया, अधिवक्ता मालविका मिश्रा पॉल द्वारा इंदौर उत्थान अभियान समिति की ओर से तर्क रखे गए। इन्होंने एलिवेटेड कॉरिडोर पर लगी आपत्तियों का विरोध करते हुए प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के समर्थन में विस्तृत तर्क रखे।

वरिष्ठ अधिवक्ता बागड़िया ने केवल एक्रोपोलिस रिपोर्ट के आधार पर एलिवेटेड कॉरिडोर की व्यवहार्यता के संबंध में कोई निर्णायक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यह आकलन तब था जब शहर में बीआरटीएस था लेकिन अब नहीं है।

अलग-अलग फ्लाईओवर से ट्रैफिक बाधित होगा

बागड़िया ने तर्क दिया कि कॉरिडोर से गुजरने वाले लंबी दूरी के यातायात को एलिवेटेड स्तर पर संचालित किया जा सकेगा,। जबकि नीचे की मौजूदा सड़क स्थानीय एवं कम दूरी के यातायात के लिए उपलब्ध बनी रहेगी। वहीं हर चौराहे पर अलग फ्लाईओवर बनाए जाने की स्थिति में स्थानीय यातायात को इन संरचनाओं को पार करने अथवा इनके आसपास से निकलने के लिए अलग व्यवस्थाओं की आवश्यकता होगी। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर अंडरपास, अतिरिक्त एप्रोच तथा अन्य यातायात प्रबंधन संबंधी अधोसंरचना बनानी पड़ सकती है। इससे और ट्रैफिक जाम होगा।

शहर के अंदर भी होते हैं कॉरिडोर

सुनवाई के दौरान इस तर्क पर भी विचार किया गया कि एलिवेटेड कॉरिडोर केवल शहरों के बाहर उपयोगी होते हैं और सामान्यतः शहरी क्षेत्रों के भीतर इनका निर्माण नहीं किया जाता। राज्य की ओर से न्यायालय को बताया गया कि कई शहरों की नगरीय सीमा के भीतर भी एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए गए हैं और इस संबंध में भोपाल एवं जबलपुर सहित अन्य शहरों के उदाहरण दिए गए।
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