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News in Short
- मंत्रियों को अब यात्रा भत्ता ई-चेक से मिलेगा।
- पांच साल तक बिना लेन-देन वाले खाते बंद होंगे।
- कोषालय नियम 2020 में बदलाव, पेंशन का भुगतान ई-हस्ताक्षर से।
- सिक्योरिटी जमा के लिए नए दस्तावेज मान्य होंगे।
- बिना परमिशन के खाता नहीं खुलेगा, दोषी अधिकारी पर कार्रवाई होगी।
News in Detail
एमपी में मोहन सरकार के मंत्रियों को यात्रा भत्ते के लिए अब चेक नहीं मिलेंगे। वित्त विभाग ने नए नियम जारी किए हैं। यात्रा भत्ते का भुगतान अब ई-चेक से होगा। वित्त विभाग ने यह भी कहा कि नया खाता बिना परमिशन के नहीं खुलेगा। पांच साल तक बिना लेन-देन वाले खाते बंद किए जाएंगे। खाते में राशि जमा होने पर ब्याज पर फैसला वित्त विभाग करेगा।
वित्त विभाग ने कोषालय नियम 2020 में बदलाव किए हैं। अब यात्रा भत्ता ई-चेक से दिया जाएगा। शासकीय सेवकों और मंत्रियों को फिजिकल चेक नहीं मिलेगा। पहले यह भुगतान फॉर्म-23 भरकर किया जाता था। संशोधन के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान ई-हस्ताक्षर से होगा।
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कोषालय अधिकारी पुष्टि करेंगे
वित्त नियमों के अनुसार, सरकार को नुकसान से बचाने के लिए सिक्योरिटी की रकम अब सावधि जमा रसीद, राष्ट्रीय बचत पत्र, किसान विकास पत्र या अन्य प्रपत्रों से ली जाएगी। इन दस्तावेजों को स्वीकार करने से पहले कोषालय अधिकारी पुष्टि करेंगे।
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खाता भी होंगे बंद
कोषालय नियमों के अनुसार, पांच साल तक बिना लेन-देन वाले व्यक्तिगत जमा खाते बंद किए जाएंगे। वित्त विभाग समीक्षा करेगा और फिर निर्देश जारी करेगा। अगर खाते बंद नहीं किए गए, तो फिर समीक्षा की जाएगी। सहायक नियम 321 के बदलाव में कहा गया है कि जेल अधिकारियों के खाते और भूमि अर्जन खातों को पांच साल बाद भी बंद नहीं किया जाएगा।
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फैसला वित्त विभाग करेगा
नियमों में बदलाव के तहत राज्य के संस्थानों और निकायों के लिए व्यक्तिगत खाता खोला जाएगा। शासन द्वारा दी गई राशि इन खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इन खातों में अधिशेष राशि जमा की जा सकेगी। इन खातों में ब्याज देने या न देने का फैसला वित्त विभाग करेगा। ब्याज की दर की गणना भी वित्त विभाग करेगा।
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बिना परमिशन नहीं खुलेगा खाता
नियमों के तहत, बिना वित्त विभाग की परमिशन के बैंक खाता नहीं खोला जाएगा। आहरण अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि केवल स्वीकृत खातों में राशि ट्रांसफर की जाए। यदि बिना अनुमति के खाता पाया गया, तो उसे बंद कर दिया जाएगा। इस स्थिति में दोषी अधिकारी पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
स्थानीय निकायों द्वारा व्यक्तिगत जमा खाते कोषालय में खोले जाएंगे। राशि सायबर कोषालय के माध्यम से ऑनलाइन जमा की जाएगी। ब्याज देने का फैसला वित्त विभाग करेगा। नए खाते खोलने के लिए विभागाध्यक्ष की अनुशंसा से प्रस्ताव भेजे जाएंगे। कोषालय अधिकारी सभी खातों का परीक्षण करेंगे। बंद किए जाने योग्य खातों में जमा राशि बंद की जाएगी। सभी प्रशासक और कोषालय अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि परमिशन वित्त विभाग से प्राप्त है या नहीं।
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