महाकाल की सवारी में श्यामू की जगह लेगा मैकेनिकल हाथी? पेटा का प्रस्ताव

Sandeep Kumar | Aug 12, 2026, 17:19 IST
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महाकाल की सवारी में श्यामू की जगह लेगा मैकेनिकल हाथी
महाकाल की सवारी में श्यामू की जगह लेगा मैकेनिकल हाथी

महाकाल की शाही सवारी हर साल भक्तों के लिए खास होती है। इस बार सवारी के आगे चलने वाले हाथी को लेकर नई मुश्किल खड़ी हो गई है। मंदिर के पास फिलहाल कोई युवा और स्वस्थ हाथी नहीं है। इसी बीच एक संगठन ने अनोखा हल सुझाया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • महाकाल मंदिर के हाथी श्यामू की हालत बिगड़ गई है।
  • डॉक्टरों ने श्यामू में हर्पीसवायरस बीमारी की पुष्टि की है।
  • बीमारी को हाथियों के लिए खतरनाक बताया जा रहा है।
  • पेटा ने मंदिर को मैकेनिकल हाथी देने का प्रस्ताव दिया।
  • मंदिर समिति पुजारियों की राय के बाद फैसला करेगी।

श्यामू की बिगड़ी सेहत

महाकाल मंदिर का हाथी श्यामू 32 साल का है। वह लंबे समय से श्रावण की शोभायात्राओं का नेतृत्व करता आया है। अब उसके पिछले पैर टेढ़े हो गए हैं। उसे चलने-फिरने में भारी दिक्कत हो रही है।

श्यामू को त्वचा और शरीर से जुड़ी कई समस्याएं भी हैं। जांच में उसमें एलिफेंट एंडोथेलियोट्रोफिक हर्पीसवायरस (EEHV – Elephant Endotheliotropic Herpesvirus) की पुष्टि हुई है। उज्जैन डीएफओ अनुराग तिवारी के मुताबिक यह एक बहुत खतरनाक बीमारी मानी जाती है।

तीन दिन पहले 67 साल की हथिनी सुमा ने एक गहन मेडिकल जांच पास की। इसके बाद उसे श्यामू की जगह शोभायात्रा की जिम्मेदारी दी गई है।

मैकेनिकल हाथी का प्रस्ताव

जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन पेटा ने मंदिर ट्रस्ट के सामने नया प्रस्ताव रखा है। पेटा के सीनियर पॉलिसी और लीगल एडवाइजर विक्रम चंद्रवंशी ने यह जानकारी दी। संगठन का कहना है कि रोबोट हाथी असली हाथी की जगह शोभायात्रा में शामिल हो सकता है।

पेटा के मुताबिक इससे परंपरा भी बनी रहेगी और किसी जानवर को तकलीफ भी नहीं होगी। संगठन ने 26 जुलाई की इंदौर घटना का भी हवाला दिया। उस दिन उज्जैन से लाए गए एक हाथी ने एक 49 साल के ऑटो-रिक्शा चालक को कुचल दिया था।

पेटा का कहना है कि भीड़-भाड़ वाली जगहों पर हाथी ले जाना जानवर और लोग, दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। संगठन चाहता है कि औपचारिक आयोजनों में इस खतरे से बचा जाए।

देशभर में पहले से इस्तेमाल

भारत में यह पहला मौका नहीं है जब किसी मंदिर को मैकेनिकल हाथी दिया गया हो। देशभर के 40 से ज्यादा मंदिरों में रोबोटिक हाथी अपनाए जा चुके हैं। इनमें केरल और कर्नाटक के मंदिर भी शामिल हैं। पेटा अब तक ऐसे 29 हाथी दान कर चुका है।

हाल ही में महाराष्ट्र के पंढरपुर और नवी मुंबई के इस्कॉन मंदिरों में भी ऐसे हाथी पहुंचे हैं। यूपी के कानपुर में भी एक मंदिर को यह मिल चुका है। तेलंगाना सरकार ने भी अपने आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए रोबोटिक हाथी चुना है।

कैसा है यह रोबोट हाथी

त्रिशूर की एक कंपनी इन मैकेनिकल हाथियों को बनाती है। कंपनी के को-फाउंडर प्रशांत पी के मुताबिक हर हाथी करीब 10 फीट ऊंचा होता है। इसका वजन लगभग 800 किलोग्राम रहता है। एक हाथी की कीमत करीब छह लाख रुपए है।

यह मेटल, मेश और स्टील से बना होता है। ऊपर से रबर-फाइबर की फिनिशिंग की जाती है। इसमें पांच मोटर लगे होते हैं, जिनकी मदद से कान, आंखें, सूंड और पूंछ हिलते हैं। यह सिर हिला सकता है और पानी की बौछार भी कर सकता है। पूजा-पाठ के लिए इस्तेमाल होने वाली खास सीट भी यह उठा सकता है।

मंदिर समिति का रुख

महाकाल मंदिर समिति के चेयरमैन और उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि इस साल की शोभायात्राएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इसलिए इस प्रस्ताव पर पुजारियों और अन्य संबंधित लोगों से चर्चा जरूरी होगी।

पुजारियों में असमंजस

पुरोहित समिति के प्रमुख लोकेंद्र व्यास का कहना है कि हाथी धार्मिक परंपरा से जुड़े हैं। वहीं पुजारी समिति के अध्यक्ष विजय शंकर शर्मा ने कहा कि किसी भी फैसले से पहले इस पर विस्तार से बात होनी चाहिए। साफ है कि मंदिर प्रशासन के सामने भावनाओं और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।



FAQ

  1. महाकाल मंदिर के हाथी श्यामू को क्या बीमारी है?
    श्यामू को गंभीर मस्कुलोस्केलेटल समस्या है। साथ ही उसमें एलिफेंट एंडोथेलियोट्रोफिक हर्पीसवायरस की पुष्टि हुई है। इस वजह से उसके चलने-फिरने में दिक्कत हो रही है।
  2. मैकेनिकल हाथी की कीमत कितनी है?
    एक मैकेनिकल हाथी की कीमत करीब छह लाख रुपए है। इसका वजन लगभग 800 किलोग्राम और ऊंचाई करीब 10 फीट होती है। इसे केरल के त्रिशूर की एक कंपनी बनाती है।

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