आदमखोर टाइगर ने दूसरे दिन भी किया मजदूर पर हमला, बाल-बाल बचा

टाइगर स्टेट के नाम से पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश के जंगलों में अंधाधुंध कटाई होने से जंगली जानवर लगातार रिहाइशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। जंगली जानवरों के लिए बढ़ रही पानी और भोजन की कमी रिहायशी इलाकों में लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है...

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Jitendra Shrivastava
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पवन सिलावट, RAISEN.  रायसेन जिले में दूसरे दिन भी आदमखोर टाइगर ने तेंदूपत्ता मजदूर पर हमला किया है। एक दिन पहले रिहायशी क्षेत्र में घूम रहा टाइगर तेंदूपत्ता मजदूर शख्स को मारकर आधा शरीर खा गया था। आज फिर इस जानवर ने हमला किया है। 4 महीने से टाइगर के आतंक से ग्रामीण भयभीत हैं। वहीं वन विभाग के कर्मचारी लगातार आदमखोर जानवर को पकड़ने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं, लेकिन अभी खाली हाथ ही हैं।

डीएफओ ने लोगों से सतर्क रहने की अपील

शनिवार, 18 मई को रायसेन के अमरावद घाटी में तेंदूपत्ता मजदूर विनोद पर टाइगर ने हमला कर दिया। हमले में विनोद बाल-बाल बच गया। घायल मजदूर का वन विभाग के कर्मचारियों ने इलाज कराया। डीएफओ विजय कुमार ने घटना की पुष्टि की। साथ ही जंगल में अकेले न जाने और रायसेन के आसपास इस आदमखोर जानवर से सतर्क रहने की अपील लोगों से की है।

4 महीने से चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन

वन विभाग की टीम द्वारा किए जा रहा आदमखोर टाइगर का रेस्क्यू ऑपरेशन बार-बार नाकाम हो रहा है। जंगलों के किनारे बसे ग्रामीणों को कब इस डर से छुटकारा मिलेगा, वन विभाग के कर्मचारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। लगभग 4 महीने से वन विभाग की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन कर रही है, मगर टीम रेस्क्यू के नाम पर सिर्फ आंख मिचौली का खेल ही खेल रही है।

एक दिन पहले की घटना

नीमखेड़ा के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गए 55 वर्षीय ग्रामीण तेंदूपत्ता मजदूर को बाघ ने हमला कर आधा शरीर खा लिया था। शव की पीएम रिपोर्ट आने के बाद टाइगर के हमले से मौत होने की पुष्टि डीएफओ विजय कुमार ने की थी। हमले में मृतक के परिवार को आठ लाख रुपए का मुआवजा देने की बाद भी कही है। टाइगर स्टेट के नाम से पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश के जंगलों में जारी अंधाधुंध कटाई के कारण यहां जंगली जानवर लगातार रिहाइशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। जंगली जानवरों के लिए बढ़ रही पानी और भोजन की कमी रिहायशी इलाकों के लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। क्योंकि ये जंगली जानवर आए दिन रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। यहां ये अपने भोजन के लिए पालतू जानवरों को ही नहीं, बल्कि अब इंसानों तक को अपना शिकार बनाने लगे हैं। 

रायसेन के अमरावद घाटी तेंदूपत्ता मजदूर आदमखोर टाइगर