विधायक सीखेंगे विधानसभा का ऑनलाइन कामकाज
Sanjay Sharma | Jun 16, 2025, 20:10 IST
मध्यप्रदेश विधानसभा Photograph: (THE SOOTR)
मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्रवाई जल्द ही ऑनलाइन हो जाएगी। इसके लिए ई-विधानसभा का काम तेजी से चल रहा है। इसके साथ ही मप्र भी ई-विधानसभा वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा।
BHOPAL. मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्रवाई जल्द ही ऑनलाइन हो जाएगी। इसके लिए ई-विधानसभा का काम तेजी से चल रहा है। ऑनलाइन काम होने से मप्र भी उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां विधानसभा की कार्रवाई पहले से ऑनलाइन है। यानी मप्र विधानसभा भी पेपरलेस होगी।
इसके लिए विधानसभा सचिवालय जल्द ही विधायकों को भी ऑनलाइन वर्किंग में दक्ष बनाने प्रशिक्षण देने जा रहा है। इस प्रशिक्षण में विधायकों को ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी के तकनीकी पहलू सिखाए जाएंगे।
मानसून सत्र के लिए भी विधायकों को ऑनलाइन विकल्प दिए गए हैं। हांलाकि बीते सत्र में भी कई विधायकों ने ऑनलाइन माध्यम का उपयोग कर प्रश्न भेजे थे। ई-विधान प्रोजेक्ट एनआईसी की देखरेख में शीतकालीन सत्र के बाद से ही चल रहा है।
प्रशिक्षित होंगे
विधानसभा का मानसून सत्र जुलाई माह के दूसरे या अंतिम सप्ताह में बुलाया जा सकता है। इसके लिए विधानसभा सचिवालय ने तैयारियां कर ली हैं। विधानसभा की कार्रवाई को ऑनलाइन करने के लिए भी ई-विधानसभा को लेकर काम जारी है। अभी सत्र की अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और सीएम डॉ.मोहन यादव की वार्ता के बाद ही सत्र की तिथि घोषित की जाएगी। मानसून सत्र के दौरान विधानसभा की ऑनलाइन कार्रवाई को लेकर विधायकों को प्रशिक्षण देने के लिए कैंप लगाने की भी तैयारी कर ली गई है। इसके तहत विधायकों को ये बताया जाएगा कि वे कैसे ऑनलाइन प्रश्न लगा पाएंगे।
ई-विधानसभा के लिए विधानसभा सचिवालय द्वारा कम्प्युटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीदी हो रही है। विधानसभा की कार्रवाई डिजिटल होने के बाद सत्र से संबंधित प्रश्नोत्तरी, सदन के संचालन और अन्य सभी कार्रवाई ऑनलाइन उपलब्ध होगी।
विधायकों अपने सवाल ऑनलाइन भेज पाएंगे और उन्हें इनके जवाब के अलावा पेश होने वाले बिल, विधानसभा से जुड़ी जानकारी और विभिन्न विषयों पर होने वाली चर्चा भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इसको सफलतापूर्वक लागू करने विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में सरकार के मंत्री, सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों की बैठक भी हो चुकी है।
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पेपरलेस विधानसभा की कार्रवाई को लेकर प्रदेश में तेजी से काम जारी है। ई-विधानसभा के माध्यम से कार्रवाई ऑनलाइन होने के बाद मप्र विधानसभा भी देश के उन चुनिंदा राज्यों में शुमार होगी जहां अब पूरी कार्रवाई ऑनलाइन हो चुकी है।
विधानसभा को डिजिटल किए जाने की मांग लंबे समय से जारी है। इस संबंध में विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों और सरकार के जवाबों में पारदर्शिता को लेकर विपक्ष भी सवाल उठा चुका है।
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सदन के सदस्यों की सीट पर ही डिजिटल स्क्रीन होगी। इसके माध्यम से वे कार्रवाई में शामिल होंगे। इसी स्क्रीन पर विधायक अपने द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जवाब भी देख सकेंगे। वहीं इस संबंधित जानकारी भी ऑनलाइन ही उपलब्ध हो जाएगी।
इस जानकारी के लिए विभागों के अधिकारियों की भागदौड़ भी कम हो जाएगी। ई-विधानसभा के सत्रों में दस्तावेजों के लिए बड़े स्तर पर कागज खर्च होता है। ऑनलाइन वर्किंग से कागज का उपयोग सीमित रह जाएगा और पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।
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इसके लिए विधानसभा सचिवालय जल्द ही विधायकों को भी ऑनलाइन वर्किंग में दक्ष बनाने प्रशिक्षण देने जा रहा है। इस प्रशिक्षण में विधायकों को ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी के तकनीकी पहलू सिखाए जाएंगे।
मानसून सत्र के लिए भी विधायकों को ऑनलाइन विकल्प दिए गए हैं। हांलाकि बीते सत्र में भी कई विधायकों ने ऑनलाइन माध्यम का उपयोग कर प्रश्न भेजे थे। ई-विधान प्रोजेक्ट एनआईसी की देखरेख में शीतकालीन सत्र के बाद से ही चल रहा है।
प्रशिक्षित होंगे विधायक
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और सीएम डॉ.मोहन यादव की वार्ता के बाद ही सत्र की तिथि घोषित की जाएगी। मानसून सत्र के दौरान विधानसभा की ऑनलाइन कार्रवाई को लेकर विधायकों को प्रशिक्षण देने के लिए कैंप लगाने की भी तैयारी कर ली गई है। इसके तहत विधायकों को ये बताया जाएगा कि वे कैसे ऑनलाइन प्रश्न लगा पाएंगे।
उपकरणों की खरीदी जारी
विधायकों अपने सवाल ऑनलाइन भेज पाएंगे और उन्हें इनके जवाब के अलावा पेश होने वाले बिल, विधानसभा से जुड़ी जानकारी और विभिन्न विषयों पर होने वाली चर्चा भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इसको सफलतापूर्वक लागू करने विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में सरकार के मंत्री, सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों की बैठक भी हो चुकी है।
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विपक्ष भी कर रहा है मांग
विधानसभा को डिजिटल किए जाने की मांग लंबे समय से जारी है। इस संबंध में विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों और सरकार के जवाबों में पारदर्शिता को लेकर विपक्ष भी सवाल उठा चुका है।
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ऑनलाइन वर्किंग के फायदे
इस जानकारी के लिए विभागों के अधिकारियों की भागदौड़ भी कम हो जाएगी। ई-विधानसभा के सत्रों में दस्तावेजों के लिए बड़े स्तर पर कागज खर्च होता है। ऑनलाइन वर्किंग से कागज का उपयोग सीमित रह जाएगा और पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।
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